PM Vishwakarma Yojana: देश के पारंपरिक शिल्पकारों और दस्तकारों के सदियों पुराने कौशल को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना’ कारीगर वर्ग के आर्थिक उत्थान का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अपने हाथों और औजारों से आजीविका कमाने वाले बढ़ई (सुथार), लोहार, कुम्हार, दर्जी, चर्मकार, मूर्तिकार, सुनार, नाई और राजमिस्त्री समेत 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लाखों कामगार इस महत्वाकांक्षी योजना का सीधा लाभ उठा रहे हैं। योजना का मूल दर्शन यह सुनिश्चित करना है कि देश के जमीनी हुनरमंदों को न केवल आधुनिक प्रशिक्षण मिले, बल्कि वे बिना किसी गारंटी के आसान ऋण प्राप्त कर अपने छोटे कारोबार को एक संगठित उद्यम के रूप में विकसित कर सकें।
PM Vishwakarma Yojana: 15,000 रुपये का टूलकिट इंसेंटिव और निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पंजीकृत पात्र कारीगरों के काम को सुगम और आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 15,000 रुपये का विशेष टूलकिट इंसेंटिव दिया जाता है। यह वित्तीय सहायता सीधे नकद न देकर डिजिटल ई-वाउचर अथवा ई-रूपी (e-RUPI) के माध्यम से प्रदान की जाती है, ताकि लाभार्थी अपने व्यवसाय से जुड़े उन्नत और प्रमाणित गुणवत्ता वाले आधुनिक उपकरण ही खरीदें। इससे न केवल उनके उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि शारीरिक श्रम और समय की भी भारी बचत होती है।
योजना के तहत सभी चयनित कारीगरों को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के सहयोग से दो चरणों में निःशुल्क व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। पहले चरण में 5 से 7 दिनों (करीब 40 घंटे) का बेसिक कौशल प्रशिक्षण आयोजित होता है, जबकि जो कारीगर अपने काम को और निखारना चाहते हैं, उनके लिए 15 दिन या उससे अधिक (120 घंटे) की एडवांस ट्रेनिंग की व्यवस्था है। प्रशिक्षण की अवधि के दौरान कारीगरों की दैनिक आजीविका प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक लाभार्थी को 500 रुपये प्रतिदिन की दर से वजीफा (स्टाइपेंड) भी दिया जाता है। पाठ्यक्रम पूरा करने पर सभी को औपचारिक ‘पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र’ और ‘विश्वकर्मा डिजिटल पहचान पत्र’ जारी किया जाता है, जिससे उनकी पेशेवर साख स्थापित होती है।

बिना किसी गारंटी के 3 लाख रुपये तक का रियायती उद्यम विकास ऋण
पारंपरिक कारीगरों के समक्ष सबसे बड़ी बाधा पूंजी का अभाव और साहूकारों का भारी ब्याज चक्र रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में योजना के तहत कुल 3 लाख रुपये तक का संपार्श्विक-मुक्त (Collateral-free) उद्यम विकास ऋण दो चरणों में उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए कारीगर को बैंक के समक्ष अपनी जमीन, मकान या किसी भी प्रकार की संपत्ति गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती। इस पूरी वित्तीय व्यवस्था में भारत सरकार का क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट सूक्ष्म और लघु उद्यमों (CGTMSE) के माध्यम से बैंकों को शत-प्रतिशत गारंटी सुरक्षा प्रदान करता है।
ऋण के पहले चरण में सफल प्रशिक्षण प्राप्त कारीगर को 1 लाख रुपये तक का कार्यशील पूंजी ऋण दिया जाता है, जिसे चुकाने के लिए 18 महीने की आसान समय-सीमा तय की गई है। पहली किश्त का नियमित और समय पर पुनर्भुगतान करने के बाद लाभार्थी दूसरे चरण में 2 लाख रुपये के अतिरिक्त ऋण के लिए पात्र हो जाता है, जिसे 30 महीने की अवधि में लौटाया जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि इस ऋण पर लाभार्थी से केवल 5 प्रतिशत की बेहद रियायती ब्याज दर ली जाती है, जबकि बैंकों की प्रचलित ब्याज दरों के अंतर की शेष 8 प्रतिशत तक की राशि केंद्र सरकार द्वारा सीधे ‘ब्याज सबवेंशन’ (Interest Subvention) के रूप में वहन की जाती है। इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक डिजिटल बिक्री पर प्रतिमाह 100 रुपये तक का अतिरिक्त कैशबैक प्रोत्साहन भी कारीगरों के खातों में जमा किया जाता है।
पात्रता के मुख्य नियम और डिजिटल आवेदन की आसान प्रक्रिया
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का भारत का नागरिक होना और उसकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य है। साथ ही, आवेदक परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा स्वरोजगार या व्यवसाय विकास के लिए केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य ऋण योजना (जैसे पीएम स्वनिधि या पीएमईजीपी) से पूर्व में सक्रिय ऋण न लिया गया हो। एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना के तहत पंजीकरण कराने का पात्र माना जाता है। योजना में शामिल 18 श्रेणियों में लकड़ी का काम करने वाले, नाव निर्माता, अस्त्र निर्माता, ताला बनाने वाले, हथौड़ा व टूलकिट निर्माता, लोहार, कुम्हार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी-चटाई-झाड़ू बुनकर, गुड़िया व खिलौना निर्माता, नाई, मालाकार, धोबी, दर्जी और मछली का जाल बनाने वाले दस्तकार शामिल हैं।
आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल रखा गया है। कारीगर अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और सक्रिय मोबाइल नंबर के जरिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कराकर ‘pmvishwakarma.gov.in’ पोर्टल पर निःशुल्क पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन के बाद सत्यापन की एक त्रिस्तरीय पारदर्शी व्यवस्था निर्धारित है, जिसमें पहले ग्राम पंचायत स्तर पर प्रधान या शहरी स्थानीय निकाय के अध्यक्ष द्वारा सत्यापन किया जाता है, जिसके बाद जिला कार्यान्वयन समिति और फिर राज्य स्क्रीनिंग कमेटी अंतिम अनुमोदन प्रदान करती है। अनुमोदन होते ही कारीगरों को प्रशिक्षण और टूलकिट वाउचर जारी कर दिए जाते हैं।
PM Vishwakarma Yojana: पारंपरिक शिल्पकला से विकसित भारत की आत्मनिर्भर संकल्पना
पीएम विश्वकर्मा योजना केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की लुप्त होती पारंपरिक कलाओं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जमीनी हुनरमंदों को राष्ट्रीय व वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chains) से जोड़ने का एक दूरगामी प्रयास है। कारीगरों द्वारा बनाए गए प्रामाणिक हस्तशिल्प और उत्पादों को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसे विशाल ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर सूचीबद्ध करने में भी सहयोग दिया जा रहा है। समय रहते आधुनिक औजार, औपचारिक पहचान और सस्ता ऋण पाकर हमारे पारंपरिक विश्वकर्मा न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि देश के सकल घरेलू उत्पाद और रोजगार सृजन में अपनी अमूल्य भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।
स्रोत: पीएम विश्वकर्मा आधिकारिक पोर्टल। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।
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