Chini ke Daam: मंगलवार को देश में चीनी की औसत मिल कीमतें 5400 रुपये से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। एक साल पहले यही कीमत करीब 3900 रुपये प्रति क्विंटल थी। नए सत्र 2026-27 की शुरुआत में स्टॉक कम रहने की आशंका से कीमतों में जोरदार तेजी आई है। खुदरा बाजार में भी चीनी के भाव 13 प्रतिशत बढ़कर 18 अगस्त को 52.3 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं।

उद्योग और शोधकर्ताओं के अनुमानों में अंतर है लेकिन कुल मिलाकर सप्लाई तंग रहने के संकेत हैं। खाद्य मंत्रालय मिलों के स्टॉक पर कड़ी नजर रख रहा है।

Chini ke Daam: मिल कीमतें क्यों पहुंचीं रिकॉर्ड स्तर पर?

मंगलवार को चीनी की औसत मिल कीमत 5400 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में पहुंच गई। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। एक साल पहले औसत मिल कीमत 3900 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी सालाना आधार पर भारी बढ़ोतरी हुई है। एक उद्योग निकाय ने यह जानकारी दी। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सत्र के लिए शुरुआती स्टॉक कम रहने की संभावना को मुख्य वजह माना जा रहा है। इससे बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है।

खुदरा कीमत में भी दिखी 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मिल दरों में बढ़ोतरी के साथ खुदरा कीमत भी चढ़ गई है। 18 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.3 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। एक साल पहले यह 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। घरेलू इस्तेमाल और त्योहारी सीजन को देखते हुए कीमतों में यह उछाल महत्वपूर्ण है।

Chini ke Daam: नए सत्र के लिए स्टॉक को लेकर अलग-अलग अनुमान

नए 2026-27 सत्र यानी अक्टूबर-सितंबर के लिए शुरुआती स्टॉक 50 लाख टन की घरेलू जरूरत से कम रहने की संभावना जताई जा रही है। सरकार ने अभी इस आंकड़े को अंतिम रूप नहीं दिया है। उद्योग का एक वर्ग बचे हुए स्टॉक को 40 से 42 लाख टन बता रहा है। वहीं शोधकर्ता इसे 32 से 35 लाख टन मान रहे हैं। दोनों ही अनुमान सप्लाई की तंगी की ओर इशारा करते हैं। मौजूदा 2025-26 सत्र की शुरुआत 1 अक्टूबर 2025 को 47 लाख टन स्टॉक के साथ हुई थी।

उपलब्धता और घरेलू जरूरत का गणित

इस साल 280 लाख टन के अनुमानित उत्पादन और 7 लाख टन निर्यात को ध्यान में रखते हुए कुल उपलब्धता 320 लाख टन बैठती है। देश में चीनी की घरेलू जरूरत 285 लाख टन आंकी गई है। इससे पहले का बचा स्टॉक करीब 35 लाख टन रह जाता है। यह 50 लाख टन की जरूरत से काफी कम है। इसी वजह से मिल कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। कम स्टॉक की आशंका ने बाजार को तेजी का रुख दे दिया है।

Chini ke Daam: खाद्य मंत्रालय रख रहा है कड़ी निगरानी

खाद्य मंत्रालय देश भर की चीनी मिलों द्वारा बेचे जा रहे स्टॉक पर सख्ती से नजर रख रहा है। मिलों को निर्देश दिया गया है कि वे ऑनलाइन फॉर्म और जांचे गए ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके खरीदारों को बेचे गए तथा उनके द्वारा उठाए गए स्टॉक की सही जानकारी दें। इससे देश में चीनी की उपलब्धता की साफ तस्वीर सामने आएगी। सही आंकड़ों से बाजार में स्थिरता लाने में मदद मिल सकती है। मंत्रालय उपलब्धता पर पूरा ध्यान दे रहा है।

चीनी की मिल कीमतें मंगलवार को 5400-5500 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गईं। एक साल में यह बढ़ोतरी काफी तेज रही है। खुदरा बाजार में भी भाव 13 प्रतिशत चढ़कर 52.3 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए। नए सत्र में शुरुआती स्टॉक कम रहने की आशंका मुख्य वजह है। उद्योग और शोधकर्ताओं के अनुमानों में अंतर होने के बावजूद सप्लाई तंग रहने के संकेत साफ हैं। खाद्य मंत्रालय मिलों के स्टॉक की निगरानी बढ़ा रहा है ताकि उपलब्धता की सही तस्वीर मिले। आगे कीमतों का रुख स्टॉक की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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