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Vande Bharat Express: दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब ब्रिज पर 100 की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत, रेलवे ने बनाया नया रिकॉर्ड

Vande Bharat Express: दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब ब्रिज पर 100 की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत, रेलवे ने बनाया नया रिकॉर्ड

सारांश

  • Vande Bharat Express: वंदे भारत एक्सप्रेस ने चिनाब ब्रिज पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल किया।
  • चिनाब ब्रिज रियासी जिले में चिनाब नदी के ऊपर बना रेलवे आर्च ब्रिज है।
  • पुल नदी तल से करीब 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
  • वंदे भारत ने अंजी खड्ड रेलवे ब्रिज को भी 100 किमी प्रति घंटे की गति से पार किया।
  • कटड़ा-बनिहाल के करीब 111 किमी लंबे रेलखंड की गति सीमा बढ़ाकर 100 किमी प्रति घंटा की गई है।
  • पहले इस सेक्शन के अलग-अलग हिस्सों में गति सीमा 75 और 85 किमी प्रति घंटा थी।
  • इस रेलखंड में कुल 33 आधुनिक सुरंगें मौजूद हैं।
  • गति सीमा बढ़ने से कटड़ा और बनिहाल के बीच यात्रा समय कम होने की उम्मीद है।
  • बेहतर रेल संपर्क से स्थानीय यात्रियों, कारोबार और पर्यटन को लाभ मिलने की संभावना है।
  • यह पूरा रेलखंड उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Vande Bharat Express: भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में दुर्गम हिमालयी वादियों के बीच ऐतिहासिक और तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र शासित प्रदेश में रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने के अभियान के तहत देश की सेमी-हाईस्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज ‘चिनाब ब्रिज’ पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़कर सफल परीक्षण पूरा किया। इसके साथ ही ट्रेन ने देश के पहले केबल-स्टेड ‘अंजी खड्ड’ रेलवे ब्रिज को भी इसी तूफानी गति से पार किया। यह परीक्षण उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है।

Vande Bharat Express: कटड़ा-बनिहाल रेलखंड पर गति सीमा में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

उत्तर रेलवे ने श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा से बनिहाल के मध्य स्थित लगभग 111 किलोमीटर लंबे चुनौतीपूर्ण रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम अनुमेय गति सीमा (मैक्सिमम परमिसिबल स्पीड) में बड़ा इजाफा किया है। पहले इस पूरे हिस्से में सुरक्षा कारणों से गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित थी, जिसे अब आधिकारिक रूप से बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया गया है। रेलवे संरक्षा आयुक्त और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में सभी सुरक्षा मानकों और ट्रैक स्थिरता की गहन जांच के बाद ही गति बढ़ाने की अंतिम मंजूरी दी गई।
इससे पहले इस रेल मार्ग पर गति सीमा को अलग-अलग चरणों में बांटा गया था। कटड़ा से संगलदान के बीच ट्रेनें अधिकतम 85 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती थीं, जबकि संगलदान से बनिहाल के बीच यह सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई थी। नए निर्णय के बाद अब पूरे 111 किलोमीटर के कटड़ा-बनिहाल खंड में वंदे भारत समेत अन्य प्रमुख ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटे की एकसमान गति से संचालित हो सकेंगी।

नदी तल से 359 मीटर ऊंचे चिनाब ब्रिज पर रफ्तार का जलवा

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी के ऊपर बना रेलवे आर्च ब्रिज इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल और हैरतअंगेज नमूना है। यह विशालकाय पुल नदी के तल से लगभग 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो पेरिस के एफिल टॉवर से भी करीब 35 मीटर ऊंचा है। भूकंपीय क्षेत्र-5 की संवेदनशील श्रेणी और तेज हवाओं के भारी दबाव वाले इस इलाके में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन का सुरक्षित गुजरना भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग क्षमता का लोहा मनवाता है।
हिमालय के इस दुर्गम भूभाग में गहरी खाइयां, तेज मोड़ और अस्थिर पहाड़ी ढलानें परिचालन के लिहाज से बेहद जटिल मानी जाती हैं। ऐसे कठिन भौगोलिक वातावरण में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों, सेंसरों और मजबूत रेल पटरियों के तालमेल से उच्च गति पर ट्रेन का संचालन न केवल तकनीकी रूप से सुरक्षित सिद्ध हुआ है, बल्कि इसने कश्मीर घाटी को बारहमासी सुरक्षित रेल मार्ग से जोड़ने के विश्वास को और सुदृढ़ किया है।

