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Nepal Flood Death Toll: नेपाल बाढ़ में हजार से ज्यादा मौतें, रिपोर्ट में कहा गया दिनों पहले दिखे थे खतरे के संकेत

Nepal Flood Death Toll: नेपाल बाढ़ में हजार से ज्यादा मौतें, रिपोर्ट में कहा गया दिनों पहले दिखे थे खतरे के संकेत
Nepal Flood Death Toll

सारांश

  • Nepal Flood Death Toll: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण अचानक बाढ़ का शिकार अब तक एक हजार से ज्यादा लोग हो चुके हैं।
  • अगर समय रहते चेतावनी व्यवस्था होती तो जानें बच सकती थीं। भारत ने अब तक 163 अपने नागरिकों को निकाला है और राहत कार्य जारी है।
  • इस बड़े पैमाने के आंदोलन से चार से अधिक तीव्रता का भूकंपीय संकेत उत्पन्न हुआ।
  • भारत की सुरंग बचाव टीम चिलिमे के जलविद्युत सुरंगों में तैनात है।

Nepal Flood Death Toll: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण अचानक बाढ़ का शिकार अब तक एक हजार से ज्यादा लोग हो चुके हैं। सुरक्षा बलों ने आठ जिलों से और शव बरामद किए हैं जिससे मौतों का आंकड़ा 1050 के पार पहुंच गया है।

करीब चार हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं जबकि लगभग 12 हजार लोगों को बचाया जा चुका है। हाईरिस्क रिपोर्ट में कहा गया है कि सैटेलाइट तस्वीरों में हिमस्खलन के संकेत पहले से दिख रहे थे और ग्लेशियर की सतह पर दरार फैल रही थी।

अगर समय रहते चेतावनी व्यवस्था होती तो जानें बच सकती थीं। भारत ने अब तक 163 अपने नागरिकों को निकाला है और राहत कार्य जारी है।

Nepal Flood Death Toll: रिपोर्ट में क्या चेतावनी के संकेत बताए गए

हाईरिस्क रिपोर्ट के अनुसार घटना से कुछ दिन पहले सैटेलाइट तस्वीरों में हिमस्खलन के संकेत मौजूद थे। ग्लेशियर की सतह पर दरार फैलती दिख रही थी जो बाद में ढह गई। इन संकेतों को समय रहते पकड़ा जा सकता था। रिपोर्ट में कहा गया कि बेहतर तैयारी और पूर्व चेतावनी प्रणाली से जानें बचाई जा सकती थीं। क्षेत्र में हाल ही में कुछ झीलों पर चेतावनी व्यवस्था शुरू हुई थी लेकिन इस स्थान पर ग्लेशियर संबंधी खतरे के लिए कोई चालू प्रणाली नहीं थी।

रसुवागढ़ी पर चेतावनी का समय क्यों कम था

शुरुआती हिमस्खलन की गति इतनी तेज थी कि पारंपरिक नदी आधारित चेतावनी प्रणालियों से मिलने वाला समय बहुत कम रहता। नेपाल-चीन सीमा पर रसुवागढ़ी चेकपॉइंट पर सफल निकासी के लिए वह समय पर्याप्त नहीं होता। नीचे की ओर दस मिनट या उससे अधिक का समय मिलने पर अच्छी व्यवस्था वाले सिस्टम कई जानें बचा सकते थे। रिपोर्ट ने इस अंतर को रेखांकित किया है।

Nepal Flood Death Toll: भूकंप जैसे संकेत का क्या मतलब है

इस बड़े पैमाने के आंदोलन से चार से अधिक तीव्रता का भूकंपीय संकेत उत्पन्न हुआ। रिपोर्ट का कहना है कि भविष्य में ऐसी भूकंपीय प्रणालियों का उपयोग बड़े पैमाने पर पूर्व चेतावनी के लिए किया जा सकता है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में भी समय रहते अलर्ट दिया जा सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सबक माना जा रहा है। अभी इस दिशा में और अध्ययन की जरूरत बताई गई है।

मौतों और लापता लोगों की ताजा स्थिति

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार अब तक 1050 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। आठ जिलों से अतिरिक्त शव बरामद किए गए हैं। लगभग चार हजार लोग अभी भी लापता हैं। करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। बचाव कार्य कठिन परिस्थितियों में जारी है। बारिश और मलबे के कारण पहुंच मुश्किल बनी हुई है।

भारत की ओर से क्या मदद की जा रही है

भारत ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 163 अपने नागरिकों को निकाला है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्य चल रहा है। पिछली जानकारी के बाद पांच और लोगों को निकाला गया। मंगलवार को 151 भारतीय नागरिक चीन से निकले। भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम रविवार से काठमांडू में काम कर रही है।

Nepal Flood Death Toll: चिलिमे सुरंग में बचाव दल की चुनौतियां

भारत की सुरंग बचाव टीम चिलिमे के जलविद्युत सुरंगों में तैनात है। टीम को बेहद सीमित जगह, इलाके के कारण उपकरण इस्तेमाल की दिक्कत और दलदली फर्श जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। अभिनव तरीकों और तात्कालिक फ्लोट का उपयोग कर टीम अंदर तक पहुंच सकी। उसका प्रयास अगले दिन भी जारी रहेगा ताकि फंसे लोगों को निकाला जा सके।

परिस्थितियां बेहद कठिन बताई गई हैं।नेपाल की इस विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में पूर्व चेतावनी प्रणालियों की कमी को उजागर किया है। हाईरिस्क रिपोर्ट के अनुसार ग्लेशियर पर दरार और सैटेलाइट संकेत पहले से मौजूद थे लेकिन उस स्थान पर कोई चालू चेतावनी व्यवस्था नहीं थी। रसुवागढ़ी जैसे सीमावर्ती बिंदु पर समय बहुत कम मिलता जबकि नीचे की ओर व्यवस्था होने से जानें बच सकती थीं।

भारत अपने नागरिकों को निकालने और तकनीकी मदद देने में जुटा है। अब जरूरत इस बात की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत निगरानी और चेतावनी तंत्र विकसित किया जाए ताकि इतनी बड़ी तबाही दोबारा न हो।

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लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

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