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OBC Creamy Layer: ओबीसी क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला फिर चर्चा में, केंद्र ने मांगे साफ दिशा-निर्देश

OBC Creamy Layer: ओबीसी क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला फिर चर्चा में, केंद्र ने मांगे साफ दिशा-निर्देश
OBC Creamy Layer

सारांश

  • OBC Creamy Layer: ओबीसी क्रीमी लेयर का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
  • कार्मिक विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले में साफ स्पष्टीकरण और दिशा-निर्देश मांगे हैं।
  • यह मामला दो हजार पंद्रह-सोलह की सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा है।
  • दो हजार चार के स्पष्टीकरण में कहा गया कि सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की वेतन आय को क्रीमी लेयर तय करने में शामिल किया जाएगा।

OBC Creamy Layer: ओबीसी क्रीमी लेयर का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। यह मामला यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा करीब दस साल पुराना विवाद है। कार्मिक विभाग ने करीब सौ ओबीसी अभ्यर्थियों को क्रीमी लेयर के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। ग्यारह मार्च दो हजार छब्बीस को शीर्ष अदालत ने इन अभ्यर्थियों के दावों पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि क्रीमी लेयर तय करने में सिर्फ आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। केंद्र को छह महीने का समय दिया गया था जो सितंबर में खत्म होने वाला है। अब कार्मिक विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगें हैं।

OBC Creamy Layer: सुप्रीम कोर्ट का ग्यारह मार्च का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने ग्यारह मार्च दो हजार छब्बीस को यह फैसला सुनाया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि ओबीसी श्रेणी में क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय के आधार पर नहीं हो सकता। अदालत ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर विचार करने के लिए छह महीने का समय दिया। यह समय सीमा सितंबर दो हजार छब्बीस में समाप्त हो रही है।

केंद्र ने क्यों दाखिल की नई याचिका

कार्मिक विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले में साफ स्पष्टीकरण और दिशा-निर्देश मांगे हैं। सरकार का कहना है कि सिविल सेवा परीक्षा दो हजार पच्चीस के श्रेणीवार मेरिट और आवंटन सूची को अंतिम रूप देने में देरी का व्यापक असर पड़ सकता है। कोर्ट का फैसला परीक्षा के अंतिम परिणाम आने के पांच दिन बाद आया था।

OBC Creamy Layer: देरी का संभावित असर

केंद्र ने अदालत को बताया कि यदि श्रेणीवार मेरिट और सेवा आवंटन सूची को दोबारा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होती है तो नई बैच के प्रशिक्षण पर असर पड़ सकता है। वरिष्ठता निर्धारण और वेतन तय करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। सरकार का मानना है कि एक स्तर पर बदलाव से नियुक्ति से जुड़े कई स्तर प्रभावित होंगे।

दस साल पुराना विवाद कैसे शुरू हुआ

यह मामला दो हजार पंद्रह-सोलह की सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा है। कार्मिक विभाग ने सफल करीब सौ ओबीसी अभ्यर्थियों के दावे क्रीमी लेयर के आधार पर खारिज कर दिए थे। इन अभ्यर्थियों ने सक्षम अधिकारियों से जारी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर परीक्षा पास की थी। बाद में मामला अदालत पहुंचा।

OBC Creamy Layer: दो हजार चार का पत्र और विवाद की जड़

क्रीमी लेयर को लेकर विवाद चौदह अक्टूबर दो हजार चार को कार्मिक विभाग द्वारा जारी एक पत्र से जुड़ा है। इस पत्र में सितंबर उन्नीस सौ तिरानवे के आधिकारिक ज्ञापन की व्याख्या की गई थी। उन्नीस सौ तिरानवे के ज्ञापन में क्रीमी लेयर तय करने के आय मानदंड से वेतन और कृषि आय को बाहर रखा गया था।

दो हजार चार के स्पष्टीकरण का असर

दो हजार चार के स्पष्टीकरण में कहा गया कि सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की वेतन आय को क्रीमी लेयर तय करने में शामिल किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे सरकारी कर्मचारियों के बच्चों और सार्वजनिक उपक्रम या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बच्चों के बीच भेदभाव पैदा हुआ। उनका कहना है कि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से दो हजार चौदह तक लागू नहीं हुई।

OBC Creamy Layer: प्रभावित अभ्यर्थियों की स्थिति

करीब सौ अभ्यर्थियों के ओबीसी दावे खारिज किए गए। इनमें से अधिकांश सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं में पक्षकार हैं। कुछ अभ्यर्थियों को यूपीएससी या राज्य संस्थाओं की अन्य परीक्षाओं में ओबीसी दर्जा मिला लेकिन सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया में उनका दावा खारिज हो गया। अब केंद्र ने इस पेचीदा मामले में अदालत से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं।

ओबीसी क्रीमी लेयर का यह विवाद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े करीब सौ अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में आय को एकमात्र आधार न बनाने का आदेश दिया था। अब केंद्र ने स्पष्टता मांगते हुए नई याचिका दाखिल की है। सरकार को आशंका है कि मेरिट सूची दोबारा बनाने से नई बैच के प्रशिक्षण और वरिष्ठता पर असर पड़ेगा। अदालत के आगामी निर्देश इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे। प्रभावित अभ्यर्थी और संबंधित विभाग दोनों पक्ष अदालत के स्पष्ट फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

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लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

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