Guava for Cholesterol: बढ़ा कोलेस्ट्रॉल अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की शिकायत नहीं रह गया। परिवार में रिपोर्ट आने के बाद लोग फल-सूची ढूंढने लगते हैं। इंस्टाग्राम पोस्ट में न्यूट्रीशनिस्ट श्वेता पांचाल ने अमरूद का नाम लिया है। रोज कम से कम एक फल तीन महीने तक खाने की बात कही गई है ताकि स्तर प्राकृतिक तरीके से नीचे आए।

यह पेशेवर चिकित्सकीय नुस्खा नहीं। दवा चल रही हो तो फल उसकी जगह नहीं लेता। फिर भी किचन में सस्ता और आम उपलब्ध विकल्प होने से चर्चा बढ़ गई है। सवाल यही है कि फाइबर कितना कर सकता है और जांच कब जरूरी है।

Guava for Cholesterol: न्यूट्रीशनिस्ट ने क्या कहा

श्वेता पांचाल के मुताबिक अमरूद में घुलनशील रेशा होता है जो आंत में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल से बंध कर उसे बाहर निकालने में मदद करता है। रक्त में पहुंचने से पहले अवशोषण घटने का दावा इसी से जुड़ा है। एलडीएल यानी जिसे बुरा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है उस पर असर होने की बात कही गई।

पेक्टिन नाम के रेशे को लीवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया धीमी करने वाला बताया गया। यानी दो रास्ते बनना कम और निकलना ज्यादा। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने से शुगर के मरीजों के लिए भी विकल्प बताया गया। व्यक्तिगत शर्करा नियंत्रण फिर भी डॉक्टर के हाथ में रहता है। देखने पर लगता है कि एक फल पूरी लैब रिपोर्ट बदल देगा, यह उम्मीद ज्यादा बड़ी है। आदत और दवा दोनों साथ चलें तो बात बनती है।

दिल की बात कहां तक सही मानी जाए

आहार विशेषज्ञ कहती हैं विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और लाइकोपीन जैसे तत्व सूजन और धमनी में जमाव की प्रक्रिया से लड़ने में मदद कर सकते हैं। यह पोषण का सामान्य तर्क है, अमरूद खाने मात्र से पट्टिका गायब होने का प्रमाण नहीं।

हार्ट के मरीज फल खाकर एंजियोग्राफी टालने का फैसला न लें। कोलेस्ट्रॉल आंकड़ा परिवार, वजन, तेल और सैर पर भी टिका होता है। एक अमरूद तले हुए नाश्ते का हिसाब नहीं चुकता। मामला कुछ इस तरह से है कि सोशल मीडिया “नेचुरली तीन महीने” लिखता है। प्रयोगशाला तीन महीने बाद वही गोलियां मांग सकती है

खाने का समय और परहेज

सलाह है नाश्ते व लंच के बीच या शाम के नाश्ते में अमरूद खाएं। अकेले खाएं। चाय, दूध या कॉफी साथ न लें क्योंकि अवशोषण घट सकता है यह न्यूट्रीशनिस्ट का निर्देश है। बीज अधिक हों तो पेट फूल सकता है, मात्रा देखें।

कीटनाशक का डर हो तो धोकर छीलें या विश्वसनीय स्रोत से खरीदें। कच्चा बहुत सख्त हो तो पचने में भारी लगता है। एलर्जी या किडनी की पुरानी शिकायत हो तो पहले चिकित्सक से पूछें। मधुमेह हो तो भी फल गिनती में रखें, मनमानी न करें।

Guava for Cholesterol: जांच और दवा न छोड़ें

कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हो तो डॉक्टर की सलाह पहली सीढ़ी है। रक्त परीक्षण, परिवार का इतिहास और रक्तचाप साथ देखे जाते हैं। स्टैटिन या दूसरी दवा चल रही हो तो फल जोड़ने की सूचना चिकित्सक को दें। इंटरनेट पोस्ट दवाई बंद करने का आदेश नहीं।

भारतीय घरों में अमरूद मौसमी और सस्ता रहता है। यही इसकी ताकत है। महंगा सुपरफूड आयात करने से बेहतर है थाली का फल नियमित हो। फिर भी “एक फल काफी” वाली भाषा अधूरी है। तेल कम करना, चलना और वजन संभालना पुरानी सलाह अब भी खड़ी है।

जानकार चिकित्सक कहते हैं फाइबर युक्त आहार सहायक हो सकता है, इलाज की जगह नहीं। तीन महीने बाद दोबारा जांच कराए बिना सफलता न मानें। एक छोटा ट्विस्ट यह है कि लोग कोलेस्ट्रॉल सुनकर महंगा जूस खरीदते हैं। अमरूद सस्ता है इसलिए उपेक्षित रहा। सस्ता होना कमजोर होना नहीं। अतिरंजित दावा उसे फिर संदिग्ध बना देता है। संतुलन दोनों तरफ चाहिए।

श्वेता पांचाल ने रोज एक अमरूद को कोलेस्ट्रॉल संभालने वाला घरेलू विकल्प बताया है। घुलनशील फाइबर और पेक्टिन का तर्क दिया गया है। यह सामान्य जानकारी है, मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन नहीं। दवा, जांच और डॉक्टर की राय न छोड़ें। चाय-दूध के साथ न खाएं, मात्रा का ध्यान रखें। तीन महीने की गारंटी कोई फल नहीं देता। अगली रिपोर्ट प्रयोगशाला से आए तब रास्ता साफ होगा।

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