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भाला फेंक के नियम: 800 ग्राम का भाला, 28.96 डिग्री का सेक्टर, 1986 का बदलाव और नीरज चोपड़ा की कामयाबी

टोक्यो ओलंपिक के बाद भारत में भाला फेंक की लोकप्रियता बढ़ी है। जानिए इस खेल के नियम और इतिहास।

एथलेटिक्स मैदान पर भाला फेंकते खिलाड़ी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • टोक्यो ओलंपिक 2020 में नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक के बाद भाला फेंक भारत में सबसे चर्चित खेलों में शामिल हो गया।
  • विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाला फेंक को ईसा पूर्व 708 में प्राचीन ओलंपिक खेलों में पेंटाथलॉन के हिस्से के रूप में जोड़ा गया था।
  • विकिपीडिया के अनुसार दूसरी थ्रो स्पर्धाओं से अलग, भाला फेंक की तकनीक वर्ल्ड एथलेटिक्स के नियमों से तय होती है।
  • हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने भारत में भाला फेंक को नई पहचान दी।

टोक्यो ओलंपिक 2020 में नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक के बाद भाला फेंक भारत में सबसे चर्चित खेलों में शामिल हो गया। गांवों और कस्बों में भी बच्चे अब भाला लेकर अभ्यास करते दिखते हैं। लेकिन यह खेल सिर्फ ताकत का नहीं, तकनीक और नियमों का भी है। इस लेख में जानिए भाला फेंक के मुख्य नियम, इसका इतिहास और भारत की उपलब्धियां।

भाला फेंक क्या है

भाला फेंक एथलेटिक्स की एक थ्रो स्पर्धा है, जिसमें खिलाड़ी तय रनवे पर दौड़कर गति बनाता है और भाले को जितना हो सके उतनी दूर फेंकता है। यह पुरुषों की डेकाथलॉन और महिलाओं की हेप्टाथलॉन का भी हिस्सा है।

मुख्य बातें: एथलेटिक्स मैदान पर भाला फेंकते खिलाड़ी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

प्राचीन इतिहास

विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाला फेंक को ईसा पूर्व 708 में प्राचीन ओलंपिक खेलों में पेंटाथलॉन के हिस्से के रूप में जोड़ा गया था। उस समय दूरी और निशाने, दोनों तरह की स्पर्धा होती थी। भाले के बीच में चमड़े का पट्टा लपेटा जाता था, जिससे फेंकते समय भाला घूमता और सीधा उड़ता था।

आधुनिक भाला फेंक

1870 के दशक में जर्मनी और स्वीडन में निशाने पर डंडे फेंकने का खेल फिर शुरू हुआ। स्वीडन में यही खेल आधुनिक भाला फेंक बना। स्वीडन के एरिक लेमिंग इस खेल के पहले बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। पुरुषों का भाला फेंक 1906 के खेलों में ओलंपिक स्पर्धा के रूप में आया। महिलाओं का भाला फेंक 1932 में ओलंपिक में शामिल हुआ।

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सेक्टर और रनवे

खिलाड़ी एक रनवे पर दौड़कर भाला फेंकता है, जिसके आखिर में एक घुमावदार थ्रोइंग आर्क होती है। भाले को 28.96 डिग्री के सेक्टर के अंदर गिरना चाहिए। विकिपीडिया के अनुसार यह कोण इसलिए रखा गया क्योंकि इससे मैदान पर सेक्टर की रेखाएं बनाना आसान होता है। भाला सेक्टर की रेखा पर या उसके बाहर गिरे तो थ्रो अमान्य होता है।

मान्य थ्रो के मुख्य नियम

  • भाले को उसकी पकड़ वाली जगह से पकड़ना होता है।
  • भाला कंधे या फेंकने वाले हाथ के ऊपर से फेंका जाता है, नीचे से फेंकना मान्य नहीं।
  • फेंकते समय खिलाड़ी पूरी तरह पीठ थ्रोइंग आर्क की ओर नहीं घुमा सकता।
  • भाला सेक्टर की रेखाओं के अंदर गिरना चाहिए।

