US Iran Stock Crash: बुधवार दो सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार शुरू होते ही जोरदार बिकवाली देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर निवेशकों पर पड़ा। कच्चे तेल की कीमत एक महीने बाद पहली बार 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।

सुबह करीब साढ़े नौ बजे सेंसेक्स 760 अंक गिरकर 76183 पर था जबकि निफ्टी 232 अंक टूटकर 23823 पर आ गया। दिन में सेंसेक्स 808 अंक तक लुढ़का और निफ्टी ने 23850 का स्तर तोड़ते हुए 23807 का निचला स्तर छुआ। तेल आयातक देश होने के कारण भारत पर लागत बढ़ने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ा दी।

US Iran Stock Crash: बाजार में इतनी तेज गिरावट क्यों आई

गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव है। अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की खबर आई। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार आईआरजीसी ने जॉर्डन के कैंप टिटिन में अमेरिकी बैरक पर हमले का दावा किया। बहरीन के शेख ईसा एयरबेस को भी निशाना बनाने की बात कही गई। निवेशकों में भू-राजनीतिक जोखिम की चिंता बढ़ गई।

कच्चा तेल 97 डॉलर के करीब कैसे पहुंचा

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में तेज उछाल आया। कारोबार के दौरान ब्रेंट 5.91 प्रतिशत चढ़कर 96.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। भारत जैसे आयातक देश पर इसका सीधा दबाव पड़ता है। निवेशक तेल की इस तेजी को बाजार के लिए नकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

US Iran Stock Crash: एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल

भारत अकेला बाजार नहीं था जहां बिकवाली हुई। जापान के निक्केई में 2.90 प्रतिशत की गिरावट रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.08 प्रतिशत टूटा। शंघाई कंपोजिट 1.14 प्रतिशत और हांगकांग हैंग सेंग 1.35 प्रतिशत फिसला। अमेरिकी बाजार मंगलवार को लगातार तीसरे सत्र में गिरकर बंद हुए। डाउ जोन्स 0.8 प्रतिशत एसएंडपी 500 0.71 प्रतिशत और नैस्डैक एक प्रतिशत नीचे रहा।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने से क्या असर पड़ा

अमेरिका में दस वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.79 प्रतिशत हो गई जो सोमवार को 4.75 प्रतिशत थी। यील्ड बढ़ने से जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकलने की आशंका बढ़ती है। इससे भी निवेशकों की चिंता बढ़ी। वैश्विक स्तर पर सेंटीमेंट कमजोर रहने से भारतीय बाजार पर दबाव बना रहा। घटनाक्रम पर नजरें टिकी हुई हैं।

US Iran Stock Crash: निवेशकों के लिए अभी क्या मायने रखता है

फिलहाल बाजार की निगाह सिर्फ सूचकांकों पर नहीं बल्कि तनाव और तेल कीमतों पर है। अगर भू-राजनीतिक स्थिति और बिगड़ती है तो तेल और महंगा हो सकता है। इससे मुद्रास्फीति और कंपनी मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए दबाव नहीं बना रहे। तनाव कम होने का स्पष्ट संकेत फिलहाल नहीं मिला है।ईरान-अमेरिका तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है और भारतीय शेयर बाजार इसकी चपेट में आ गया।

सेंसेक्स के 808 अंक टूटने और निफ्टी के 23850 से नीचे जाने से निवेशकों में घबराहट दिखी। कच्चे तेल का 97 डॉलर के करीब पहुंचना भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट रही। अब आगे का रुख तनाव कम होने या बढ़ने पर निर्भर करेगा। निवेशक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि तेल कीमतें और भू-राजनीतिक खबरें निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करेंगी।

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