भारत रत्न देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। यह किसी भी क्षेत्र में असाधारण और सबसे ऊंचे दर्जे की सेवा या उपलब्धि के लिए दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1954 में हुई और तब से अब तक वैज्ञानिकों, नेताओं, कलाकारों, समाज सुधारकों, खिलाड़ियों और कृषि वैज्ञानिकों समेत कई क्षेत्रों के लोगों को यह सम्मान मिला है। इस लेख में जानिए भारत रत्न का इतिहास, नियम, पदक का डिजाइन, विजेताओं को मिलने वाली सुविधाएं और इससे जुड़े कुछ चर्चित प्रसंग।
कब शुरू हुआ भारत रत्न
भारत रत्न की स्थापना 2 जनवरी 1954 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की। उसी दिन पद्म विभूषण की भी शुरुआत हुई, जिसे बाद में पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री में बांटा गया। पहले साल भारत रत्न तीन लोगों को दिया गया: स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी, दार्शनिक और तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक वैज्ञानिक सीवी रमन।

किसे मिल सकता है
शुरुआत में यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र तक सीमित था। दिसंबर 2011 में नियम बदलकर इसे मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया। इसी बदलाव के बाद 2014 में सचिन तेंदुलकर इसे पाने वाले पहले खिलाड़ी बने। वे सबसे कम उम्र में भारत रत्न पाने वाले व्यक्ति भी हैं। जाति, पेशा, पद या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। यह सम्मान मरणोपरांत भी दिया जा सकता है। शुरू में मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, जो 1955 में जोड़ा गया। लाल बहादुर शास्त्री 1966 में मरणोपरांत भारत रत्न पाने वाले पहले व्यक्ति बने।
चयन कैसे होता है
भारत रत्न के लिए पद्म पुरस्कारों की तरह कोई औपचारिक नामांकन प्रक्रिया या समिति नहीं है। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को नाम की सिफारिश करते हैं और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद घोषणा होती है। आम तौर पर एक साल में अधिकतम तीन लोगों को यह सम्मान दिया जाता है, लेकिन यह सख्त सीमा नहीं है। 2024 में पांच लोगों को भारत रत्न देने की घोषणा हुई। हर साल यह सम्मान देना जरूरी भी नहीं है, कई साल ऐसे रहे जब किसी को भारत रत्न नहीं मिला।
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पदक का डिजाइन
भारत रत्न का पदक पीपल के पत्ते के आकार का होता है और कांसे से बना होता है। इसके आगे की ओर सूर्य की आकृति और उसके नीचे देवनागरी में भारत रत्न लिखा होता है। पीछे की ओर अशोक स्तंभ का राष्ट्रीय चिह्न और सत्यमेव जयते लिखा रहता है। पदक को सफेद रिबन के साथ गले में पहनाया जाता है। विजेता को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाली सनद यानी प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। इस सम्मान के साथ कोई नकद राशि नहीं मिलती।
उपाधि नहीं है भारत रत्न
संविधान का अनुच्छेद 18 सेना और शिक्षा से जुड़ी उपाधियों को छोड़कर किसी भी उपाधि पर रोक लगाता है। इसलिए भारत रत्न को नाम के आगे या पीछे उपाधि की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने बालाजी राघवन मामले में कहा कि भारत रत्न और पद्म पुरस्कार उपाधि नहीं हैं, इसलिए ये संविधान के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इन्हें नाम के साथ जोड़ना गलत है। अदालत ने यह भी कहा कि इन सम्मानों की संख्या सीमित और गरिमा के अनुरूप रहनी चाहिए।
सम्मान पर रोक का दौर
1977 में जनता पार्टी की सरकार ने भारत रत्न और पद्म पुरस्कार देना बंद कर दिया था। 1980 में इन्हें फिर से शुरू किया गया। 1992 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा हुई, लेकिन उनके निधन को लेकर विवाद और परिवार की आपत्ति के बाद मामला अदालत पहुंचा और यह घोषणा वापस ले ली गई।
विदेशी नागरिकों को भी सम्मान
भारत रत्न भारत के नागरिक के अलावा दूसरे देशों के नागरिकों को भी दिया गया है। 1987 में खान अब्दुल गफ्फार खान और 1990 में नेल्सन मंडेला को यह सम्मान मिला। मदर टेरेसा को 1980 में भारत रत्न मिला, जो जन्म से भारतीय नहीं थीं लेकिन बाद में भारत की नागरिक बनीं।
2024 के विजेता
2024 में पांच लोगों को भारत रत्न देने की घोषणा हुई: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और हरित क्रांति के वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन। इनमें आडवाणी को छोड़कर बाकी सभी को मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया। इसके साथ ही अब तक भारत रत्न पाने वालों की संख्या 53 हो गई।
विजेताओं को मिलने वाली सुविधाएं
भारत रत्न विजेताओं को सरकारी कार्यक्रमों की वरीयता सूची में खास स्थान मिलता है। कई राज्य सरकारें उन्हें यात्रा और दूसरी सुविधाएं भी देती हैं। लेकिन यह सम्मान किसी तरह के वित्तीय लाभ या पद से नहीं जुड़ा है, इसकी असली कीमत देश की ओर से मिली मान्यता है।
भारत रत्न की शुरुआत कब हुई
2 जनवरी 1954 को।
पहला भारत रत्न किसे मिला
सी राजगोपालाचारी, सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सीवी रमन को, 1954 में।
भारत रत्न पाने वाले पहले खिलाड़ी कौन हैं
सचिन तेंदुलकर, 2014 में।
क्या भारत रत्न के साथ पैसा मिलता है
नहीं, इसके साथ कोई नकद राशि नहीं मिलती।
स्रोत: Ministry of Home Affairs: Bharat Ratna, Padma Awards Portal, PIB





