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पोस्टल बैलेट क्या है: 85 साल से ऊपर के मतदाता, दिव्यांग, सेवा मतदाता और जरूरी सेवाओं वाले कैसे देते हैं वोट

हर मतदाता को बूथ तक जाना जरूरी नहीं। जानिए पोस्टल बैलेट की सुविधा किसे मिलती है और प्रक्रिया क्या है।

मतपत्र और लिफाफे का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • चुनाव में ज्यादातर लोग मतदान केंद्र पर जाकर EVM से वोट डालते हैं।
  • चुनाव आयोग के अनुसार जरूरी सेवाओं में फायर सर्विस, स्वास्थ्य, बिजली, ट्रैफिक, एंबुलेंस सेवा, विमानन और लंबी दूरी की सरकारी सड़क परिवहन सेवाएं जैसे विभाग शामिल हैं।
  • सशस्त्र बलों और कुछ दूसरे वर्गों के सेवा मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जाने वाले पोस्टल बैलेट सिस्टम यानी ETPBS के जरिए मतपत्र भेजा जाता है।
  • पोस्टल बैलेट का मकसद यह है कि कोई भी योग्य मतदाता सिर्फ इस वजह से वोट देने से वंचित न रहे कि वह बूथ तक नहीं पहुंच सकता।

चुनाव में ज्यादातर लोग मतदान केंद्र पर जाकर EVM से वोट डालते हैं। लेकिन कुछ मतदाता ऐसे होते हैं जो उम्र, दिव्यांगता या ड्यूटी की वजह से बूथ तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे मतदाताओं के लिए पोस्टल बैलेट यानी डाक मतपत्र की सुविधा है। इस लेख में समझिए पोस्टल बैलेट क्या है, किसे मिलता है और इसकी प्रक्रिया क्या है।

पोस्टल बैलेट क्या है

पोस्टल बैलेट एक कागजी मतपत्र है, जिस पर मतदाता अपना वोट दर्ज करता है और फिर उसे तय प्रक्रिया से रिटर्निंग ऑफिसर तक पहुंचाया जाता है। इसमें मतदाता को मतदान केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होती। मतगणना के दिन सबसे पहले आम तौर पर पोस्टल बैलेट की गिनती होती है।

मुख्य बातें: मतपत्र और लिफाफे का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

अनुपस्थित मतदाता कौन हैं

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 60(c) के तहत चुनाव आयोग कुछ वर्गों को अनुपस्थित मतदाता यानी absentee voter के रूप में अधिसूचित करता है। ये मतदाता पोस्टल बैलेट से वोट दे सकते हैं। PIB पर जारी चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार इनमें ये शामिल हैं:

  • 85 साल से ज्यादा उम्र के मतदाता
  • मतदाता सूची में चिन्हित दिव्यांग मतदाता, जिनके पास कम से कम 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता का प्रमाण पत्र हो
  • मतदान के दिन जरूरी सेवाओं में ड्यूटी पर तैनात मतदाता
  • मतदान के दिन कवरेज के लिए चुनाव आयोग से अधिकृत मीडिया कर्मी

जरूरी सेवाएं कौन सी हैं

चुनाव आयोग के अनुसार जरूरी सेवाओं में फायर सर्विस, स्वास्थ्य, बिजली, ट्रैफिक, एंबुलेंस सेवा, विमानन और लंबी दूरी की सरकारी सड़क परिवहन सेवाएं जैसे विभाग शामिल हैं। ऐसे कर्मचारी अपने विभाग के नामित नोडल अधिकारी के जरिए पोस्टल बैलेट के लिए आवेदन करते हैं। सेवाओं की सूची आयोग सरकार से सलाह कर अधिसूचित करता है।

