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RG Kar Case: पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष पर भीड़ का हमला, अंतिम संस्कार में कथित जल्दबाजी के आरोप में गिरफ्तारी के बाद भड़का गुस्सा

RG Kar Case: पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष पर भीड़ का हमला, अंतिम संस्कार में कथित जल्दबाजी के आरोप में गिरफ्तारी के बाद भड़का गुस्सा
RG Kar Case
RG Kar Case: पश्चिम बंगाल के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल मामले में एक नया और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पीड़िता के शव का परिवार की इच्छा के खिलाफ जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किए गए पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक निर्मल घोष को जब पुलिस अदालत ले जा रही थी, तब आक्रोशित भीड़ ने उन पर हमला बोल दिया। उत्तर 24 परगना जिले के खरदाह थाने के बाहर एकत्र हुई जनता के गुस्से का सामना पूर्व विधायक और उनके सहयोगियों को करना पड़ा। सुरक्षा घेरे के बावजूद भीड़ ने उन पर लात-घूंसे चलाए, जूते-चप्पल, अंडे और कीचड़ फेंके तथा उन्हें जूतों की माला पहना दी।
यह घटना दर्शाती है कि दो साल बीत जाने के बाद भी इस दुखद कांड को लेकर जनता के मन में कितना गहरा असंतोष और गुस्सा भरा हुआ है। पूर्व विधायक के साथ-साथ उनके करीबी सहयोगी और पानिहाटी के पूर्व पार्षद संजीव मुखर्जी को भी कोर्ट परिसर के आसपास लोगों के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा।

RG Kar Case: थाने के बाहर पूर्व विधायक पर बेकाबू भीड़ का हमला

शुक्रवार दोपहर को जब बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट की टीम पूर्व विधायक निर्मल घोष को खरदाह थाने से बैरकपुर सब-डिवीजनल कोर्ट ले जाने के लिए निकली, तब वहां मौजूद पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भीड़ को संभालने में असमर्थ साबित हुए। सुरक्षा के दृष्टिकोण से निर्मल घोष को हेलमेट पहनाया गया था, लेकिन इसके बावजूद गुस्साए लोगों ने उन्हें निशाना बनाया। लोगों ने “चोर-चोर” के नारे लगाए और उनके कपड़ों पर कीचड़ व अंडे फेंके।
पुलिस को स्थिति पर काबू पाने और आरोपियों को सुरक्षित गाड़ी तक पहुंचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी तथा अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। इस मामले में पानिहाटी नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ दे भी नामजद आरोपी हैं, जो फिलहाल फरार चल रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

पीड़ित परिवार की नई शिकायत पर हुई पुलिसिया कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई पीड़िता के पिता द्वारा खरदाह थाने में दर्ज कराई गई एक नई और औपचारिक शिकायत के आधार पर हुई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन विधायक निर्मल घोष ने अपने राजनीतिक पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए परिवार पर भारी दबाव बनाया था। परिजनों की मंशा के विपरीत शव का तुरंत श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार करवा दिया गया, ताकि मामले को दबाया जा सके।
परिवार का स्पष्ट कहना है कि यदि शव का इतनी हड़बड़ी में दाह-संस्कार न किया गया होता, तो डॉक्टरों की दूसरी टीम से दोबारा पोस्टमार्टम (Second Autopsy) कराया जा सकता था। इससे बलात्कार और हत्या से जुड़े कई अत्यंत महत्वपूर्ण फोरेंसिक साक्ष्य हासिल हो सकते थे, जिन्हें जानबूझकर नष्ट कर दिया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने साक्ष्य मिटाने, आपराधिक साजिश रचने और जबरन दबाव बनाने की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

आरजी कर कांड की पृष्ठभूमि और कानूनी घटनाक्रम

यह मामला 9 अगस्त 2024 का है, जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल से 31 वर्षीय महिला ट्रेनी डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। जांच के बाद यह बात सामने आई कि डॉक्टर के साथ क्रूरतापूर्वक बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच कोलकाता पुलिस ने की और अगले ही दिन सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया। बाद में मामला सीबीआई (CBI) को सौंप दिया गया था।
जनवरी 2025 में सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, पीड़िता का परिवार शुरू से ही इस जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। परिजनों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का कृत्य नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश थी और कई प्रभावशाली लोगों ने साक्ष्यों को छुपाने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

मामले की नए सिरे से जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी

घटना के दो साल पूरे होने पर 9 अगस्त 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को अंतिम संस्कार से जुड़ी अनियमितताओं और परिजनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। पीड़िता की मां, जो वर्तमान में पानिहाटी से भाजपा विधायक हैं, उन्होंने भी इस पहलू की गहन जांच की मांग उठाई थी।
निर्देश मिलते ही पुलिस एक्शन मोड में आई और मोबाइल सर्विलांस की मदद से पूर्व विधायक निर्मल घोष को ओडिशा के बालासोर स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, सह-आरोपी संजीव मुखर्जी को कोलकाता के चिनार पार्क इलाके से हिरासत में लिया गया।

RG Kar Case: राजनीतिक सरगर्मी और आगे की कानूनी प्रक्रिया

इस गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि जांच एजेंसियों को यह भी खंगालना चाहिए कि अंतिम संस्कार को जल्दबाजी में अंजाम देने के निर्देश किस स्तर से जारी हुए थे। पुलिस अब दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए कोर्ट से रिमांड की मांग कर रही है।
यह मामला पूरे देश में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और आपराधिक न्याय प्रणाली में साक्ष्यों के रख-रखाव को लेकर एक बड़ी नज़ीर बन चुका है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक इस अपराध में शामिल अंतिम व्यक्ति तक कानून के हाथ नहीं पहुंचते, तब तक उनकी न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।

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लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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