ताज़ा खबर
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है: 5 स्थायी सदस्य, वीटो पावर और भारत अब तक कितनी बार रहा सदस्य सोना चांदी का भाव 3 नवंबर 2026 (सुबह): 24 कैरेट सोना ₹1,38,118, चांदी ₹1,77,300 प्रति किलो सुपर ओवर के नियम: मैच टाई होने पर कैसे तय होता है विजेता, कौन बल्लेबाजी करता है पहले, सुपर ओवर भी टाई हो तो क्या BREAKING: दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार पहुंचा यूपी भूलेख खतौनी ऑनलाइन कैसे देखें: खाता संख्या, खसरा या नाम से खोजें, नकल और भू-नक्शा की जानकारी National School of Drama: History, Famous Alumni, Bharat Rang Mahotsav and How Admission Works घर की सीलन कैसे दूर करें: दीवारों पर नमी और फफूंद के कारण, आसान उपाय और कब बुलाएं मिस्त्री BREAKING: ओमान तट पर भारतीय जहाज पर हमला और सोमालिया में नौसेना का सफल बचाव अभियान
ट्रेंडिंग
खेल

पोलो खेल के नियम और इतिहास: फारस के चौगान से मणिपुर तक, घोड़े पर खेला जाने वाला खेल और चक्कर का मतलब

राजाओं का खेल कहे जाने वाले पोलो का आधुनिक रूप भारत में विकसित हुआ। जानिए इसकी पूरी कहानी।

घास के मैदान पर घोड़ों पर पोलो खेलते खिलाड़ियों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • पोलो को अक्सर राजाओं का खेल कहा जाता है। घोड़े पर सवार खिलाड़ी लकड़ी की स्टिक से गेंद को विरोधी टीम के गोल में पहुंचाते हैं।
  • पोलो में खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के आधार पर हैंडीकैप दिया जाता है।
  • आधुनिक पोलो के विकास में मणिपुर की बड़ी भूमिका है। मणिपुर में पोलो का पारंपरिक रूप सगोल कांगजेई सदियों से खेला जाता रहा है।
  • पोलो तेज रफ्तार और घोड़ों के कारण जोखिम भरा खेल है। खिलाड़ी हेलमेट, घुटनों के पैड और दूसरे सुरक्षा उपकरण पहनते हैं।

पोलो को अक्सर राजाओं का खेल कहा जाता है। घोड़े पर सवार खिलाड़ी लकड़ी की स्टिक से गेंद को विरोधी टीम के गोल में पहुंचाते हैं। यह दुनिया के सबसे पुराने टीम खेलों में गिना जाता है और दिलचस्प बात यह है कि इसका आधुनिक रूप भारत में विकसित हुआ। इस लेख में जानिए पोलो के नियम और इतिहास।

पोलो क्या है

पोलो घोड़े पर खेला जाने वाला स्टिक और गेंद का खेल है। विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार खिलाड़ी लकड़ी की स्टिक यानी मैलेट से गेंद को विरोधी टीम के गोल पोस्ट के बीच से निकालकर गोल करते हैं। इस दौरान घोड़े लगभग 35 मील प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ सकते हैं, इसलिए घुड़सवारी में महारत जरूरी है। जो टीम ज्यादा गोल करती है, वह जीतती है।

मुख्य बातें: घास के मैदान पर घोड़ों पर पोलो खेलते खिलाड़ियों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

मैदान और टीम

  • आउटडोर यानी फील्ड पोलो का मैदान 300 गुणा 160 गज का घास का मैदान होता है।
  • इंडोर यानी एरिना पोलो छोटे मैदान पर खेला जाता है।
  • हर टीम में चार खिलाड़ी होते हैं।
  • एक मैच लगभग डेढ़ से दो घंटे चलता है।

चक्कर क्या है

पोलो का मैच कई हिस्सों में बंटा होता है, जिन्हें चक्कर या चकर कहा जाता है। विकिपीडिया के अनुसार एक मैच में सात मिनट के चार से आठ चक्कर होते हैं। चक्करों के बीच या दौरान खिलाड़ी अपने घोड़े बदलते हैं, ताकि घोड़े थकें नहीं। इसलिए एक खिलाड़ी को एक मैच के लिए कई घोड़ों की जरूरत पड़ सकती है।

यह भी पढ़ें: Asian Games 2026: अमन सहरावत ने रचा इतिहास, 57 किलो कुश्ती में जीता गोल्ड; वर्ल्ड चैंपियन को 11-7 से हराया | Asian Games 2026: भारतीय महिला हॉकी टीम ने रचा इतिहास, 44 साल बाद चीन को हराकर जीता गोल्ड

