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Kidney Detox Foods: किडनी को डिटॉक्स करने वाले 7 फूड्स, डाइट में शामिल करें

Kidney Detox Foods: किडनी को डिटॉक्स करने वाले 7 फूड्स, डाइट में शामिल करें
Kidney Detox Foods

सारांश

  • Kidney Detox Foods: शरीर के अंदर किडनी चुपचाप काम करती है। दिनभर खून छनता रहता है, बेकार पदार्थ बाहर निकलते हैं और पानी-नमक का हिसाब भी यही अंग संभालता है।
  • किडनी तभी ठीक चलती है जब शरीर में पानी पर्याप्त हो। सादा पानी सबसे पहला इलाज है।
  • सेब का घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल संतुलित रखने और पाचन को सहारा देने वाला माना गया है।
  • उबालकर, हल्का भाप देकर या सूप बनाकर खाया जा सकता है। ज्यादा मसाले और क्रीम से इसका फायदा दब जाता है।

Kidney Detox Foods: शरीर के अंदर किडनी चुपचाप काम करती है। दिनभर खून छनता रहता है, बेकार पदार्थ बाहर निकलते हैं और पानी-नमक का हिसाब भी यही अंग संभालता है। जानकार बताते हैं कि किडनी हर रोज करीब पचास गैलन ब्लड को फिल्टर करती है। फिर भी ज्यादातर लोग इसकी सेहत तब तक नहीं पूछते, जब तक पेशाब में जलन, सूजन या पथरी जैसी शिकायत सामने न आ जाए। किडनी को डिटॉक्स करने वाले 7 फूड्स की चर्चा इसीलिए बढ़ी है कि रोजमर्रा की थाली से कुछ राहत मिल सकती है। सवाल यह है कि बाजार के महंगे जूस की जरूरत है या रसोई की आम चीजें भी काम आ सकती हैं।

भागदौड़ और नमकीन-तला खाना सबसे पहले किडनी पर बोझ डालता है। पानी कम पिएं तो वेस्ट अंदर जमा होने लगता है। डॉक्टर बार-बार यही कहते हैं कि दवा से पहले आदत सुधारनी चाहिए। आगे की बात उन सात चीजों पर टिकती है जो घर में आसानी से मिल जाती हैं। इनमें एक ऐसा भी फूड है जो सेहतमंद दिखता है, लेकिन गंभीर किडनी मरीज के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

Kidney Detox Foods: क्रेनबेरी और यूरिन इंफेक्शन का नाता

किडनी की बात छिड़ी कि क्रेनबेरी का नाम आ ही जाता है। इस छोटे फल में प्रोएन्थोसायनिडिन नाम का प्राकृतिक यौगिक होता है। यही बैक्टीरिया को यूरिनरी ट्रैक्ट की दीवार पर चिपकने से रोकने में मदद करता है। यूटीआई अगर समय पर न संभले तो संक्रमण ऊपर की ओर बढ़कर किडनी तक पहुंच सकता है। इसलिए बचाव की पहली कतार यहीं से शुरू मानी जाती है।

क्रेनबेरी में एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं। ये शरीर के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने वाले माने गए हैं। ताजा फल हर शहर में नहीं मिलता। ऐसे में सूखी क्रेनबेरी काम आ सकती है। शर्त यह है कि उस पर चीनी की मोटी परत न चढ़ी हो। मीठा पैकेट फायदा कम, कैलोरी ज्यादा दे सकता है।

नींबू पानी से हाइड्रेशन और पथरी का खतरा

किडनी तभी ठीक चलती है जब शरीर में पानी पर्याप्त हो। सादा पानी सबसे पहला इलाज है। उसमें थोड़ा नींबू निचोड़ देना कई घरों की पुरानी आदत है। जानकारों के मुताबिक नींबू पानी कुछ लोगों में किडनी स्टोन बनने की रफ्तार को धीमा कर सकता है। खासकर कैल्शियम ऑक्सलेट वाली पथरी के संदर्भ में साइट्रेट वाली चीजों का जिक्र अक्सर आता है।

पानी पीने से पेशाब बनती है और वेस्ट बाहर निकलता है। यह कोई जादू नहीं, साधारण प्रक्रिया है। गर्मी में या ऑफिस की लंबी शिफ्ट में लोग चाय-कॉफी तो पी लेते हैं, पानी भूल जाते हैं। मामला कुछ इस तरह से बिगड़ता है। नींबू पानी तभी फायदा देगा जब नमक-चीनी से लबालब न हो।

चुकंदर के फायदे और वो चेतावनी जो छूट जाती है

चुकंदर रंग से लेकर पोषण तक भारी पड़ता है। एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और बीटाइन जैसे प्लांट कंपाउंड इसमें होते हैं। रक्त संचार और ऑक्सीडेटिव तनाव को लेकर इसकी चर्चा आम है। सलाद या जूस के रूप में लोग इसे सेहत का प्रतीक मान बैठते हैं।

