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October 2026 Ekadashi: अक्टूबर में इंदिरा और पापांकुशा एकादशी कब? जानें तिथि, पारण समय और महत्व

October 2026 Ekadashi: अक्टूबर में इंदिरा और पापांकुशा एकादशी कब? जानें तिथि, पारण समय और महत्व

सारांश

  • October 2026 Ekadashi: इंदिरा एकादशी: 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को व्रत रखा जाएगा। Drik Panchang
  • इंदिरा एकादशी तिथि: 6 अक्टूबर सुबह 2:07 बजे से 7 अक्टूबर रात 12:34 बजे तक।
  • इंदिरा एकादशी पारण: 7 अक्टूबर सुबह 6:17 बजे से शुरू होगा। Drik Panchang
  • पापांकुशा एकादशी: 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को व्रत रखा जाएगा। Drik Panchang
  • पापांकुशा तिथि: 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे से 22 अक्टूबर दोपहर 2:47 बजे तक।
  • पापांकुशा पारण: 23 अक्टूबर सुबह 6:27 बजे से शुरू होगा। Drik Panchang
  • इंदिरा एकादशी का धार्मिक संबंध पितरों की सद्गति और उनके निमित्त किए जाने वाले व्रत से जोड़ा जाता है।
  • पापांकुशा एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना और आत्मसंयम से जोड़ा जाता है।
  • एकादशी के व्रत और पारण का समय स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकता है। hindulab.com
  • व्रत रखने वाले अपनी परंपरा और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपवास की विधि अपनाएं।

October 2026 Ekadashi: सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ और भगवान विष्णु का सर्वाधिक प्रिय दिवस माना गया है। चंद्र मास के प्रत्येक पक्ष (कृष्ण और शुक्ल) में पड़ने वाली यह एकादशी तिथि साधक के अंतःकरण को शुद्ध करने, आत्मनियंत्रण विकसित करने और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने का माध्यम है। अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष 2026 का अक्टूबर माह धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पावन रहने वाला है, क्योंकि इस माह दो अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशियों का संयोग बन रहा है। माह की पहली एकादशी पितृ पक्ष की अवधि में 6 अक्टूबर को ‘इंदिरा एकादशी’ के रूप में मनाई जाएगी, जबकि दूसरी एकादशी शारदीय नवरात्र के उपरांत 22 अक्टूबर को ‘पापांकुशा एकादशी’ के रूप में रखी जाएगी।

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इन दोनों एकादशियों का आध्यात्मिक मर्म और उद्देश्य भिन्न-भिन्न है। जहां इंदिरा एकादशी का प्रत्यक्ष संबंध पूर्वजों (पितरों) के मोक्ष और उनकी सद्गति से जुड़ा हुआ है, वहीं पापांकुशा एकादशी जीवन के संचित पापों के निवारण और इंद्रिय निग्रह के लिए विख्यात है।

इंदिरा एकादशी 2026: 6 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग में रखा जाएगा व्रत

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को ‘इंदिरा एकादशी’ कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत मंगलवार, 6 अक्टूबर को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का आरंभ 6 अक्टूबर को देर रात 02:07 बजे से होगा और इसका समापन 7 अक्टूबर को मध्यरात्रि 12:34 बजे होगा। सूर्योदयकालीन उदया तिथि की शास्त्रीय मान्यता के आधार पर गृहस्थ और वैष्णव दोनों ही 6 अक्टूबर को यह उपवास रखेंगे।

इस वर्ष की इंदिरा एकादशी पर एक अत्यंत शुभ खगोलीय संयोग भी निर्मित हो रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 6 अक्टूबर को प्रातः 06:25 बजे से लेकर रात्रि 10:17 बजे तक ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ प्रभावी रहेगा। शास्त्रों में सर्वार्थ सिद्धि योग को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, मंत्र साधना, जप और पितृ कर्मों के संपादन हेतु अक्षय फलदायी माना गया है।

इंदिरा एकादशी का पारण समय और पितृ पक्ष में इसका महत्व

एकादशी व्रत की पूर्णता और उसका वास्तविक पुण्य फल द्वादशी तिथि के भीतर किए जाने वाले विधिवत पारण पर निर्भर करता है। इंदिरा एकादशी का पारण बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार पारण का सबसे प्रशस्त समय प्रातःकाल 06:17 बजे से लेकर 08:38 बजे तक रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे इस शुभ समयावधि के भीतर स्नान, श्रीहरि पूजन और किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान-दक्षिणा देने के उपरांत ही सात्विक अन्न ग्रहण कर अपना व्रत खोलें।

