CJP Protest 2.0: कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नया देशव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि अगर तय समय में इस्तीफा नहीं आता तो गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को मुंबई से प्रदर्शन की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद यह अभियान देश के अन्य शहरों तक बढ़ाया जाएगा।
CJP ने 24 सितंबर को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। संगठन का दावा है कि समयसीमा बीत जाने के बाद अब आंदोलन का अगला चरण तय हो चुका है। CJP की रत्ना ने बताया कि मुंबई से शुरू होने वाले इस अभियान को लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों से जोड़ा गया है।
संगठन ने सिर्फ इस्तीफे तक सीमित मांग नहीं रखी है। आगामी चुनावों को रोकने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को स्थगित करने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने जैसी बातें भी सामने रखी गई हैं।
CJP Protest 2.0: CJP ने इस्तीफे की मांग क्यों दोहराई?
CJP का यह अभियान चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर आई एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ। संगठन ने आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं। CJP का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है।
संगठन ने SIR से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र निगरानी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले कानून में बदलाव की मांग भी रखी है। ये मांगें 24 सितंबर की दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी गई थीं। CJP ने स्पष्ट किया कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते तो देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने आंतरिक प्रक्रिया का हवाला दिया है। आयोग का कहना है कि अलग अलग राय, लिखित टिप्पणियां और आंतरिक विचार विमर्श संस्थागत कामकाज का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR समेत पिछले एक साल के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
आंदोलन की शुरुआत मुंबई से क्यों?
CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने 25 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट में अगली रणनीति बताई। उन्होंने कहा कि इस्तीफा नहीं आने पर 2 अक्टूबर से मुंबई में देशव्यापी प्रदर्शन शुरू होगा। इसके बाद अभियान को दूसरे शहरों तक ले जाने की योजना है।
मुंबई को शुरुआती केंद्र बनाने का फैसला संगठन की नई रणनीति का हिस्सा लगता है। CJP ने पहले भी बड़े प्रदर्शन किए हैं, लेकिन इस बार मुद्दा शिक्षा से हटकर चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर केंद्रित है। संगठन इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों का अभियान बता रहा है।
दिल्ली में बाद में बड़ा प्रदर्शन करने की भी बात कही गई है। CJP ने इसे जंतर मंतर 2.0 नाम दिया है। इससे पहले संगठन ने दिल्ली के जंतर मंतर पर NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबा प्रदर्शन किया था। अब वही स्थान नए अभियान के बाद के चरण के लिए चुना जा सकता है।
CJP Protest 2.0: पहले आंदोलन से यह अभियान कितना अलग है?
पहले CJP आंदोलन का मुख्य केंद्र NEET और शिक्षा व्यवस्था था। उस समय संगठन ने परीक्षा प्रणाली और छात्रों से जुड़े सवाल उठाए थे। अब फोकस पूरी तरह चुनाव आयोग, मतदाता सूची और SIR पर शिफ्ट हो गया है।
अगस्त में CJP ने देशभर में संगठन को जमीनी स्तर तक फैलाने और नए अभियान की रणनीति बनाने की बात कही थी। वर्तमान ऐलान उसी विस्तार योजना का अगला कदम दिखता है। संगठन अब चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को अपने मुख्य एजेंडे में रख रहा है।
CJP ने आगामी चुनावों को रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने जैसी मांगें भी रखी हैं। ये मांगें पिछले अभियान से विषय और दायरे दोनों में अलग हैं। संगठन का दावा है कि SIR प्रक्रिया पर स्वतंत्र निगरानी जरूरी है।
चुनाव आयोग और SIR पर क्या सवाल हैं?
CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कई सवाल उठाए हैं। संगठन चाहता है कि इस प्रक्रिया को स्थगित किया जाए और पुरानी सूची बहाल की जाए। साथ ही SIR से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि आंतरिक चर्चाएं सामान्य प्रक्रिया हैं। आयोग के अनुसार पिछले एक साल के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। CJP फिर भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़ा हुआ है और इसे अपने आंदोलन की केंद्रीय मांग बनाए हुए है।
संगठन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की बात भी कही है। ये मांगें 24 सितंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी गई थीं और अब इन्हें देशव्यापी प्रदर्शन से जोड़ दिया गया है।
CJP Protest 2.0: अब आगे क्या हो सकता है?
CJP के मौजूदा प्लान के मुताबिक 2 अक्टूबर को मुंबई से प्रदर्शन शुरू होगा। अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते तो अभियान अन्य शहरों तक जाएगा। दिल्ली में जंतर मंतर 2.0 का कार्यक्रम बाद के चरण में रखा जा सकता है।
संगठन इसे लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के खिलाफ अभियान के रूप में पेश कर रहा है। अब देखना यह होगा कि गांधी जयंती वाले दिन मुंबई से शुरू होने वाला यह आंदोलन कितना व्यापक रूप लेता है और कितने शहरों तक पहुंचता है।
CJP ने पहले भी बड़े प्रदर्शन किए हैं, इसलिए इस बार की तैयारी को संगठन अपने विस्तार के साथ जोड़ रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहने का मतलब है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और चर्चा में रह सकता है।
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