Aaj Ka Mausam 7 September 2026: देश भर में सितंबर के पहले पखवाड़े में मानसूनी हवाएं और चक्रवाती दबाव अलग-अलग राज्यों में मौसम के विविध रंग दिखा रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार सोमवार, 7 सितंबर 2026 को देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां पूरी मजबूती के साथ सक्रिय रहेंगी। विशेष रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जबकि बिहार में 7 से 11 सितंबर के बीच बारिश का एक नया और सघन दौर शुरू होने का अनुमान है।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर के इलाकों में मूसलाधार बारिश के दौर में आंशिक ठहराव आने की संभावना है, हालांकि बादलों की आवाजाही और स्थानीय बौछारों की संभावना बनी रहेगी। उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में छिटपुट बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे उमस से राहत तो मिलेगी, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।
Aaj Ka Mausam 7 September 2026: क्या थमेगा जलभराव का संकट?
राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सितंबर के पहले सप्ताह में हुई झमाझम बारिश ने जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई थी, वहीं शहर की सड़कों पर भारी जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या भी खड़ी कर दी थी। पिछले दिनों इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खराब दृश्यता और मौसम के कारण उड़ानों के संचालन में भी विलंब देखा गया था।
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा तो रहेगा, किंतु व्यापक या लगातार तेज बारिश की संभावना सीमित है। दिन के समय आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ चुनिंदा इलाकों में स्थानीय संवहनीय बादलों (Convective Clouds) के कारण हल्की से मध्यम दर्जे की फुहारें पड़ सकती हैं। तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है, जिससे दिन के समय हल्की उमस महसूस हो सकती है।
उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल और मध्य यूपी में बारिश का दौर जारी, आकाशीय बिजली को लेकर अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मानसून की ट्रफ लाइन और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण का असर अभी समाप्त नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों के लिए बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी रखी है। प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश होने से नदियों के किनारे और तराई वाले अंचलों में सतर्कता बरती जा रही है।
लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर संभाग के जिलों में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश के एक-दो स्पेल दर्ज किए जा सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने खुले खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों को आकाशीय बिजली (वज्रपात) के प्रति सतर्क रहने की हिदायत दी है।
बिहार में 7 से 11 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट: नदियों के जलस्तर पर नजर
बिहार के लिए 7 सितंबर का दिन मौसमी दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। बंगाल की खाड़ी से आ रही आर्द्र पुरवैया हवाओं के मजबूत होने के कारण राज्य में 7 से 11 सितंबर के बीच मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।
पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और पूर्वी-पश्चिमी चंपारण सहित कई जनपदों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। चूंकि राज्य के कई तराई और दियारा इलाके पहले से ही बाढ़ और जलभराव की मार झेल रहे हैं, ऐसे में लगातार होने वाली यह नई बारिश गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में अतिरिक्त वृद्धि कर सकती है। स्थानीय जिला प्रशासन को निचले इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था मुस्तैद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश: पश्चिमी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना
मध्य भारत में मानसून का सबसे आक्रामक रूप मध्य प्रदेश में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 6 और 7 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट प्रभावी है। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 8 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां निरंतर बनी रहेंगी।
उज्जैन, इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों में बने निम्न दबाव के तंत्र के चलते तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा हो सकती है। लगातार बारिश से मालवा और निमाड़ अंचल के नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं। प्रशासन ने जलभराव वाले रपटों और पुलियाओं पर वाहन न उतारने तथा स्थानीय बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में तटीय ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
उत्तराखंड और पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा: यात्रियों के लिए एडवाइजरी
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में 6 और 7 सितंबर को मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा की तीव्रता मैदानी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक साबित होती है, क्योंकि इससे मिट्टी की पकड़ ढीली हो जाती है।
देहरादून, नैनीताल, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर बोल्डर गिरने और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। चारधाम यात्रा या पर्यटन के उद्देश्य से पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन करने वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग के रियल-टाइम अपडेट्स देखकर ही यात्रा का निर्णय लें तथा नदी-नालों के बहाव क्षेत्र के निकट न जाएं।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: उप-हिमालयी बंगाल और सिक्किम में 11 सितंबर तक सक्रियता
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी तंत्र पूरी तरह अनुकूल बना हुआ है। आईएमडी के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 11 सितंबर तक व्यापक वर्षा का दौर जारी रहेगा।
इसके अतिरिक्त अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास भी समुद्री हलचल और मानसूनी हवाओं के प्रभाव से भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। छत्तीसगढ़ में भी 8 से 11 सितंबर के दौरान बारिश का दायरा बढ़ने का पूर्वानुमान है, जिसकी प्रारंभिक हलचल 7 सितंबर की शाम से ही दक्षिणी और मध्य हिस्सों में दिखने लगेगी।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान: कैसा रहेगा उत्तर-पश्चिम भारत का मिजाज?
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पिछले कुछ दिनों के दौरान हुई सक्रिय मानसूनी बारिश के बाद अब मौसम में धीरे-धीरे स्थिरता आने के संकेत हैं। 7 सितंबर को पंजाब और हरियाणा के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क या आंशिक बादलों के बीच हल्की फुहारों तक सीमित रहने की उम्मीद है।
राजस्थान के विशाल भूभाग में क्षेत्रीय भिन्नता देखने को मिलेगी। पूर्वी राजस्थान के कोटा, उदयपुर और भरतपुर संभागों में स्थानीय बादलों के चलते हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज हो सकती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती मरुस्थलीय जिलों में तेज धूप और शुष्क मौसम का प्रभाव रहेगा, जिससे दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
Aaj Ka Mausam 7 September 2026: सितंबर में सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान और किसानों के लिए सुझाव
देशभर के मौसमी आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष अगस्त माह में दीर्घावधि औसत के मुकाबले लगभग 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। मौसम विभाग के अनुसार पूरे सितंबर महीने में भी कुल मानसूनी वर्षा सामान्य से नीचे रहने की संभावना जताई गई है, हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर पश्चिमी मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में तेज बारिश के स्पेल देखने को मिल रहे हैं।
यह स्थिति खरीफ फसलों—जैसे धान, सोयाबीन, मक्का और दलहन—के लिए दोहरी चुनौती प्रस्तुत करती है। जहां कम बारिश वाले इलाकों में मिट्टी की नमी तेजी से घट रही है, वहीं अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों में पानी भर जाने से फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को परामर्श दिया गया है कि वे खेतों में जलनिकासी के पुख्ता प्रबंध रखें और कीटनाशकों अथवा उर्वरकों का छिड़काव मौसम पूरी तरह साफ होने के बाद ही करें।
Read more here



