Sugar Price Increase India: देश में चीनी के दाम तीन महीने में करीब 40 फीसदी बढ़ गए हैं। प्रति किलो 19 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। गुड़ 24 प्रतिशत, चावल 16 प्रतिशत और मक्के का आटा 11 प्रतिशत महंगा हो चुका है। रसोई के आम सामानों पर इसका सीधा असर दिख रहा है।

कीमतें काबू में रखने के लिए सरकार ने गुरुवार को टैरिफ रेट कोटा के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे दी। साथ ही थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट भी लगाई गई है। एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के ज्यादा इस्तेमाल और मिलों के कम ओपनिंग स्टॉक को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

Sugar Price Increase India: चीनी और अन्य वस्तुओं के दाम में कितनी बढ़ोतरी

चीनी का वर्तमान दाम 67 रुपये प्रति किलो है। तीन महीने पहले यह 48 रुपये था। 19 रुपये की बढ़ोतरी के साथ करीब 40 प्रतिशत महंगाई दर्ज हुई। गुड़ 50 से बढ़कर 65 रुपये पहुंच गया। चावल कनकी में चार रुपये, मक्के के आटे में चार रुपये और इडली रवा में भी चार रुपये की बढ़ोतरी हुई। पशु आहार और पोल्ट्री फीड के दाम भी ऊपर गए हैं।

सरकार का आयात और स्टॉक लिमिट वाला फैसला

सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लागू की गई है। जो लोग हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी की खपत करते हैं वे सिर्फ 15 दिन की खपत जितना स्टॉक रख सकेंगे। इस कदम से बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और सट्टेबाजी रोकने की कोशिश की जा रही है।

Sugar Price Increase India:एथेनॉल में गन्ने का इस्तेमाल बढ़ा

पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। इसमें 34 लाख टन गन्ना शामिल था। मानकों के अनुसार एथेनॉल में 67 प्रतिशत मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज लगता है। बाकी 33 प्रतिशत गन्ना और उसके उत्पाद से आता है। खराब अनाज की उपलब्धता घटने से पशु आहार 8 से 10 प्रतिशत महंगा हुआ। दूध और अंडे के दाम भी 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़े।

मिलों का ओपनिंग स्टॉक घटा

इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार 2026-27 सीजन में गन्ने का कुल उत्पादन 46.3 करोड़ टन अनुमानित है। चीनी उत्पादन 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो पिछले साल से 12 प्रतिशत ज्यादा है। 2025-26 में मिलों का ओपनिंग स्टॉक 47 लाख टन था। 2026-27 में यह घटकर 32 लाख टन रह सकता है। बड़ी वजह पिछले सीजन में 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना-शीरा का एथेनॉल में चला जाना है।

विशेषज्ञों का क्या कहना है

आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बलात्मी का कहना है कि चीनी की कमी नहीं है। मौजूदा तेजी सट्टेबाजी और पैनिक बाइंग का नतीजा है। सीजन खत्म होने तक क्लोजिंग स्टॉक 35 से 40 लाख टन रह सकता है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठाकरे ने कहा कि गन्ने का एथेनॉल में ज्यादा इस्तेमाल मुश्किलें खड़ी कर रहा है। सरकार आयात कर रही है लेकिन नवंबर से पहले दुनियाभर से पर्याप्त चीनी मिलने की संभावना कम है। निर्यात करने वाले देश भी सीमित हैं।

Sugar Price Increase India: चीनी निर्यात में भारी गिरावट

वाणिज्यिक मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2022-23 में 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और उससे बने उत्पादों का निर्यात हुआ था। 2023-24 में यह घटकर 51.35 लाख टन रह गया। 2024-25 में और कम होकर 38.43 लाख टन पर आ गया। 2026-27 में निर्यात शून्य रहने का अनुमान है क्योंकि इस बार आयात की स्थिति बन गई है।

चीनी की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी ने आम घरों के बजट पर असर डाला है। तीन महीने में 19 रुपये प्रति किलो की वृद्धि और अन्य खाद्य पदार्थों के महंगे होने से रसोई का खर्च बढ़ा है। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल और कम ओपनिंग स्टॉक को मुख्य कारण माना जा रहा है। सरकार ने आयात अनुमति और स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक कमी नहीं बल्कि बाजार की अटकलबाजी कीमतें बढ़ा रही है। सीजन आगे बढ़ने के साथ उपलब्धता सुधरने की उम्मीद है लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं को महंगे दामों का सामना करना पड़ रहा है।

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