धार्मिक मान्यताओं में इंदिरा एकादशी का महत्व इसलिए कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि यह 16 दिवसीय पितृ पक्ष (26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026) के ठीक मध्य में पड़ती है। पद्म पुराण और गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि यदि किसी जातक के पूर्वज किसी भूलवश या अधोयोनि में कष्ट भोग रहे हों, तो उनके नाम से इंदिरा एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन करने से उन्हें सीधे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इस दिन किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा अनंत गुना अधिक आंका गया है।

पापांकुशा एकादशी 2026: 22 अक्टूबर को होगा पापों पर अंकुश लगाने वाला व्रत

अक्टूबर 2026 की दूसरी प्रमुख एकादशी ‘पापांकुशा एकादशी’ है, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। यह पावन व्रत गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का प्रारंभ 21 अक्टूबर को दोपहर 02:11 बजे से होगा, जबकि इस तिथि की समाप्ति 22 अक्टूबर को दोपहर 02:47 बजे होगी। उदया तिथि 22 अक्टूबर को होने के कारण इसी दिन व्रत का संकल्प लिया जाएगा।

पापांकुशा एकादशी का पारण अगले दिन यानी शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को संपन्न होगा। इस दिन पारण का शुभ समय प्रातः 06:27 बजे से लेकर 08:42 बजे तक निर्धारित किया गया है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार विभिन्न शहरों में समय में कुछ मिनटों का मामूली अंतर हो सकता है, इसलिए साधकों को स्थानीय पंचांग का अवलोकन करने का परामर्श दिया जाता है।

पापांकुशा एकादशी का आध्यात्मिक मर्म: इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश

संस्कृत में ‘अंकुश’ का अर्थ नियंत्रण या लगाम होता है। जिस प्रकार एक महावत अंकुश के माध्यम से विशालकाय हाथी को नियंत्रित रखता है, ठीक उसी प्रकार यह एकादशी मनुष्य के चंचल मन और उसकी वासनाओं पर अंकुश लगाने का कार्य करती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जो साधक आश्विन शुक्ल एकादशी का नियमपूर्वक उपवास रखकर भगवान विष्णु के ‘पद्मनाभ’ स्वरूप की आराधना करते हैं, उनके जाने-अनजाने में हुए कायिक, वाचिक और मानसिक पापों का क्षय हो जाता है।

यह एकादशी शारदीय नवरात्र और विजयादशमी के ठीक बाद आती है, अतः इसे देवी शक्ति की उपासना के उपरांत वैष्णव मर्यादा और आत्मसंयम को अपने जीवन में उतारने का अवसर माना जाता है। इस दिन सोने, तिल, अन्न, जल और खड़ाऊं का दान करना विशेष रूप से श्रेयस्कर माना गया है।

October 2026 Ekadashi: एकादशी पूजन की प्रामाणिक विधि और आवश्यक नियम

दोनों ही एकादशियों पर पूजन की शास्त्रीय परंपरा अत्यंत सात्विक और पवित्र है। व्रती को दशमी की रात्रि से ही सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए और एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए। पीले वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और देवी महालक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

गंगाजल से प्रतिमा को स्नान कराएं और पीला चंदन, अक्षत, पीले गेंदे के पुष्प, धूप व शुद्ध देसी घी का दीपक अर्पित करें। भगवान विष्णु के नैवेद्य में तुलसी दल अनिवार्य रूप से शामिल होना चाहिए, किंतु एकादशी के दिन तुलसी के पौधे से पत्ते तोड़ने की सख्त मनाही होती है, अतः पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पूर्व (दशमी) ही तोड़कर रख लें। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” महामंत्र अथवा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना और द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में पारण करना व्रत के अनिवार्य अंग हैं।

October 2026 Ekadashi: आध्यात्मिक साधना और पितृ ऋण मुक्ति का पावन अवसर

अक्टूबर 2026 की यह दोनों एकादशियां केवल उपवास का दिन नहीं हैं, बल्कि यह हमारे सनातन संस्कारों, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और आत्म-सुधार का मार्ग प्रशस्त करती हैं। जहां एक ओर 6 अक्टूबर की इंदिरा एकादशी हमें अपने दिवंगत पितरों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने और उनके तर्पण का अवसर देती है, वहीं 22 अक्टूबर की पापांकुशा एकादशी हमें भविष्य में धर्म के मार्ग पर निष्ठापूर्वक चलने का संकल्प दिलाती है।

स्वास्थ्य सीमाओं को ध्यान में रखते हुए वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं और अस्वस्थ व्यक्ति कठोर निर्जला उपवास के बजाय फलाहार अथवा केवल मानसिक साधना व पूजा-पाठ के जरिए भी श्रीहरि की पूर्ण कृपा प्राप्त कर सकते हैं। भक्ति में शुद्ध भाव, करुणा और सत्य आचरण ही सर्वोच्च साधन है।

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लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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