यहीं छोटा ट्विस्ट है। गंभीर किडनी बीमारी वाले मरीजों के लिए चुकंदर हर बार सुरक्षित नहीं होता। इसमें पोटैशियम स्वाभाविक रूप से ज्यादा होता है। खराब किडनी पोटैशियम निकाल नहीं पाती तो रक्त में स्तर बढ़ सकता है। इसलिए जो पहले से डायलिसिस पर हैं या जिन्हें डॉक्टर ने पोटैशियम सीमित करने को कहा है, उन्हें बिना सलाह चुकंदर नहीं लेना चाहिए। सेहतमंद दिखने वाली सब्जी सबके लिए एक जैसी नहीं होती।

सेब रोजाना खाना कितना सही

पुरानी कहावत है कि रोज एक सेब डॉक्टर को दूर रखता है। किडनी के संदर्भ में यह पूरी तरह रामबाण तो नहीं, लेकिन फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की वजह से सेब को हेल्दी च्वॉइस माना जाता है। एंटी-इंफ्लामेटरी गुण मेटाबॉलिज्म और दिल की सेहत से जुड़े बताए जाते हैं। दिल और ब्लड प्रेशर का बोझ कम रहे तो किडनी पर दबाव भी कुछ हल्का पड़ता है।

सेब का घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल संतुलित रखने और पाचन को सहारा देने वाला माना गया है। छिलके समेत खाना ज्यादा फायदा देता है, बशर्ते अच्छी तरह धोया गया हो। जूस से पूरा फल बेहतर रहता है। जूस में फाइबर घट जाता है और चीनी जल्दी चढ़ती है।

लहसुन स्वाद भी दे, नमक न बढ़ाए

भारतीय रसोई का लहसुन सिर्फ मसाला नहीं। इसमें सल्फर वाले यौगिक होते हैं। इन्हीं से एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण जुड़े माने जाते हैं। तड़के में दो फांकी डालना आम बात है। दिक्कत तब आती है जब लहसुन के साथ नमक भी बेतहाशा बढ़ जाए।

ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर चढ़ाता है। ऊंचा प्रेशर किडनी की छोटी नलियों को सालों-साल घिसता है। देखने पर लगता है कि स्वाद के चक्कर में लोग अचार, पैकेट और रेस्टोरेंट के नमक को नजरअंदाज कर देते हैं। लहसुन सीमित मात्रा में ठीक है। नमकीन तड़का रोज-रोज भारी पड़ सकता है।

पत्तागोभी को किडनी फ्रेंडली क्यों कहा जाता है

पत्तागोभी हर सब्जी मंडी में मिल जाती है। विटामिन सी, विटामिन के, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट इसमें होते हैं। सबसे बड़ी बात पोटैशियम की मात्रा कई दूसरी सब्जियों से कम मानी गई है। इसी वजह से इसे किडनी फ्रेंडली सब्जी कहा जाता है। फाइटोकेमिकल्स कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने वाले बताए जाते हैं।

उबालकर, हल्का भाप देकर या सूप बनाकर खाया जा सकता है। ज्यादा मसाले और क्रीम से इसका फायदा दब जाता है। घर की सादी सब्जी यहां बाजार के फैन्सी सलाद से सस्ती और काम की साबित हो सकती है।

Kidney Detox Foods: तरबूज से पानी भी, सतर्कता भी

तरबूज में करीब नब्बे प्रतिशत पानी होता है। गर्मी में यह प्यास भी बुझाता है और हाइड्रेशन भी देता है। किडनी को पानी चाहिए, यह बात बार-बार दोहराई जाती है। लाइकोपीन और विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट इसमें पाए जाते हैं।

पुरानी या गंभीर किडनी बीमारी वाले मरीजों को सतर्क रहना चाहिए। फल में पानी के साथ पोटैशियम भी होता है। मात्रा ज्यादा हो तो नुकसान हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना रोज किलो-दो किलो तरबूज बैठ जाना ठीक नहीं। मौसम का फल है, समझदारी से खाएं।

किडनी शरीर की सफाई का काम बिना शोर किए करती है। क्रेनबेरी, नींबू पानी, सेब, लहसुन, पत्तागोभी और तरबूज जैसी चीजें डाइट को सहारा दे सकती हैं। चुकंदर जैसे फूड फायदा भी देते हैं, पर मरीज के लिए जोखिम भी छिपा सकते हैं। ये विकल्प दवा का विकल्प नहीं हैं। पेशाब में खून, सूजन, उल्टी या तेज कमजोरी दिखे तो जांच करानी चाहिए। थोड़ा पानी, कम नमक और सादी थाली अक्सर महंगे डिटॉक्स पैक से आगे निकल जाती है। अब देखना यह है कि लोग आदत कितनी जल्दी बदलते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, यह चिकित्सीय सलाह नहीं है। किसी भी घरेलू उपाय, डाइट, दवा या उत्पाद को अपनाने से पहले, खासकर किसी बीमारी, एलर्जी, गर्भावस्था या दवा चलने की स्थिति में, योग्य डॉक्टर से सलाह लें। विश्वसनीय स्वास्थ्य जानकारी के लिए देखें: आयुष मंत्रालय | WHO: स्वस्थ आहार

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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