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फॉर्म 12D और समय सीमा

85 साल से ऊपर के मतदाता और दिव्यांग मतदाता फॉर्म 12D भरकर पोस्टल बैलेट की सुविधा ले सकते हैं। यह फॉर्म बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO के जरिए रिटर्निंग ऑफिसर को चुनाव की अधिसूचना जारी होने के 5 दिन के भीतर जमा करना होता है। दिव्यांग मतदाता को फॉर्म के साथ बेंचमार्क दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाना होता है। जरूरी सेवाओं वाले कर्मचारियों के फॉर्म के दूसरे हिस्से में उनके संगठन के नोडल अधिकारी का प्रमाण पत्र जरूरी होता है।

घर से मतदान

चुनाव आयोग के अनुसार 85 साल से ऊपर और दिव्यांग मतदाताओं के घर मतदान टीम जाती है और उनका वोट लेती है। इसके लिए रिटर्निंग ऑफिसर समय सारणी बनाते हैं और उसे उम्मीदवारों के साथ साझा किया जाता है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे। इस दौरान वोट की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

सेवा मतदाता और ETPBS

सशस्त्र बलों और कुछ दूसरे वर्गों के सेवा मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जाने वाले पोस्टल बैलेट सिस्टम यानी ETPBS के जरिए मतपत्र भेजा जाता है। PIB के अनुसार उम्मीदवारों की सूची तय होते ही रिटर्निंग ऑफिसर यह बैलेट भेज देते हैं। सेवा मतदाताओं को डाक का खर्च नहीं उठाना पड़ता।

चुनाव ड्यूटी वाले कर्मचारी

जो कर्मचारी चुनाव ड्यूटी पर होते हैं, वे सुविधा केंद्र पर पोस्टल बैलेट से वोट डालते हैं। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि सुविधा केंद्र पर भी वोट पूरी तरह गोपनीय रहे।

बैलेट कब तक पहुंचना चाहिए

पोस्टल बैलेट तय समय तक रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंचना जरूरी है। चुनाव आयोग की 2026 विधानसभा चुनावों की जानकारी के अनुसार पोस्टल बैलेट को मतगणना के दिन सुबह 8 बजे तक संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंचना था। देर से पहुंचे बैलेट की गिनती नहीं होती।

यह सुविधा क्यों अहम है

पोस्टल बैलेट का मकसद यह है कि कोई भी योग्य मतदाता सिर्फ इस वजह से वोट देने से वंचित न रहे कि वह बूथ तक नहीं पहुंच सकता। बुजुर्गों, दिव्यांगों, जवानों और जरूरी सेवाओं में लगे लोगों के लिए यह सुविधा लोकतंत्र में उनकी भागीदारी पक्की करती है।

मतगणना में पोस्टल बैलेट

मतगणना के दिन पोस्टल बैलेट की गिनती अलग टेबल पर रिटर्निंग ऑफिसर की देखरेख में होती है। हर बैलेट के साथ मतदाता का घोषणा पत्र भी होता है, जिसकी जांच की जाती है। घोषणा पत्र में गड़बड़ी होने या तय नियम पूरे न होने पर बैलेट खारिज भी हो सकता है। इसलिए पोस्टल बैलेट से वोट देने वाले मतदाताओं को सभी निर्देश ध्यान से पढ़ने चाहिए।

उम्मीदवारों की भूमिका

चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर और जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को पोस्टल बैलेट के नियमों की जानकारी दें। घर से मतदान की समय सारणी उम्मीदवारों के साथ साझा की जाती है, ताकि वे चाहें तो अपने प्रतिनिधि भेज सकें।

पोस्टल बैलेट के लिए कौन सा फॉर्म भरना होता है

फॉर्म 12D।

कितनी उम्र के मतदाता घर से वोट दे सकते हैं

85 साल से ज्यादा उम्र के मतदाता।

फॉर्म 12D कब तक जमा करना होता है

चुनाव की अधिसूचना जारी होने के 5 दिन के भीतर।

सेवा मतदाताओं को बैलेट कैसे मिलता है

ETPBS के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से।

स्रोत: PIB: ECI announces assembly elections schedule, March 2026, PIB: ECI Bihar election schedule, October 2025, CEO Delhi: Postal Ballot training material (PDF)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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