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आशा पारेख: बेबी आशा से हिट गर्ल तक, तीसरी मंजिल और कटी पतंग, CBFC की पहली महिला अध्यक्ष और फाल्के सम्मान

हिंदी सिनेमा की हिट गर्ल आशा पारेख के सफर की पूरी कहानी, बाल कलाकार से फाल्के सम्मान तक।

पुराने सिनेमा हॉल और फिल्म रील का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की बात हो और आशा पारेख का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है।
  • सोलह साल की उम्र में उन्होंने फिर अभिनय की कोशिश की। विकिपीडिया के अनुसार विजय भट्ट की फिल्म गूंज उठी शहनाई के लिए उन्हें यह कहकर नहीं चुना गया कि वे स्टार मटीरियल नहीं हैं।
  • शक्ति सामंत की फिल्म कटी पतंग में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और विकिपीडिया के अनुसार इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला।
  • आशा पारेख की आत्मकथा द हिट गर्ल 2017 में प्रकाशित हुई। इसमें उन्होंने अपने बचपन, फिल्मी सफर, CBFC के अनुभव और निजी जीवन के बारे में खुलकर लिखा है।

हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की बात हो और आशा पारेख का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। 1960 और 1970 के दशक में उनकी लगातार सफल फिल्मों के कारण उन्हें हिट गर्ल कहा गया। बाद में उनकी आत्मकथा का नाम भी द हिट गर्ल रखा गया। इस लेख में जानिए आशा पारेख का जीवन, फिल्मी सफर और उनकी उपलब्धियां।

शुरुआती जीवन

विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार आशा पारेख का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई के सांताक्रूज में हुआ। उनकी मां सुधा पारेख और पिता बच्चूभाई पारेख थे। उनकी मां स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी थीं। बचपन में आशा डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन नृत्य में उनकी गहरी रुचि थी और उन्होंने कथक की तालीम ली।

मुख्य बातें: पुराने सिनेमा हॉल और फिल्म रील का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

बाल कलाकार के रूप में शुरुआत

एक नृत्य कार्यक्रम में निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें देखा और 1952 की फिल्म मां में बाल कलाकार के रूप में मौका दिया। उस समय वे बेबी आशा पारेख के नाम से पर्दे पर आईं। इसके बाद उन्होंने आसमान, बाप बेटी और कुछ दूसरी फिल्मों में काम किया। बाप बेटी के सफल न होने पर उन्होंने कुछ समय के लिए अभिनय छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान दिया।

दिल देके देखो से नई शुरुआत

सोलह साल की उम्र में उन्होंने फिर अभिनय की कोशिश की। विकिपीडिया के अनुसार विजय भट्ट की फिल्म गूंज उठी शहनाई के लिए उन्हें यह कहकर नहीं चुना गया कि वे स्टार मटीरियल नहीं हैं। इसके कुछ ही दिनों बाद निर्देशक नासिर हुसैन ने उन्हें शम्मी कपूर के साथ दिल देके देखो (1959) में नायिका के रूप में लिया। यह फिल्म सफल रही और यहीं से नासिर हुसैन के साथ उनकी लंबी साझेदारी शुरू हुई।

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नासिर हुसैन के साथ फिल्में

नासिर हुसैन के साथ आशा पारेख ने कई सफल फिल्में कीं, जिनमें ये शामिल हैं:

  • जब प्यार किसी से होता है (1961)
  • फिर वही दिल लाया हूं (1963)
  • तीसरी मंजिल (1966)
  • बहारों के सपने (1967)
  • प्यार का मौसम (1969)
  • कारवां (1971)

1960 के दशक की सफलता

इस दौर में जिद्दी (1964), मेरे सनम (1965), लव इन टोक्यो (1966), आए दिन बहार के (1966) और उपकार (1967) जैसी फिल्में भी सफल रहीं। राज खोसला की फिल्म दो बदन (1966) को उनके करियर का अहम मोड़ माना जाता है। विकिपीडिया के अनुसार एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि दो बदन से पहले उन्हें ग्लैमर गर्ल माना जाता था, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें गंभीर अभिनेत्री के रूप में पहचान दी।

कटी पतंग और फिल्मफेयर

शक्ति सामंत की फिल्म कटी पतंग में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और विकिपीडिया के अनुसार इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला। शक्ति सामंत के साथ उन्होंने पगला कहीं का में भी काम किया। 1971 में मेरा गांव मेरा देश, आन मिलो सजना और कारवां जैसी फिल्में आईं। उन्होंने गुजराती, पंजाबी और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया।

टीवी और निर्देशन

फिल्मों के बाद आशा पारेख ने टीवी की ओर रुख किया। उन्होंने गुजराती धारावाहिक ज्योति का निर्देशन किया। उनकी प्रोडक्शन कंपनी आकृति ने पलाश के फूल, बाजे पायल, कोरा कागज और दाल में काला जैसे धारावाहिक बनाए।

CBFC की पहली महिला अध्यक्ष

विकिपीडिया के अनुसार 1998 से 2001 तक आशा पारेख केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC की अध्यक्ष रहीं। वे इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं। अपने कार्यकाल में उन्हें कई फिल्मों के प्रमाणन से जुड़ी बहसों का सामना करना पड़ा। 1994 से 2000 तक वे सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी CINTAA की अध्यक्ष भी रहीं।

सम्मान

  • पद्मश्री: 1992
  • फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार: 2002
  • दादा साहेब फाल्के पुरस्कार: 2020

आत्मकथा द हिट गर्ल

आशा पारेख की आत्मकथा द हिट गर्ल 2017 में प्रकाशित हुई। इसमें उन्होंने अपने बचपन, फिल्मी सफर, CBFC के अनुभव और निजी जीवन के बारे में खुलकर लिखा है।

विरासत

आशा पारेख ने 85 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मों के गाने आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। नृत्य, अभिनय और सामाजिक कामों के जरिए उन्होंने फिल्म जगत में एक खास जगह बनाई। कलाकारों की मदद के लिए बने सिने आर्टिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट से भी वे जुड़ी रहीं।

सामाजिक काम

विकिपीडिया के अनुसार 1991 में आशा पारेख ने दिलीप कुमार, सुनील दत्त, मिथुन चक्रवर्ती और अमजद खान के साथ मिलकर सिने आर्टिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट बनाया। इसका मकसद जरूरतमंद कलाकारों को आर्थिक और चिकित्सा मदद देना था।

आशा पारेख का जन्म कब हुआ

2 अक्टूबर 1942 को मुंबई में।

आशा पारेख को फिल्मफेयर पुरस्कार किस फिल्म के लिए मिला

कटी पतंग के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री।

आशा पारेख को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार कब मिला

2020 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार।

आशा पारेख की आत्मकथा का नाम क्या है

द हिट गर्ल।

स्रोत: Wikipedia: Asha Parekh, Wikipedia: Kati Patang, Wikipedia: Dil Deke Dekho

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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