Mount Abu History: रेगिस्तान और तपती गर्मी के लिए मशहूर राजस्थान में एक ऐसी भी जगह मौजूद है, जहां पहुंचते ही हरियाली, ठंडी हवा और पहाड़ों का नजारा मन मोह लेता है। यह जगह है माउंट आबू, जिसे राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन होने का गौरव प्राप्त है। अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच समुद्र तल से करीब 1722 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह स्थान अपनी ठंडी जलवायु के चलते राजस्थान का मिनी कश्मीर भी कहलाता है। हालांकि माउंट आबू सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन और पौराणिक इतिहास के लिए भी बेहद खास माना जाता है। ऋषि वशिष्ठ, भगवान शिव और नाग अरभुद से जुड़ी मान्यताएं इस जगह को और भी रहस्यमयी और दिलचस्प बना देती हैं।
Mount Abu History: अरावली की गोद में बसा है यह हिल स्टेशन
माउंट आबू राजस्थान का इकलौता ऐसा हिल स्टेशन है, जो अरावली पर्वत श्रृंखला के बीचोंबीच स्थित है और समुद्र तल से लगभग 1722 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यहां चारों तरफ फैली हरियाली, घने जंगल, खूबसूरत झीलें और झरने इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता को बयां करते हैं। इसके अलावा यहां पुराने देसी घरों के साथ-साथ ब्रिटिश स्टाइल के बंगले भी देखने को मिलते हैं, जो इस हिल स्टेशन की विरासत को दर्शाते हैं।
पुराणों के दौर से जुड़ा है माउंट आबू का नाम
राजस्थान टूरिज्म की जानकारी के अनुसार माउंट आबू का इतिहास पुराणों के समय जितना पुराना माना जाता है। उस दौर में इस जगह को ‘अर्बुदारण्य’ के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ होता है अर्बुद का जंगल। ऐसा बताया जाता है कि ऋषि विश्वामित्र के साथ हुए विवाद के बाद ऋषि वशिष्ठ ने कुछ समय के लिए इसी स्थान पर विश्राम किया था, जिसके चलते यह जगह पौराणिक महत्व रखती है।
नाग अरभुद की कथा से मिला माउंट आबू नाम
इस हिल स्टेशन के नामकरण को लेकर एक बेहद दिलचस्प कथा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार अरभुद नामक एक सांप ने इसी स्थान पर भगवान शिव के वाहन नंदी की जान बचाई थी, जिसके सम्मान में इस जगह का नाम अरभुद रखा गया। समय बीतने के साथ ‘अरभुद’ शब्द धीरे-धीरे छोटा होता गया और अंततः ‘आबू’ के रूप में प्रचलित हो गया, जो आज माउंट आबू के नाम से मशहूर है।
ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ की पौराणिक कथा
माउंट आबू से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण मान्यता ऋषि वशिष्ठ के यज्ञ से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने इन्हीं पहाड़ों की चोटी पर एक विशेष यज्ञ किया था, जिसका उद्देश्य धरती पर धर्म की रक्षा के लिए देवताओं से सहायता मांगना था। मान्यता है कि उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और यज्ञ की अग्नि से एक युवक प्रकट हुआ, जिसे अग्निवंश के राजपूतों का प्रथम पुरुष माना जाता है।
Mount Abu History: घूमने और पहुंचने के लिए क्यों है खास जगह
इतिहास के अलावा माउंट आबू अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है, जहां नक्की लेक, गुरु शिखर, टोड रॉक और दिलवारा जैन मंदिर जैसी जगहें प्रमुख आकर्षण हैं। यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर का महाराणा प्रताप एयरपोर्ट है, जबकि सड़क मार्ग से दिल्ली, अजमेर और बूंदी से सीधा नेशनल हाइवे जुड़ा हुआ है। इसके अलावा आबू रोड रेलवे स्टेशन शहर से महज 28 किलोमीटर दूर स्थित है, जो प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
राजस्थान का यह मिनी कश्मीर सिर्फ अपनी ठंडी जलवायु और हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी पर्यटकों के बीच खास जगह रखता है। ऋषि वशिष्ठ और नाग अरभुद से जुड़ी कथाएं इस स्थान को एक अलग ही रहस्यमयी पहचान देती हैं। अगर आप भी प्रकृति और इतिहास दोनों का आनंद लेना चाहते हैं, तो माउंट आबू की यात्रा आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है।
Read More Here:-
Quote of the Day: सुख के साथी सब हैं, मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहे वही सच्चा अपना