हैंडीकैप प्रणाली

पोलो में खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के आधार पर हैंडीकैप दिया जाता है। सबसे ऊंचा हैंडीकैप 10 गोल माना जाता है। विकिपीडिया के अनुसार अर्जेंटीना में 10 हैंडीकैप वाले खिलाड़ी सबसे ज्यादा हैं। टीम के खिलाड़ियों के हैंडीकैप जोड़कर टीम का स्तर तय किया जाता है।

फारस का चौगान

विकिपीडिया के अनुसार पोलो और उससे मिलते जुलते खेलों का पूर्वज चौगान नाम का घुड़सवारी खेल था, जो ईसा पूर्व छठी सदी से ईसवी पहली सदी तक फारस यानी आज के ईरान और मध्य एशिया में खेला जाता था। ईरान के इस्फहान का नक्श ए जहां चौक 17वीं सदी में शाह अब्बास प्रथम ने पोलो मैदान के रूप में बनवाया था। यह खेल रेशम मार्ग से चीन तक भी पहुंचा।

भारत में पोलो

भारत के इतिहास में भी पोलो का जिक्र मिलता है। विकिपीडिया के अनुसार दिल्ली सल्तनत के मामलुक वंश के संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण हुई थी।

मणिपुर से दुनिया तक

आधुनिक पोलो के विकास में मणिपुर की बड़ी भूमिका है। मणिपुर में पोलो का पारंपरिक रूप सगोल कांगजेई सदियों से खेला जाता रहा है। विकिपीडिया के अनुसार अंग्रेजी शब्द पोलो बाल्टी भाषा के गेंद के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द से निकला है। 1859 में असम के सिलचर में अंग्रेज चाय बागान मालिकों ने यूरोपीय पोलो क्लब बनाया, जिन्होंने यह खेल मणिपुरी लोगों से सीखा था। 1862 में कलकत्ता पोलो क्लब की स्थापना हुई, जिसे आज भी मौजूद सबसे पुराना पोलो क्लब माना जाता है। यहीं से यह खेल ब्रिटेन और फिर पूरी दुनिया में फैला।

ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर

पोलो 1900 से 1936 तक ओलंपिक खेलों का हिस्सा रहा। विकिपीडिया के अनुसार आज अंतरराष्ट्रीय पोलो महासंघ के 100 से ज्यादा सदस्य देश हैं और 16 देशों में यह पेशेवर रूप से खेला जाता है। अर्जेंटीना को इस खेल की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

भारत में आज

कलकत्ता पोलो क्लब एज्रा कप की मेजबानी करता है, जिसे सबसे पुराना पोलो टूर्नामेंट माना जाता है। 2016 में जयपुर में वर्ल्ड चैंपियंस पोलो लीग शुरू हुई, जिसमें मैदान छोटा और मैच छोटे रखे गए, कुछ वैसे ही जैसे क्रिकेट में टी20।

सुरक्षा

पोलो तेज रफ्तार और घोड़ों के कारण जोखिम भरा खेल है। खिलाड़ी हेलमेट, घुटनों के पैड और दूसरे सुरक्षा उपकरण पहनते हैं। घोड़ों की देखभाल और उनकी सेहत भी खेल का अहम हिस्सा है। नियम इस तरह बनाए गए हैं कि खिलाड़ी और घोड़े, दोनों सुरक्षित रहें।

पोलो की स्टिक और गेंद

पोलो की स्टिक को मैलेट कहा जाता है। इसका हत्था लंबा होता है और सिरे पर लकड़ी का सिर लगा होता है, जिससे गेंद को मारा जाता है। मैदान पर घोड़े की रफ्तार के साथ सही समय पर गेंद पर प्रहार करना ही इस खेल की सबसे बड़ी कला है।

महिलाओं का पोलो

विकिपीडिया के अनुसार चीन में तांग राजवंश के समय राजधानी चांगआन में पोलो खूब लोकप्रिय था और महिलाएं भी इसे खेलती थीं। आज भी दुनिया के कई देशों में महिला पोलो टूर्नामेंट होते हैं।

पोलो की एक टीम में कितने खिलाड़ी होते हैं

चार खिलाड़ी।

पोलो का एक चक्कर कितने मिनट का होता है

सात मिनट।

दुनिया का सबसे पुराना मौजूदा पोलो क्लब कौन सा है

कलकत्ता पोलो क्लब, जिसकी स्थापना 1862 में हुई।

पोलो ओलंपिक में कब तक रहा

1900 से 1936 तक।

स्रोत: Wikipedia: Polo, Wikipedia: Calcutta Polo Club, Wikipedia: Sagol Kangjei

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X