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गोबरधन योजना: 23,731 करोड़ रुपये से कंप्रेस्ड बायोगैस को बढ़ावा, गांवों में बायोगैस प्लांट और किसानों को फायदा

गोबर और खेती के कचरे से गैस और खाद बनाने वाली गोबरधन योजना अब बड़े स्तर पर आगे बढ़ रही है। जानिए पूरी जानकारी।

गांव में बायोगैस प्लांट और पशुओं का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • गांवों में गोबर, फसल के अवशेष और रसोई का कचरा बड़ी मात्रा में निकलता है।
  • PIB के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को गोबरधन यानी राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना को 23,731 करोड़ रुपये के खर्च के साथ मंजूरी दी।
  • योजना में सिटी गैस वितरण कंपनियों पर CBG खरीदने की जिम्मेदारी रखी गई है।
  • PIB के अनुसार योजना का मकसद निवेशकों और कर्ज देने वाले संस्थानों को लंबी अवधि का भरोसेमंद ढांचा देना है।

गांवों में गोबर, फसल के अवशेष और रसोई का कचरा बड़ी मात्रा में निकलता है। अगर इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो इससे गैस और जैविक खाद दोनों बन सकते हैं। इसी सोच के साथ गोबरधन पहल शुरू हुई थी, जो अब एक बड़ी राष्ट्रीय योजना बन चुकी है। इस लेख में जानिए गोबरधन योजना क्या है, इसमें क्या नया है और इसका फायदा किसे मिलेगा।

गोबरधन का पूरा नाम

गोबरधन का पूरा नाम गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो एग्रो रिसोर्सेज धन है। गोबरधन पोर्टल के अनुसार इसकी घोषणा फरवरी 2018 के बजट भाषण में हुई थी और 30 अप्रैल 2018 को पेयजल और स्वच्छता विभाग ने इसकी शुरुआत की। मकसद था पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस कचरे को कंपोस्ट, खाद, बायोगैस और बायो CNG में बदलना।

मुख्य बातें: गांव में बायोगैस प्लांट और पशुओं का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ाव

गोबरधन स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण के ठोस कचरा प्रबंधन का अहम हिस्सा है। पोर्टल के अनुसार इस चरण में 2020-21 से 2026-27 की अवधि के लिए हर जिले को सामुदायिक और क्लस्टर बायोगैस प्लांट लगाने के लिए 50 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद का प्रावधान है। इसका मकसद गांवों को साफ रखना और कचरे से उपयोगी चीजें बनाना है।

2026 की नई गोबरधन योजना

PIB के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को गोबरधन यानी राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना को 23,731 करोड़ रुपये के खर्च के साथ मंजूरी दी। यह योजना 2026-27 से 2035-36 तक लागू होगी। पहले कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG से जुड़े काम चार अलग अलग मंत्रालयों में बंटे थे। अब पूरी योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत लाई गई है। 1 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस योजना की औपचारिक शुरुआत की।

यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना में आवेदन कैसे करें: 60 साल के बाद 3000 रुपये महीना पेंशन, अंशदान और पात्रता | Kisan Durghatna Kalyan Yojana UP: दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता पर यूपी के किसानों को 5 लाख रुपये तक की मदद

योजना का लक्ष्य

PIB के अनुसार योजना का लक्ष्य देश में CBG उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाकर करीब 5 MMSCMD यानी 50 लाख मानक घन मीटर प्रति दिन तक ले जाना है। PIB के अनुसार भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना गया है।

योजना के छह हिस्से

PIB के अनुसार नई गोबरधन योजना में छह मुख्य हिस्से हैं:

  1. CBG की खरीद की गारंटी
  2. CBG के दाम का ढांचा
  3. CBG प्रोजेक्ट के लिए पूंजी सहायता
  4. पाइपलाइन ढांचे का विकास
  5. कर्ज के लिए क्रेडिट गारंटी
  6. CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड

सिटी गैस कंपनियों पर खरीद की जिम्मेदारी

योजना में सिटी गैस वितरण कंपनियों पर CBG खरीदने की जिम्मेदारी रखी गई है। PIB के अनुसार CNG परिवहन और घरेलू PNG के लिए यह जिम्मेदारी 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत तय की गई है। इससे CBG प्लांट लगाने वालों को अपनी गैस बेचने का भरोसेमंद रास्ता मिलेगा।

अब तक की स्थिति

PIB के अनुसार 6 अगस्त 2026 तक गोबरधन एकीकृत रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर देश भर में 1,908 CBG या बायो CNG प्लांट दर्ज थे। इनमें से 217 प्लांट चालू हो चुके थे और 339 निर्माणाधीन थे।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें

PIB के अनुसार देश में CBG या बायो CNG प्लांट चलाने वाले या लगाने की योजना बनाने वाले लोग गोबरधन एकीकृत रजिस्ट्रेशन पोर्टल gobardhan.eil.co.in पर रजिस्ट्रेशन नंबर ले सकते हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय से मिलने वाले फायदे और मदद के लिए यह नंबर जरूरी है।

किसानों और गांवों को फायदा

  • गोबर और फसल अवशेष बेचकर अतिरिक्त आमदनी का मौका
  • बायोगैस प्लांट से निकलने वाली स्लरी से जैविक खाद
  • पराली और कचरा जलाने की समस्या में कमी
  • गांवों में साफ सफाई और रोजगार के मौके

निवेशकों के लिए क्या

PIB के अनुसार योजना का मकसद निवेशकों और कर्ज देने वाले संस्थानों को लंबी अवधि का भरोसेमंद ढांचा देना है। तय खरीद, स्थिर दाम, पूंजी सहायता और क्रेडिट गारंटी जैसे प्रावधानों से CBG प्लांट के लिए कर्ज मिलना आसान होने की उम्मीद है। योजना की शुरुआत के साथ गोबरधन हैंडबुक भी जारी की गई, जिसमें राज्यों, डेवलपर्स और वित्तीय संस्थानों के लिए योजना की पूरी जानकारी दी गई है।

पाइपलाइन से जुड़ाव

CBG प्लांट को सिटी गैस वितरण क्षेत्रों या CBG क्लस्टरों से जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी गैस आसानी से बाजार तक पहुंच सके। योजना में पाइपलाइन ढांचे के विकास के लिए भी मदद का प्रावधान है। इससे दूर दराज के प्लांट भी गैस नेटवर्क से जुड़ सकेंगे।

गोबरधन योजना कब शुरू हुई

30 अप्रैल 2018 को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत।

नई गोबरधन योजना का खर्च कितना है

23,731 करोड़ रुपये।

नई योजना कौन सा मंत्रालय चलाता है

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय।

CBG प्लांट का रजिस्ट्रेशन कहां होता है

गोबरधन एकीकृत रजिस्ट्रेशन पोर्टल gobardhan.eil.co.in पर।

स्रोत: PIB: GOBARdhan, Fuelling Clean Energy and Rural Growth, PIB: Hardeep Singh Puri launches GOBARdhan Scheme, GOBARdhan portal, SBM Grameen: About

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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