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एग्जिट पोल क्या है: वोट डालकर निकले मतदाताओं का सर्वे, धारा 126A के नियम, कब दिखा सकते हैं और कितनी सजा

मतदान खत्म होते ही टीवी पर एग्जिट पोल क्यों आते हैं? समझिए इसका कानून और सीमाएं।

मतदान के बाद उंगली पर स्याही का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • चुनाव में आखिरी चरण का मतदान खत्म होते ही टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल के आंकड़े आने लगते हैं।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126A के अनुसार चुनाव आयोग जो अवधि अधिसूचित करे, उसके दौरान कोई भी व्यक्ति न एग्जिट पोल कर सकता है और न उसके नतीजे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या किसी और माध्यम…
  • कानून में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इंटरनेट, रेडियो, टीवी, IPTV, सैटेलाइट, केबल चैनल और मोबाइल शामिल हैं।
  • एग्जिट पोल देखकर किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले याद रखें कि यह सिर्फ सर्वे है।

चुनाव में आखिरी चरण का मतदान खत्म होते ही टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल के आंकड़े आने लगते हैं। कौन जीतेगा, किसे कितनी सीटें मिलेंगी, इस पर चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन एग्जिट पोल होता क्या है, इसे कब दिखाया जा सकता है और इसका कानून क्या कहता है, यह इस लेख में समझिए।

एग्जिट पोल क्या है

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126A के अनुसार एग्जिट पोल वह राय सर्वे है, जिसमें यह पता लगाया जाता है कि मतदाताओं ने चुनाव में कैसे वोट डाला, या किस पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। आम तौर पर सर्वे करने वाली एजेंसियां मतदान केंद्र से वोट डालकर निकले लोगों से सवाल पूछती हैं और उसके आधार पर अनुमान लगाती हैं।

मुख्य बातें: मतदान के बाद उंगली पर स्याही का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

ओपिनियन पोल से अंतर

ओपिनियन पोल मतदान से पहले किया जाता है और इसमें लोगों से पूछा जाता है कि वे किसे वोट देने का इरादा रखते हैं। एग्जिट पोल वोट डालने के बाद का सर्वे है, यानी इसमें पूछा जाता है कि उन्होंने किसे वोट दिया।

धारा 126A क्या कहती है

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126A के अनुसार चुनाव आयोग जो अवधि अधिसूचित करे, उसके दौरान कोई भी व्यक्ति न एग्जिट पोल कर सकता है और न उसके नतीजे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या किसी और माध्यम से प्रकाशित या प्रसारित कर सकता है। यह धारा 2009 के संशोधन कानून से जोड़ी गई और 1 फरवरी 2010 से लागू हुई।

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रोक कब तक रहती है

धारा 126A के अनुसार चुनाव आयोग इसके लिए सामान्य आदेश से तारीख और समय अधिसूचित करता है:

  • आम चुनाव में यह अवधि पहले दिन मतदान के तय समय की शुरुआत से लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद तक हो सकती है।
  • उपचुनाव में यह अवधि मतदान शुरू होने से लेकर मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद तक हो सकती है।
  • अलग अलग दिन होने वाले कई उपचुनावों में यह आखिरी मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद तक चल सकती है।

इसी वजह से एग्जिट पोल के आंकड़े आम तौर पर आखिरी चरण का मतदान खत्म होने के बाद ही सामने आते हैं।

सजा क्या है

धारा 126A के अनुसार इसका उल्लंघन करने पर दो साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। धारा 126B के अनुसार अगर यह अपराध किसी कंपनी ने किया हो, तो कंपनी के कामकाज के लिए जिम्मेदार व्यक्ति भी दोषी माने जा सकते हैं।

मीडिया की परिभाषा

कानून में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इंटरनेट, रेडियो, टीवी, IPTV, सैटेलाइट, केबल चैनल और मोबाइल शामिल हैं। प्रिंट मीडिया में अखबार, पत्रिका, पोस्टर, प्लेकार्ड, पर्चे और दूसरे दस्तावेज शामिल हैं। यानी सोशल मीडिया या मोबाइल पर एग्जिट पोल फैलाना भी इस दायरे में आता है।

भारत में एग्जिट पोल कौन करता है

विकिपीडिया के अनुसार भारत में एग्जिट पोल निजी न्यूज चैनल, अखबार और सर्वे एजेंसियां करती हैं। विकिपीडिया के अनुसार ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, भारत और सिंगापुर जैसे कई देशों में सभी मतदान केंद्र बंद होने से पहले एग्जिट पोल के आंकड़े जारी करना अपराध है।

एग्जिट पोल कितने सही होते हैं

एग्जिट पोल सिर्फ अनुमान हैं, अंतिम नतीजे नहीं। सर्वे का सैंपल, सवाल पूछने का तरीका और मतदाताओं का सच बताना या न बताना, इन सब पर इसकी सटीकता निर्भर करती है। विकिपीडिया के अनुसार 2024 के लोकसभा चुनाव में एग्जिट पोल और असली नतीजों में बड़ा अंतर देखा गया। इसलिए असली नतीजे सिर्फ चुनाव आयोग की आधिकारिक मतगणना से ही तय होते हैं।

48 घंटे का साइलेंस पीरियड

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 मतदान खत्म होने के तय समय से पहले के 48 घंटों में सार्वजनिक सभाओं पर रोक से जुड़ी है। इसे आम बोलचाल में साइलेंस पीरियड कहा जाता है। एग्जिट पोल की रोक इससे अलग धारा 126A के तहत है।

मतदाताओं के लिए जरूरी बात

एग्जिट पोल देखकर किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले याद रखें कि यह सिर्फ सर्वे है। मतगणना के दिन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आने वाले आधिकारिक रुझान और नतीजे ही मान्य होते हैं।

सर्वे का तरीका

एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां अलग अलग मतदान क्षेत्रों से नमूने के तौर पर मतदाताओं को चुनती हैं। जितना बड़ा और संतुलित नमूना होगा, अनुमान उतना बेहतर माना जाता है। लेकिन वोट गुप्त होता है और मतदाता अपनी पसंद बताने के लिए बाध्य नहीं है, इसलिए गलती की गुंजाइश हमेशा रहती है।

एग्जिट पोल से जुड़ा कानून कौन सा है

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126A।

एग्जिट पोल कब दिखाए जा सकते हैं

चुनाव आयोग की अधिसूचित रोक की अवधि खत्म होने के बाद, आम तौर पर आखिरी मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद।

नियम तोड़ने पर कितनी सजा है

दो साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों।

एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल में क्या अंतर है

ओपिनियन पोल मतदान से पहले और एग्जिट पोल मतदान के बाद किया जाता है।

स्रोत: Representation of the People Act, 1951 (PDF, Section 126A), Wikipedia: Exit poll, Election Commission of India

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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