Punjab Election 2027: शनिवार को 7 लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा भाजपा के 48 विधायकों की बैठक हुई। एजेंडे में सोशल मीडिया का इस्तेमाल, ऑर्गेनिक खेती और पुरानी संगठनात्मक यादें भी थीं, पर जो संकेत सबसे मजबूत निकला वह पंजाब विधानसभा चुनाव का था। सूत्रों के अनुसार पार्टी 2027 से पहले हरियाणा के चुने हुए नेताओं को पड़ोसी सूबे में विधानसभा से लेकर बूथ तक तैनात करने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस कवायद के चेहरे बने हुए हैं और हरियाणा के कामकाज को पंजाब की चुनावी बातचीत में ला रहे हैं।
पंजाब में भाजपा इस बार अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ऐसे में हरियाणा के विधायकों की संभावित तैनाती को संगठन की खाली जगह भरने की कोशिश माना जा रहा है। सैनी का पंजाब दौरा पिछले एक साल से चल रहा है। बैठक के बाद यही क्रम और नियोजित होने की बात कही जा रही है।
Punjab Election 2027: 48 विधायकों में से कितनों को पंजाब का मोर्चा मिल सकता है?
सूत्रों का आकलन है कि ज्यादातर विधायक पंजाब की अलग-अलग विधानसभाओं में काम संभाल सकते हैं। भूमिका मंच और रैली तक नहीं रुकेगी। बूथ स्तर पर संपर्क, वोटर सूची और स्थानीय इकाईयों के साथ तालमेल भी इन्हीं नेताओं के जरिए बढ़ाने की योजना है। इरादा पंजाब के मतदाता के सामने हरियाणा का शासन मॉडल रखना है। सैनी पहले से इस दिशा में कार्यक्रम कर रहे हैं। बैठक के बाद जिम्मेदारी का बंटवारा और साफ होने की उम्मीद है। पार्टी मान रही है कि हरियाणा के संगठन का अनुभव पंजाब अभियान को जमीन पर उतारने में काम आएगा।
नायब सैनी के 90 कार्यक्रम और पगड़ी वाला अंदाज क्यों चर्चा में है?
एक साल में सैनी पंजाब के करीब 90 कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं। इन्हें 2027 की आउटरीच का हिस्सा बताया जा रहा है। उन्होंने पगड़ी पहनकर मंच संभाला और धार्मिक स्थलों का दौरा किया। पंजाब इकाई के कार्यक्रमों में उन्हें सरदार नायब सिंह सैनी भी कहा गया। यह अंदाज सीमा के दोनों ओर संवाद बनाने की कोशिश के रूप में पढ़ा जा रहा है। उनका जोर इस बात पर है कि हरियाणा में चल रही कल्याणकारी योजनाएं पंजाब में भी लागू की जा सकती हैं, यदि वहां भाजपा की सरकार बने।
विकसित पंजाब और 217 वादों का दावा किस तुलना पर टिका है?
सैनी ने हाल के भाषणों में कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत संकल्प की तर्ज पर विकसित पंजाब बनाने की कोशिश होगी। 2024 के हरियाणा संकल्प पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 217 वादों में से 70 वादे 18 महीनों में पूरे हुए। इसी तुलना में उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि पांच साल में 57 चुनावी वादों में से एक भी पूरा नहीं हुआ। ये आंकड़े उनके बयानों के हैं। विपक्षी दल इन्हें चुनावी दावा बताते रहे हैं। भाजपा इन्हें हरियाणा मॉडल की नजीर बनाकर पंजाब में दोहराने की तैयारी में है।
मोदी का 1990 के दशक वाला उत्तरी क्लस्टर अनुभव क्यों याद किया जा रहा है?
बैठक की व्याख्या में प्रधानमंत्री के पुराने संगठनात्मक काम को भी जोड़ा जा रहा है। 1990 के दशक के मध्य से अंत तक वे हरियाणा और पंजाब समेत उत्तरी क्लस्टर के प्रभारी रह चुके हैं। 1996 में भाजपा ने बंसी लाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन किया था और बंसी लाल मुख्यमंत्री बने। पंजाब में उसी दौर में शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन हुआ। 1997 के विधानसभा चुनाव में एसएडी-भाजपा गठबंधन की बड़ी जीत हुई थी। उस समय पंजाब में भाजपा नई ताकत मानी जाती थी। अब पार्टी अकेले लड़ने की तैयारी में है और हरियाणा नेताओं की संभावित तैनाती को उसी पुराने अनुभव से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह रणनीति 2027 से पहले किसे फायदा पहुंचा सकती है?
शनिवार की बैठक के बाद पंजाब को लेकर दिशा और स्पष्ट हुई है। केवल मुख्यमंत्री के दौरे नहीं, विधायकों की बूथ तक तैनाती से अभियान को हरियाणा के संगठन का सहारा मिल सकता है। सोशल मीडिया पर हुई बातचीत भी इसी तैयारी का हिस्सा रही। ऑर्गेनिक खेती का जिक्र किसानों से संवाद का संकेत माना गया। असली परीक्षा तब होगी जब जिम्मेदारियां लिखित रूप में बंटेंगी और पंजाब की स्थानीय इकाईयां इन्हें स्वीकार करेंगी। सत्ताधारी आप और दूसरे विपक्षी दल इस कोशिश को बाहरी हस्तक्षेप बता सकते हैं। भाजपा का जवाब 70 पूरे वादों और विकसित पंजाब के नारे पर टिका है। चुनाव अभी दूर है, पर 48 विधायकों की यह बैठक उसी बिसात की शुरुआती चाल मानी जा रही है।
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