Tiger Logistics Share: सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को भले ही भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव हावी रहा हो, लेकिन पेनी और स्मॉल-कैप कैटेगरी के कुछ शेयरों ने निवेशकों का भरपूर ध्यान खींचा। इनमें लॉजिस्टिक्स सेक्टर से जुड़ी प्रमुख कंपनी टाइगर लॉजिस्टिक्स (इंडिया) के शेयर भी शामिल रहे। बंबई शेयर बाजार यानी बीएसई पर इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान इस कंपनी के शेयरों में चार प्रतिशत से अधिक की शानदार तेजी दर्ज की गई। कम कीमत वाले इस शेयर में अचानक आई इस लिवाली के पीछे एक बड़ा विनियामक कारण जुड़ा हुआ है, जिसने बाजार के जानकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या निवेशकों के लिए यह तेजी किसी नए अवसर का संकेत है या फिर यह महज एक अल्पकालिक उछाल है? यह सवाल इस समय बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Tiger Logistics Share: आरबीआई के कंपाउंडिंग ऑर्डर से जुड़ा है पूरा मामला
कंपनी की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस पूरी हलचल की मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के फॉरेन एक्सचेंज डिपार्टमेंट से मिला एक कंपाउंडिंग ऑर्डर है। केंद्रीय बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी फेमा (FEMA) के नियमों के अनुपालन से जुड़े एक मामले में यह आदेश जारी किया है। इस प्रावधान के तहत आरबीआई विदेशी मुद्रा से जुड़े उन नियमों के उल्लंघनों का निपटारा करता है जिन्हें कंपनियों द्वारा स्वीकार किया जाता है, और इसके लिए एक तय मौद्रिक जुर्माने या राशि का भुगतान करना होता है। केंद्रीय बैंक ने टाइगर लॉजिस्टिक्स पर 59,981 रुपये की मामूली राशि का भुगतान तय करते हुए इस मामले को पूरी तरह से सुलझा लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस औपचारिकता के पूरा होने के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया है और इसके रोजमर्रा के कामकाज पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
शेयरों का प्रदर्शन और उतार-चढ़ाव भरा सफर
अगर इस स्मॉल-कैप शेयर के पिछले प्रदर्शन पर नजर डालें तो यह पिछले कुछ समय से सुस्त चाल चल रहा था। मंगलवार को यह शेयर अपने पिछले बंद भाव 27.03 रुपये के आसपास खुला और देखते ही देखते करीब 4.1 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए 28.13 रुपये के इंट्राडे हाई पर जा पहुंचा। अगर इस साल के अब तक के प्रदर्शन की बात करें तो टाइगर लॉजिस्टिक्स के शेयर बिकवाली के दबाव में रहे हैं और इसमें लगभग 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की चुकी है। पिछले साल 18 सितंबर को यह शेयर 56.74 रुपये के अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर तक गया था, जबकि इस साल 23 मार्च को यह गिरकर 22.87 रुपये के 52-हफ्ते के निचले स्तर तक भी लुढ़क चुका था। कम कीमत वाले शेयरों में इस तरह के उतार-चढ़ाव अक्सर छोटे निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
Tiger Logistics Share: वित्तीय नतीजे और कंपनी की शेयरहोल्डिंग का गणित
नियामक मामलों के बीच कंपनी ने अपने हालिया वित्तीय नतीजे भी जारी किए हैं, जो मिले-जुले संकेत देते हैं। जून 2025 में समाप्त हुई पिछली तिमाही के दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट 4.71 करोड़ रुपये था, जो जून 2026 में समाप्त हुई तिमाही में घटकर 2.17 करोड़ रुपये रह गया है, यानी इसमें लगभग 53.93 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि, दूसरी तरफ कंपनी की बिक्री में अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल की समान तिमाही के 102.52 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार बिक्री बढ़कर 152.53 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जिसमें करीब 48.78 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो इसमें व्यक्तिगत प्रमोटर्स के पास कुल 24.05 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी हरप्रीत सिंह मल्होत्रा के पास है जिनके नाम पर 19.50 प्रतिशत यानी दो करोड़ से अधिक शेयर दर्ज हैं। इसके अलावा बीनू और सिमर मल्होत्रा के पास भी दो प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी है, जबकि शेष 33.43 प्रतिशत हिस्सा अन्य प्रमोटर ग्रुप के पास सुरक्षित है।
विदेशी मुद्रा नियमों से जुड़े तकनीकी मामले के निपटारे के बाद निवेशकों का इस शेयर के प्रति रुख सकारात्मक होता दिख रहा है। हालांकि, वित्तीय आंकड़ों में दिख रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए जानकारों का मानना है कि ऐसे शेयरों में निवेश से पहले वित्तीय स्थिति की गहराई से समीक्षा करना बेहद जरूरी है। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है, और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में यह शेयर अपनी इस तेजी को बरकरार रख पाता है या नहीं।
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