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इंडिया गेट का इतिहास: 74,187 सैनिकों की याद में बना युद्ध स्मारक, लुटियंस का डिजाइन और अमर जवान ज्योति की कहानी

कर्तव्य पथ पर खड़ा इंडिया गेट दिल्ली की पहचान है। जानिए यह स्मारक किसकी याद में बना।

शाम की रोशनी में इंडिया गेट का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दिल्ली घूमने आने वाला शायद ही कोई व्यक्ति इंडिया गेट देखे बिना लौटता हो।
  • इंडिया गेट का डिजाइन सर एडविन लुटियंस ने बनाया, जो नई दिल्ली के मुख्य वास्तुकार थे और इंपीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन के सदस्य भी थे।
  • इंडिया गेट के पास ही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बना है, जो आजादी के बाद देश के लिए शहीद हुए सैनिकों की याद में है।
  • इंडिया गेट को शाम के समय रोशनी में देखना खास अनुभव होता है। आसपास के लॉन में परिवार पिकनिक के लिए आते हैं।

दिल्ली घूमने आने वाला शायद ही कोई व्यक्ति इंडिया गेट देखे बिना लौटता हो। शाम को रोशनी में जगमगाता यह विशाल द्वार राजधानी की पहचान बन चुका है। लेकिन यह सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि हजारों सैनिकों की याद में बना युद्ध स्मारक है। इस लेख में जानिए इंडिया गेट का इतिहास, इसका डिजाइन और इससे जुड़े रोचक तथ्य।

किसकी याद में बना

विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इंडिया गेट का पुराना नाम ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल है। यह ब्रिटिश भारतीय सेना के उन 74,187 भारतीय सैनिकों की याद में बना है, जो 1914 से 1921 के बीच पहले विश्व युद्ध में फ्रांस, फ्लैंडर्स, मेसोपोटामिया, फारस, पूर्वी अफ्रीका, गैलीपोली और दूसरी जगहों पर और 1919 के तीसरे आंग्ल अफगान युद्ध में मारे गए।

मुख्य बातें: शाम की रोशनी में इंडिया गेट का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

नींव से उद्घाटन तक

इंडिया गेट इंपीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन के काम का हिस्सा था, जो दिसंबर 1917 में युद्ध में मारे गए सैनिकों की कब्रें और स्मारक बनाने के लिए बना था। विकिपीडिया के अनुसार इस स्मारक की नींव 10 फरवरी 1921 को ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी। दस साल बाद 12 फरवरी 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया।

लुटियंस का डिजाइन

इंडिया गेट का डिजाइन सर एडविन लुटियंस ने बनाया, जो नई दिल्ली के मुख्य वास्तुकार थे और इंपीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन के सदस्य भी थे। उन्होंने यूरोप में 66 युद्ध स्मारक डिजाइन किए, जिनमें लंदन का सेनोटाफ भी शामिल है। इंडिया गेट को पेरिस के आर्क डी ट्रायम्फ से प्रेरित रचना भी कहा गया है।

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बनावट

  • इंडिया गेट भरतपुर के लाल पत्थर के निचले आधार पर खड़ा है।
  • यह आयताकार ढांचा है, जिसके चारों तरफ मेहराब हैं, लंबी तरफ के मेहराब बड़े और ऊंचे हैं।
  • ऊपर के कंगूरे पर सूर्य के चिह्न बने हैं।
  • सबसे ऊपर एक उथला गुंबदनुमा कटोरा है।

शिलालेख

विकिपीडिया के अनुसार इंडिया गेट के दोनों ओर बड़े अक्षरों में INDIA लिखा है, जिसके एक तरफ रोमन अंकों में 1914 और दूसरी तरफ 1919 लिखा है। इसके नीचे शहीद सैनिकों की याद में अंग्रेजी में संदेश अंकित है। स्मारक की दीवारों पर सैनिकों के नाम भी लिखे हैं।

अमर जवान ज्योति

1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद इंडिया गेट के मेहराब के नीचे काले संगमरमर का एक चबूतरा बनाया गया, जिस पर उल्टी राइफल और उसके ऊपर सैनिक का हेलमेट रखा गया। इसके चारों ओर चार अनंत ज्योतियां जलती थीं। इसे अमर जवान ज्योति कहा गया। विकिपीडिया के अनुसार 1971 से 2019 तक यह भारत के अज्ञात सैनिक की समाधि के रूप में रही, जब तक इसकी जगह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नहीं बन गया।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक

इंडिया गेट के पास ही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बना है, जो आजादी के बाद देश के लिए शहीद हुए सैनिकों की याद में है। 2019 में यह स्मारक देश को समर्पित किया गया। अब शहीदों को श्रद्धांजलि से जुड़े कई आधिकारिक आयोजन यहीं होते हैं।

कर्तव्य पथ और गणतंत्र दिवस

इंडिया गेट कर्तव्य पथ के पूर्वी छोर पर है, जिसे पहले राजपथ और उससे पहले किंग्सवे कहा जाता था। विकिपीडिया के अनुसार गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रपति भवन से शुरू होकर इंडिया गेट के आसपास से गुजरती है। पहले इंडिया गेट के बीच से गाड़ियां भी गुजरती थीं, लेकिन बाद में इसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया।

लेस्टर से जुड़ाव

2017 में इंडिया गेट को इंग्लैंड के लेस्टर शहर के आर्च ऑफ रिमेंबरेंस के साथ जोड़ा गया, जो लुटियंस का ही बनाया एक छोटा युद्ध स्मारक है और इसका डिजाइन काफी मिलता जुलता है।

घूमने जाएं तो

इंडिया गेट को शाम के समय रोशनी में देखना खास अनुभव होता है। आसपास के लॉन में परिवार पिकनिक के लिए आते हैं। स्मारक का सम्मान बनाए रखें, सफाई का ध्यान रखें और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

इंडिया गेट से जुड़े आयोजन

विकिपीडिया के अनुसार इंडिया गेट को हर शाम रोशनी से सजाया जाता है और यह दिल्ली के सबसे बड़े पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। गणतंत्र दिवस और दूसरे राष्ट्रीय अवसरों पर यहां की सजावट खास होती है। यह जगह कई बार नागरिक प्रदर्शनों का केंद्र भी रही है, जैसे 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान।

आसपास क्या देखें

इंडिया गेट के आसपास कर्तव्य पथ का खुला इलाका, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और दूर राष्ट्रपति भवन की ओर जाता सीधा रास्ता दिखाई देता है। घूमने से पहले मौसम और सुरक्षा से जुड़े निर्देश देख लें।

इंडिया गेट का पुराना नाम क्या है

ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल।

इंडिया गेट किसकी याद में बना है

पहले विश्व युद्ध और तीसरे आंग्ल अफगान युद्ध में मारे गए 74,187 भारतीय सैनिकों की याद में।

इंडिया गेट का उद्घाटन कब हुआ

12 फरवरी 1931 को।

इंडिया गेट का डिजाइन किसने बनाया

सर एडविन लुटियंस ने।

स्रोत: Wikipedia: India Gate, Wikipedia: Amar Jawan Jyoti, Wikipedia: National War Memorial (India)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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