विकिपीडिया के अनुसार दूसरी थ्रो स्पर्धाओं से अलग, भाला फेंक की तकनीक वर्ल्ड एथलेटिक्स के नियमों से तय होती है। घूमकर साइड से भाला फेंकने की तकनीक पर रोक इसलिए लगी, क्योंकि 1950 के दशक में कुछ खिलाड़ी फ्री स्टाइल तकनीक आजमाने लगे थे। 24 अक्टूबर 1956 को फिनलैंड के पेंत्ती सारिकोस्की ने भाले के सिरे को पकड़कर ऐसी तकनीक से 99.52 मीटर फेंका था। अधिकारियों ने इसे खतरनाक मानकर नियमों से बंद कर दिया।

1986 का बड़ा बदलाव

1980 के दशक में भाले इतनी दूर जाने लगे थे कि यह खतरनाक हो गया। पूर्वी जर्मनी के उवे होन ने 1984 में 104.80 मीटर का थ्रो किया था। 100 मीटर से ज्यादा के थ्रो स्टेडियम के मैदान से बाहर तक पहुंचने का खतरा पैदा कर रहे थे। साथ ही भाले कई बार सपाट गिरते थे, जिससे फैसले मुश्किल होते थे। इसलिए 1 अप्रैल 1986 को पुरुषों के 800 ग्राम के भाले का डिजाइन बदला गया और उसका गुरुत्व केंद्र आगे किया गया। इससे भाला जल्दी नीचे आने लगा, नोक पहले जमीन पर गिरने लगी और दूरी घट गई। महिलाओं के लिए यह बदलाव अप्रैल 1999 में लागू हुआ। बदलाव के बाद विश्व रिकॉर्ड नए सिरे से गिने गए।

मौजूदा विश्व रिकॉर्ड

पुरुषों का विश्व रिकॉर्ड चेक गणराज्य के यान जेलेज्नी के नाम है, जिन्होंने 1996 में 98.48 मीटर भाला फेंका था। महिलाओं का विश्व रिकॉर्ड चेक गणराज्य की बारबोरा श्पोताकोवा के नाम 72.28 मीटर है।

नीरज चोपड़ा की उपलब्धियां

हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने भारत में भाला फेंक को नई पहचान दी। विकिपीडिया के अनुसार उनकी प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • 2016 में विश्व अंडर 20 चैंपियनशिप में 86.48 मीटर के विश्व जूनियर रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण
  • टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण पदक
  • 2023 बुडापेस्ट विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
  • पेरिस ओलंपिक 2024 में रजत पदक
  • 2025 में 90.23 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड

नॉर्डिक देशों का दबदबा

भाला फेंक में लंबे समय तक नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड का दबदबा रहा। विकिपीडिया के अनुसार पुरुषों के भाला फेंक में ओलंपिक के 69 पदकों में से 32 इन्हीं तीन देशों के खिलाड़ियों ने जीते। फिनलैंड ने 1920 और 1932 के ओलंपिक में तीनों पदक जीते थे।

शुरुआत कैसे करें

भाला फेंक सीखने के लिए किसी प्रशिक्षित कोच की देखरेख जरूरी है, क्योंकि गलत तकनीक से कंधे और कोहनी में चोट लग सकती है। स्कूल और जिला खेल केंद्रों में इसकी ट्रेनिंग मिलती है। अभ्यास हमेशा सुरक्षित मैदान में करें, जहां सामने कोई न हो।

पुरुषों के भाले का वजन कितना होता है

800 ग्राम।

भाला फेंक का सेक्टर कितने डिग्री का होता है

28.96 डिग्री।

भाला फेंक का विश्व रिकॉर्ड किसके नाम है

यान जेलेज्नी, 98.48 मीटर।

नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक स्वर्ण कब जीता

टोक्यो ओलंपिक 2020 में।

स्रोत: Wikipedia: Javelin throw, Wikipedia: Neeraj Chopra, World Athletics: Javelin throw

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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