लकड़ी के चिकने खंभे पर चढ़कर हवा में तरह तरह के आसन करना, या लटकती रस्सी पर संतुलन बनाते हुए शरीर को मोड़ना, यह देखने में जितना रोमांचक है, करने में उतना ही कठिन। इसी खेल को मल्लखंब कहते हैं। यह भारत का पारंपरिक खेल है, जिसमें योग, जिम्नास्टिक और कुश्ती की पकड़ का मेल दिखता है। इस लेख में जानिए मल्लखंब का इतिहास, इसके प्रकार और खास बातें।
मल्लखंब का अर्थ
विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार मल्लखंब शब्द मल्ल और खंभ से बना है। मल्ल का अर्थ पहलवान और खंभ का अर्थ खंभा है। यानी इसका शाब्दिक अर्थ है पहलवानों का खंभा। यह मूल रूप से पहलवानों के अभ्यास का एक पारंपरिक साधन था। मल्लखंब शब्द उस खंभे के लिए भी इस्तेमाल होता है, जिस पर यह खेल होता है।

खेल क्या है
मल्लखंब में खिलाड़ी एक सीधे खड़े खंभे या लटकती रस्सी पर कुश्ती वाली पकड़ के साथ हवा में योग और जिम्नास्टिक के आसन करते हैं। इसमें ताकत, लचीलापन, संतुलन और तेजी, चारों की जरूरत होती है।
खंभा कैसा होता है
विकिपीडिया के अनुसार खंभा आम तौर पर शीशम की लकड़ी का बनता है और उस पर अरंडी का तेल लगाकर चिकना किया जाता है। प्रतियोगिता में इस्तेमाल होने वाला खंभा सागौन या शीशम का सीधा खंभा होता है, जो 2.6 मीटर ऊंचा होता है। नीचे इसकी परिधि 55 सेंटीमीटर होती है, जो ऊपर जाते जाते 35 सेंटीमीटर रह जाती है।
यह भी पढ़ें: Asian Games 2026: भारतीय महिला हॉकी टीम ने रचा इतिहास, 44 साल बाद चीन को हराकर जीता गोल्ड | Asian Games 2026: अमन सहरावत ने रचा इतिहास, 57 किलो कुश्ती में जीता गोल्ड; वर्ल्ड चैंपियन को 11-7 से हराया
प्राचीन इतिहास
विकिपीडिया के अनुसार मल्लखंब जैसे खेल के शुरुआती उदाहरण चंद्रकेतुगढ़ के मिट्टी के बर्तनों पर मिलते हैं, जो ईसा पूर्व दूसरी सदी से पहली सदी ईस्वी के बीच के हैं। इनमें कुछ आकृतियां T आकार के खंभे पर लटककर करतब दिखाती नजर आती हैं। सातवीं सदी में चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग ने प्रयागराज में खंभे पर चढ़ने की परंपरा का जिक्र किया है।
पेशवा काल और झांसी की रानी
विकिपीडिया के अनुसार 17वीं सदी के आखिर से 18वीं सदी के आखिर तक मल्लखंब का बहुत कम जिक्र मिलता है। फिर पेशवा बाजीराव द्वितीय के गुरु बालंभट्ट दादा देवधर ने इसमें नई रुचि जगाई। 19वीं सदी के पहले हिस्से में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने बचपन के साथियों नाना साहेब और तात्या टोपे के साथ मल्लखंब सीखा।
ओलंपिक से राष्ट्रीय चैंपियनशिप तक
- 1936 के बर्लिन ओलंपिक में मल्लखंब का प्रदर्शन किया गया।
- 1958 में दिल्ली के पहाड़गंज स्टेडियम में राष्ट्रीय जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में पहली बार प्रतियोगी मल्लखंब शामिल हुआ।
