Bihar News: नेपाल में तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ का असर अब सीधे बिहार के लोगों की थाली तक पहुंच गया है। गंडक समेत कई नदियों में भारी मात्रा में पानी भरने के साथ-साथ नदी के रास्ते बड़ी-बड़ी और अनजान मछलियां भी बिहार के जिलों में पहुंच गई हैं। इन मछलियों को पकड़कर कई मछुआरों ने अच्छी कमाई भी कर ली, लेकिन अब बिहार सरकार ने इन्हें खाने से साफ मना कर दिया है। आखिर इन मछलियों में ऐसा क्या खतरा छिपा है, जिसकी वजह से सरकार को एडवाइजरी जारी करनी पड़ी?

गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली, चंपारण और सारण जैसे जिलों में बाढ़ की आशंका से निचले इलाकों के लोग पहले ही सहमे हुए थे, और अब इन असामान्य मछलियों ने चिंता को एक नया मोड़ दे दिया है।

Bihar News: वाल्मीकिनगर में मिली 80 किलो की विशालकाय मछली

सोशल मीडिया पर वाल्मीकिनगर इलाके से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया, जिसमें बताया गया कि वहां 80 किलो से भी ज्यादा वजन की एक विशालकाय मछली मिली है। स्थानीय मछुआरों का कहना है कि उन्होंने रातभर मेहनत करने के बाद इस मछली को पकड़ा। गंडक नदी से इस तरह की कई अनजान और भारी-भरकम मछलियां मछुआरों के जाल में फंसी हैं, जिससे इलाके में इनकी खूब चर्चा हो रही है। मगर इसी बीच बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने सोमवार को एक अहम एडवाइजरी जारी करके लोगों को आगाह कर दिया।

विभाग ने क्यों जारी की चेतावनी

मत्स्य विभाग के मुताबिक नेपाल से आ रहे बाढ़ के पानी के साथ बिहार के अलग-अलग जिलों में अज्ञात और असामान्य प्रकार की मछलियां पहुंचने की सूचना लगातार मिल रही है। विभाग ने यह भी बताया कि ऐसी मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार पड़ने की खबरें भी सामने आई हैं। यही वजह है कि विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि इन मछलियों का सेवन बिल्कुल न करें और आसपास के लोगों को भी इस बारे में सतर्क करें।

गंदे पानी के संपर्क में आने से बढ़ा खतरा

यहीं पर वह अप्रत्याशित तथ्य सामने आता है, जो इस पूरी चेतावनी को और गंभीर बना देता है। एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि बाढ़ के दौरान ये मछलियां कई तालाबों, नदियों और झीलों से निकलकर पानी के साथ दूर-दूर तक बह जाती हैं। इस दौरान ये मछलियां गंदी नालियों, मृत जानवरों और यहां तक कि लाशों के लगातार संपर्क में आती हैं, जिससे इनमें जीवाणु, विषाणु और कवक जैसे हानिकारक तत्व पनपने की आशंका बनी रहती है। यानी दिखने में भले ही ये मछलियां बड़ी और आकर्षक लगें, मगर इनका सेवन सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। विभाग ने साफ कहा है कि जब तक वातावरण स्थिर नहीं हो जाता और बीमारी फैलाने वाले कारक प्राकृतिक रूप से खत्म नहीं हो जाते, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को खाने में इस्तेमाल न करें।

सरकार ने आम लोगों से की यह अपील

मत्स्य विभाग ने जनहित में कुछ अहम सुझाव भी जारी किए हैं। किसी भी अज्ञात या असामान्य दिखने वाली मछली को खाने से पूरी तरह बचना चाहिए, और बाढ़ के पानी में पकड़ी गई मछलियों की बाजार में खरीद-बिक्री से भी दूर रहना चाहिए। बिना पहचान और संबंधित विभाग की पुष्टि के किसी भी मछली को खाने योग्य नहीं समझना चाहिए। अगर कहीं भी ऐसी कोई मछली दिखे, तो तुरंत जिले के मत्स्य पदाधिकारी या स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी देनी चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी ने ऐसी मछली खा ली है और उसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर आना या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत सरकारी अस्पताल या अपने डॉक्टर के पास जाकर जांच करानी चाहिए।

Bihar News: किन प्रजातियों की मछलियां आई हैं बहकर

विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल से बाढ़ में बहकर आई मछलियों में गोनच या गूंज कैटफिश, बघार, ग्रास कार्प, बराली यानी वाल्लागो और रोहू जैसी प्रजातियां शामिल बताई जा रही हैं। इन प्रजातियों में से कुछ मछलियां सामान्य दिनों में भी नदियों में पाई जाती हैं, मगर बाढ़ के दौरान इनके दूषित पानी के संपर्क में आने से इनका सेवन खतरनाक हो सकता है। मत्स्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि इस मामले में किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और अज्ञात मछलियों से दूरी बनाए रखें।

आम लोगों के लिहाज से देखा जाए तो यह मामला सीधे तौर पर हर उस परिवार से जुड़ा है, जो नदी किनारे रहता है या मछली को अपने खान-पान का हिस्सा बनाता है। मुफ्त में मिली बड़ी मछली भले ही लुभावनी लगे, मगर सेहत से जुड़ा यह खतरा किसी भी कीमत पर नजरअंदाज करने लायक नहीं है। बिहार सरकार की यह एडवाइजरी सिर्फ एक चेतावनी भर नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने की एक जरूरी पहल है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन इस निर्देश का पालन करवाने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाता है, क्योंकि बाढ़ का पानी अभी पूरी तरह उतरा नहीं है और खतरा फिलहाल टला नहीं है।

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