CJP Protest: मुंबई के शिवाजी पार्क में शक्ति प्रदर्शन के बाद दिल्ली कूच की चेतावनी
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में CJP समर्थकों ने चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। पुलिस की औपचारिक अनुमति न मिलने के बावजूद कार्यक्रम स्थल पर भारी संख्या में युवाओं और प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटी। प्रदर्शन के दौरान चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और मतदाता सूची में व्यापक पैमाने पर किए गए बदलावों को लेकर जमकर नारेबाजी की गई और शीर्ष चुनावी नेतृत्व पर सवाल दागे गए।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि चुनावी शुचिता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग के प्रमुख पद से इस्तीफा नहीं दिया जाता है, तो इस आंदोलन का विस्तार राजधानी दिल्ली तक किया जाएगा। दिपके ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित दिल्ली प्रदर्शन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में आयोजित करने का दावा करते हुए देशभर के कार्यकर्ताओं से जंतर-मंतर पर जुटने का आह्वान किया।
मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर खड़े किए गंभीर सवाल
CJP द्वारा उठाए जा रहे विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची संशोधन और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया है। संगठन का आरोप है कि इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान बिना किसी ठोस आधार या पूर्व सूचना के बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से विलोपित कर दिए गए। संगठन ने मांग की है कि आयोग हटाए गए नामों से संबंधित समस्त डेटा, कारण और प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे ताकि चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता बनी रहे।
इसके अतिरिक्त CJP ने मांग उठाई है कि मतदाता सूची में सामने आई कथित विसंगतियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही संपूर्ण चुनावी डिजिटल व दस्तावेजी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े वर्ष 2023 के कानून में आवश्यक सुधार किए जाने की मांग भी रखी गई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये दावे पूरी तरह एक संगठन विशेष के आरोप हैं और इन्हें तब तक तथ्य नहीं माना जा सकता जब तक कि कोई न्यायिक या स्वतंत्र प्राधिकरण इसकी आधिकारिक पुष्टि न कर दे।
आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष और सरकार का स्पष्टीकरण
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार ने मतदाता सूची से जानबूझकर नाम काटे जाने या किसी राजनीतिक दल को अनुचित लाभ पहुंचाने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की पूरी कवायद केवल फर्जी, डुप्लीकेट, मृत और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के उद्देश्य से की गई है, जो कि एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग ने यह भी रेखांकित किया है कि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे, इसके लिए सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत नए पात्र मतदाताओं और तकनीकी कारणों से छूटे नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान निरंतर चलाए जा रहे हैं। निर्वाचन तंत्र का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों और कानूनी नियमों के तहत पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है।
CJP Protest: 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां
गौरतलब है कि इससे पहले भी सितंबर माह के दौरान CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी मांग को लेकर प्रदर्शन किया था और तब ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ने के लिए अल्टीमेटम दिया गया था। अब 10 अक्टूबर को घोषित दूसरे चरण के प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर है। राजधानी में किसी भी बड़े राजनीतिक या नागरिक जमावड़े के लिए सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
प्रशासनिक अनुमति और प्रस्तावित स्थल की सुरक्षा पाबंदियों को देखते हुए यह देखना अहम होगा कि पुलिस इस प्रदर्शन को किस हद तक मंजूरी देती है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़ का आकार और चुनाव आयोग का इस पर आधिकारिक दृष्टिकोण आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक विमर्श की दिशा तय करेगा।