भारत के पहले केबल-स्टेड अंजी ब्रिज को भी सौ की गति से किया पार

स्पीड ट्रायल के दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस ने रियासी की गहरी खाई पर बने देश के पहले केबल-स्टेड अंजी खड्ड रेलवे ब्रिज को भी 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफलतापूर्वक पार किया। एक केंद्रीय खंभे (पाइलन) के सहारे केबलों के जाल पर टिका यह पुल वास्तुकला की दृष्टि से विश्वस्तरीय माना जाता है। चिनाब और अंजी खड्ड जैसे विशालकाय पुल इस पूरे रेलखंड को वैश्विक स्तर पर अत्यंत चुनौतीपूर्ण संरचनाओं में शामिल करते हैं।
इस 111 किलोमीटर लंबे कटड़ा-बनिहाल सेक्शन में कुल 33 आधुनिक सुरंगे भी मौजूद हैं, जो पहाड़ों को काटकर तैयार की गई हैं। यह पूरा रेल तंत्र यूएसबीआरएल महापरियोजना का अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे कश्मीर घाटी को भारतीय रेल के मुख्य नेटवर्क से हर मौसम में निर्बाध रूप से जोड़े रखने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।

यात्रियों को मिलेगा तेज, सुरक्षित और सुगम सफर का लाभ

ट्रेनों की अनुमेय गति सीमा बढ़ने से कटड़ा और बनिहाल के बीच यात्रा के समय में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। अब यात्रियों को दुर्गम पहाड़ी रास्तों, भूस्खलन और बर्फबारी के कारण लगने वाले लंबे जाम से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी। तेज गति से ट्रेन संचालन शुरू होने के बाद स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को कश्मीर घाटी और जम्मू संभाग के बीच आवागमन का सबसे सुलभ और सुरक्षित साधन उपलब्ध हो गया है।
समय की बचत के साथ-साथ यह तीव्र रेल संपर्क घाटी की स्थानीय अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से सेब व्यापार, हस्तशिल्प और पर्यटन उद्योग को नई गति प्रदान करेगा। जून 2025 में कटड़ा-श्रीनगर वंदे भारत सेवा के औपचारिक शुभारंभ के बाद से ही इस मार्ग पर गति और फेरे बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिसे इस सफल स्पीड टेस्ट ने पूरा कर दिया है।

Vande Bharat Express: कश्मीर की रेल कनेक्टिविटी में स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत

कश्मीर घाटी को देश के अन्य राज्यों से रेल नेटवर्क के जरिए सीधे जोड़ना स्वतंत्रता के बाद का सबसे महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय सपना रहा है। पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला की जटिलताओं को चीरते हुए बनाई गई विश्वस्तरीय सुरंगे, अत्याधुनिक ट्रैक और रिकॉर्ड ऊंचाई वाले पुल भारतीय इंजीनियरों की उत्कृष्ट क्षमता का प्रमाण हैं।
कटड़ा-बनिहाल रेलखंड पर गति सीमा का 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचना यह दर्शाता है कि यह ट्रैक पूरी तरह परिपक्व और सुरक्षित हो चुका है। यह विकास न केवल जम्मू-कश्मीर में सामाजिक और आर्थिक एकीकरण को मजबूती देगा, बल्कि भविष्य में इस पूरे क्षेत्र में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का मजबूत आधार भी तैयार करेगा।

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लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

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