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चांदी खरीदने से पहले क्या जानें: सिक्के, बर्तन, गहने और निवेश के विकल्पों में फर्क

चांदी की शुद्धता कैसे समझें, BIS हॉलमार्क, सिक्के, बार, बर्तन और गहनों में अंतर, मेकिंग चार्ज, GST, भाव कहां देखें, बिल क्यों जरूरी है, सिल्वर ETF क्या है और बेचते समय क्या ध्यान रखें।

धनतेरस पर चांदी खरीदने से पहले ध्यान रखने वाली बातों का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • धनतेरस पर धातु खरीदने की परंपरा में सोने के साथ चांदी भी बहुत लोकप्रिय है।
  • भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS चांदी और चांदी के सामान की हॉलमार्किंग के मानक तय करता है।
  • चांदी का भाव रोज बदलता है। खरीदने से पहले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA की वेबसाइट या भरोसेमंद स्रोत पर उस दिन का भाव देख लें।
  • जो लोग केवल निवेश के लिए चांदी लेना चाहते हैं, उनके लिए सिल्वर ETF एक विकल्प है।

धनतेरस पर धातु खरीदने की परंपरा में सोने के साथ चांदी भी बहुत लोकप्रिय है। चांदी के सिक्के, लक्ष्मी गणेश के सिक्के, पूजा के बर्तन और पायल जैसे गहने कई परिवारों की खरीदारी का हिस्सा होते हैं। चांदी सोने से सस्ती है, लेकिन खरीदते समय सावधानी उतनी ही जरूरी है। जानिए चांदी खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखें। इस लेख में चांदी के भाव नहीं दिए गए हैं, क्योंकि वे रोज बदलते हैं।

शुद्धता कैसे समझें

चांदी की शुद्धता आम तौर पर हजार में हिस्से के रूप में बताई जाती है। जैसे 999 का मतलब है लगभग पूरी तरह शुद्ध चांदी, जबकि गहनों में मजबूती के लिए दूसरी धातु मिलाई जाती है, इसलिए उनकी शुद्धता कम होती है। खरीदते समय दुकानदार से पूछें कि सामान किस शुद्धता का है और यही बिल में भी लिखवाएं।

मुख्य बातें: धनतेरस पर चांदी खरीदने से पहले ध्यान रखने वाली बातों का ग्राफिक
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हॉलमार्क

भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS चांदी और चांदी के सामान की हॉलमार्किंग के मानक तय करता है। हॉलमार्क वाली चांदी पर शुद्धता का निशान और पहचान कोड होता है। चांदी की हॉलमार्किंग से जुड़े ताजा नियम, यानी यह किन चीजों पर अनिवार्य है और किन पर नहीं, BIS की वेबसाइट या BIS Care ऐप पर जांचें। हॉलमार्क वाले सामान को खरीदना ज्यादा भरोसेमंद है।

सिक्के, बार, बर्तन या गहने

  • सिक्के और बार: शुद्धता ज्यादा होती है, बनाने का खर्च कम होता है, इसलिए निवेश के नजरिए से बेहतर माने जाते हैं
  • बर्तन: पूजा और उपहार के लिए पसंद किए जाते हैं, इनमें कारीगरी का खर्च ज्यादा हो सकता है
  • गहने: पहनने के लिए होते हैं, इनमें मेकिंग चार्ज सबसे ज्यादा होता है और शुद्धता कम होती है

बेचते समय दुकानदार आम तौर पर धातु के वजन और शुद्धता का ही मूल्य देता है, मेकिंग चार्ज वापस नहीं मिलता।

यह भी पढ़ें: सोना खरीदते समय ध्यान रखें: BIS हॉलमार्क, 6 अंकों का HUID, कैरेट, मेकिंग चार्ज और बिल की जांच | Silver Cleaning Tips: पूजा के काले पड़े चांदी के बर्तनों को कैसे चमकाएं: जानिए घरेलू चीजों से सफाई के आसान और असरदार तरीके

भाव, मेकिंग चार्ज और GST

चांदी का भाव रोज बदलता है। खरीदने से पहले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA की वेबसाइट या भरोसेमंद स्रोत पर उस दिन का भाव देख लें। दुकानदार से धातु की कीमत, मेकिंग चार्ज और GST अलग-अलग पूछें। अलग-अलग दुकानों पर कुल कीमत की तुलना करें।

बिल क्यों जरूरी है

पक्के बिल में वजन, शुद्धता, भाव, मेकिंग चार्ज, GST और हॉलमार्क की जानकारी होनी चाहिए। बिल से आगे बेचने, बदलने या किसी विवाद में मदद मिलती है।

सिल्वर ETF

जो लोग केवल निवेश के लिए चांदी लेना चाहते हैं, उनके लिए सिल्वर ETF एक विकल्प है। यह शेयर बाजार में खरीदा-बेचा जाता है और SEBI के नियमों के दायरे में आता है। इसके लिए डीमैट खाता जरूरी है। निवेश से पहले खर्च और जोखिम समझें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या चांदी का सिक्का बैंक से ले सकते हैं?

कुछ बैंक और भरोसेमंद ज्वेलर्स सिक्के बेचते हैं। बैंक आम तौर पर सिक्के वापस नहीं खरीदते, यह पहले जान लें।

स्रोत: भारतीय मानक ब्यूरो: हॉलमार्किंग, इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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