- 1962 में ग्वालियर में राष्ट्रीय जिम्नास्टिक चैंपियनशिप के हिस्से के रूप में पहली राष्ट्रीय मल्लखंब चैंपियनशिप हुई।
- उज्जैन में मल्लखंब फेडरेशन ऑफ इंडिया बना, जिसने 28 और 29 जनवरी 1981 को उज्जैन में पहली अखिल भारतीय राष्ट्रीय चैंपियनशिप कराई।
मल्लखंब के तीन प्रकार
विकिपीडिया के अनुसार प्रतियोगिता में 1937 से मल्लखंब के तीन रूप चलन में हैं:
- खंभा मल्लखंब: जमीन में गड़े सीधे लकड़ी के खंभे पर।
- लटकता मल्लखंब: ऊपर से लटकाए गए छोटे खंभे पर।
- रस्सी मल्लखंब: लटकती रस्सी पर।
तीनों रूप पुरुष और महिलाएं दोनों करते हैं, लेकिन खंभा मल्लखंब पुरुषों में और रस्सी मल्लखंब महिलाओं में ज्यादा लोकप्रिय है।
राज्य खेल का दर्जा
विकिपीडिया के अनुसार मध्य प्रदेश ने 9 अप्रैल 2013 को मल्लखंब को आधिकारिक राज्य खेल घोषित किया। 2017 तक 20 से ज्यादा दूसरे राज्यों ने भी इसे अपने राज्य खेलों में शामिल कर लिया था। मल्लखंब फेडरेशन ऑफ इंडिया से 28 राज्य जुड़े हैं।
विश्व चैंपियनशिप
विकिपीडिया के अनुसार 2019 में पहली विश्व मल्लखंब चैंपियनशिप हुई, जिसमें हिमानी उत्तम परब ने रस्सी के लंबे सेट में स्वर्ण पदक जीता।
मल्लखंब के फायदे
मल्लखंब का अभ्यास शरीर की ताकत, पकड़, लचीलापन और संतुलन बढ़ाने वाला माना जाता है। इसमें पूरे शरीर का इस्तेमाल होता है। लेकिन यह कठिन खेल है, इसलिए इसे हमेशा प्रशिक्षित कोच की देखरेख में, नीचे गद्दे लगाकर और धीरे धीरे सीखना चाहिए।
कैसे सीखें
कई शहरों में अखाड़ों, व्यायामशालाओं और खेल संस्थानों में मल्लखंब सिखाया जाता है। शुरुआत में शरीर को लचीला बनाने वाले व्यायाम और पकड़ मजबूत करने के अभ्यास कराए जाते हैं। फिर धीरे धीरे खंभे और रस्सी पर आसन सिखाए जाते हैं। स्कूल स्तर पर भी कई जगह इसकी प्रतियोगिताएं होती हैं।
मल्लखंब और योग
मल्लखंब में कई ऐसे आसन होते हैं जो योग के आसनों से मिलते जुलते हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर नहीं बल्कि खंभे या रस्सी पर करना होता है। इसलिए इसमें शरीर पर नियंत्रण और मानसिक एकाग्रता दोनों की जरूरत पड़ती है। खिलाड़ी हाथ, पैर, जांघ और कभी कभी गर्दन की पकड़ से खुद को संभालते हैं।
मल्लखंब शब्द का अर्थ क्या है
पहलवानों का खंभा, मल्ल यानी पहलवान और खंभ यानी खंभा।
मल्लखंब का खंभा कितना ऊंचा होता है
प्रतियोगिता में 2.6 मीटर।
पहली राष्ट्रीय मल्लखंब चैंपियनशिप कहां हुई
1962 में ग्वालियर में।
मल्लखंब किस राज्य का राज्य खेल है
मध्य प्रदेश ने 2013 में इसे राज्य खेल घोषित किया, बाद में कई और राज्यों ने भी।
स्रोत: Wikipedia: Mallakhamba, Wikipedia: Indian sports at the 1936 Summer Olympics





