Aaj Ka Mausam 6 September 2026: देश भर में सितंबर के पहले सप्ताह के अंत तक मानसूनी चक्रवात और मौसमी हवाओं का मिला-जुला प्रभाव देखने को मिल रहा है। रविवार, 6 सितंबर 2026 को भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार उत्तर प्रदेश देश का सबसे संवेदनशील राज्य बना हुआ है। मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों ही उप-मंडलों के लिए मूसलाधार बारिश का भारी अलर्ट जारी किया है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में पिछले दिनों के मुकाबले बारिश की तीव्रता में स्पष्ट कमी आने के संकेत दिए गए हैं।
देश के अन्य हिस्सों की बात करें तो मध्य प्रदेश में बने निम्न दबाव के क्षेत्र का असर धीरे-धीरे दिशा बदल रहा है, जबकि बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ अंचलों में गरज-चमक के साथ मानसूनी फुहारें सक्रिय रहने का अनुमान है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में संवेदनशील ढलानों पर भूस्खलन के खतरे को देखते हुए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

Aaj Ka Mausam 6 September 2026: उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के सब-डिविजनल वार्निंग बुलेटिन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के दोनों छोरों—पूर्वी और पश्चिमी यूपी—में 6 सितंबर को मौसम काफी उग्र रह सकता है। मानसूनी ट्रफ के राज्य के ऊपर से गुजरने और चक्रवाती दबाव के बने रहने से बादलों की घनी जमावट होगी। कई जिलों में आकाशीय बिजली चमकने, बादलों की तेज गर्जना और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने की प्रबल आशंका है।
राजधानी लखनऊ में मौसम विभाग के आंचलिक केंद्र के अनुसार रविवार को दिनभर आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे। शहर में रुक-रुक कर दो से तीन दौर की मध्यम से भारी बारिश अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। लखनऊ का अधिकतम तापमान लगभग 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज होने का अनुमान है, जिससे उमस से राहत तो मिलेगी किंतु सड़कों पर आवागमन प्रभावित हो सकता है।

Aaj Ka Mausam 6 September 2026: दिल्ली-एनसीआर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सितंबर के पहले पांच दिनों तक लगातार बादलों का डेरा और रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला बना हुआ था। हालांकि, 6 सितंबर से मानसूनी तंत्र के थोड़ा कमजोर होने का पूर्वानुमान है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार राजधानी में लगातार मूसलाधार बारिश की संभावना अब कम है।
इसके बावजूद दिल्ली-एनसीआर में पूरी तरह मौसम शुष्क रहने के आसार नहीं हैं। दिन के समय स्थानीय संवहनीय बादलों के निर्माण के कारण कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या मध्यम बौछारें पड़ सकती हैं। रविवार का अवकाश होने के कारण जो लोग इंडिया गेट, कर्तव्य पथ या अन्य पर्यटन स्थलों पर जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अचानक छाने वाले बादलों और छिटपुट बारिश को ध्यान में रखकर ही घर से निकलना चाहिए।

Aaj Ka Mausam 6 September 2026: बिहार और झारखंड

बिहार और झारखंड में 6 सितंबर को मानसून की सामान्य सक्रियता बनी रहेगी। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम पुरवैया हवाओं के प्रभाव से पटना, भागलपुर, गया, मुजफ्फरपुर, रांची और जमशेदपुर सहित कई जनपदों में आंशिक से लेकर घने बादल छाए रहेंगे। कुछ स्थानों पर मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की जा सकती है।
हालांकि, राज्य के सभी जिलों में एक समान बारिश नहीं होगी। जहां बारिश होगी वहां पारे में गिरावट से गर्मी से राहत मिलेगी, किंतु जिन इलाकों में केवल बादल छाकर निकल जाएंगे वहां उच्च आर्द्रता (Humidity) के चलते भारी उमस लोगों को परेशान कर सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को खेतों में जलनिकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है।

