प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार बड़े राज्यों में हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों के परिणामों को लेकर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की कुल 28 सीटों पर हुए इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि ये चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए गए थे, फिर भी कांग्रेस को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली।
बैलेट पेपर और कांग्रेस का प्रदर्शन
देश के चार प्रमुख राज्यों में एमएलसी की 28 सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई थी। इन चुनावों की खास बात यह थी कि इनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बजाय बैलेट पेपर यानी मतपत्रों का उपयोग किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कांग्रेस की चुनावी रणनीति और उसकी जमीनी पकड़ पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने जनता से यह अनुमान लगाने को कहा कि इन 28 सीटों में से कांग्रेस ने कितनी सीटें जीती होंगी। परिणामों के अनुसार, कांग्रेस इन सभी सीटों पर शून्य पर सिमट गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बैलेट पेपर से हुए चुनावों में ऐसी हार विपक्ष के उन दावों के लिए एक बड़ी चुनौती है जो अक्सर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल
एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणामों के बाद भाजपा के भीतर आंतरिक कलह बढ़ गई है। अखिलेश यादव के अनुसार, भाजपा के दिल्ली और लखनऊ नेतृत्व के बीच भारी तनातनी की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि लखनऊ के नेता अब दिल्ली से आने वाले फोन कॉल्स का जवाब भी नहीं दे रहे हैं। अखिलेश ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए भाजपा को अपनी आपसी कटुता दूर करने की सलाह दी है। उनके अनुसार, भाजपा की वर्तमान स्थिति हार से उपजी हताशा को दर्शाती है।
गठबंधन के भीतर आरोप:प्रत्यारोप
महाराष्ट्र में भी चुनाव परिणामों का असर गठबंधन की राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। महायुति गठबंधन के भीतर भाजपा और शिव सेना के बीच आपसी खींचतान शुरू हो गई है। भाजपा ने शिव सेना पर लालची होने का आरोप लगाया है, जबकि शिव सेना ने इस हार के लिए भाजपा द्वारा किए गए सीटों के अनुचित वितरण को जिम्मेदार ठहराया है। दोनों दलों के बीच शुरू हुआ यह आरोप:प्रत्यारोप का दौर गठबंधन की भविष्य की स्थिरता पर सवाल खड़े कर रहा है। इन चुनावी नतीजों ने न केवल कांग्रेस की स्थिति को कमजोर किया है, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों को भी सतह पर ला दिया है।
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