Aaj Ka Mausam 6 September 2026: मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के दौरान उत्तर-पूर्वी हिस्से में बने ‘वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया’ ने जमकर बारिश कराई थी। रीवा, सतना, जबलपुर और पन्ना संभाग में कई नदियां और नाले उफान पर आ गए थे। 6 सितंबर तक आते-आते यह मौसमी तंत्र कमजोर होकर आगे खिसक रहा है।
इसके परिणामस्वरूप रविवार को पूरे मध्य प्रदेश में बारिश की तीव्रता पहले जैसी विकराल नहीं रहेगी, फिर भी सिस्टम के अवशिष्ट प्रभाव के चलते उत्तरी और पूर्वी मध्य प्रदेश के चुनिंदा इलाकों में भारी बौछारों का एक-दो दौर देखने को मिल सकता है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों—इंदौर और उज्जैन संभाग में मौसम अपेक्षाकृत शांत और बूंदाबांदी तक सीमित रहने का अनुमान है।

Aaj Ka Mausam 6 September 2026: उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन को लेकर सतर्कता

उत्तर भारत के हिमालयी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बारिश हमेशा अपने साथ अतिरिक्त जोखिम लेकर आती है। मौसम विभाग ने 6 सितंबर को भी इन पहाड़ी क्षेत्रों के कुछ संवेदनशील हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की चेतावनी दी है।
पहाड़ी सड़कों पर सफर करने वाले यात्रियों, पर्यटकों और चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। अत्यधिक बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर अचानक बोल्डर गिरने, सड़कें धंसने और पहाड़ी नदियों के जलस्तर में अचानक उछाल आने की घटनाएं हो सकती हैं। स्थानीय जिला प्रशासन के आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों और वेदर बुलेटिन की पुष्टि करने के बाद ही दुर्गम घाटियों की ओर प्रस्थान करना सुरक्षित रहेगा।

Aaj Ka Mausam 6 September 2026: ओडिशा, छत्तीसगढ़ और दक्षिण भारत

पूर्वी तटीय राज्य ओडिशा और उससे सटे छत्तीसगढ़ में सितंबर के पहले सप्ताह में बारिश की अच्छी गतिविधियां देखने को मिली हैं। 6 सितंबर को भी दोनों राज्यों के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम दर्जे की मानसूनी बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं, जिससे कृषि कार्यों को आवश्यक जल मिल सकेगा।
दूसरी ओर, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत—विशेष रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के अंदरूनी अंचलों में मानसून की गतिविधियां काफी हद तक शांत (Subdued) रहने वाली हैं। आईएमडी के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार दक्षिण भारत में अगले कुछ दिनों तक व्यापक या मूसलाधार बारिश का कोई बड़ा तंत्र सक्रिय नहीं है, यद्यपि तटीय रेखाओं पर स्थानीय बादलों से नाममात्र की फुहारें पड़ सकती हैं।

Aaj Ka Mausam 6 September 2026: एल नीनो का प्रभाव और सितंबर के लिए किसानों की चिंताएं

देश के कृषि परिदृश्य के लिए सितंबर 2026 का मौसम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश भर में दीर्घावधि औसत के मुकाबले 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो प्रभाव के कारण पूरे सितंबर महीने में भी देशभर में कुल बारिश सामान्य से नीचे रहने का आकलन व्यक्त किया गया है।
यह स्थिति देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए चुनौतीपूर्ण है। इस समय खरीफ की मुख्य फसलें जैसे धान, सोयाबीन, मक्का और कपास दाना बनने या पकने के महत्वपूर्ण दौर में हैं। जहां बहुत कम बारिश मिट्टी की नमी को सोख लेगी, वहीं यूपी जैसे राज्यों में कम समय में अत्यधिक बारिश से खेतों में जलभराव की समस्या फसलों की जड़ों को गला सकती है। किसानों को मौसम के स्थानीय पूर्वानुमान को देखकर ही उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव करने का परामर्श दिया गया है।

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