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Krishna Janmashtami 2026: कब है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूरी विधि

Krishna Janmashtami 2026 (1)
Krishna Janmashtami 2026

सारांश

  • Krishna Janmashtami 2026: देशभर में इस साल कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं।
  • इसके साथ ही एक और खास बात यह है कि इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, जो जन्माष्टमी पर्व को और शुभ बनाता है।
  • इन मुहूर्तों में सुबह और दोपहर के समय भी लोग घर की साफ-सफाई, सजावट और भोग तैयार करने जैसे काम निपटा लेते हैं, ताकि रात की मुख्य पूजा में कोई कमी न रह जाए।
  • पूजा के अंत में माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर और अन्य पकवानों का भोग लगाया जाता है, फिर दीप जलाकर विधिवत आरती की जाती है।

Krishna Janmashtami 2026: देशभर में इस साल कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, और हर साल की तरह इस बार भी घर-घर में पूजा-पाठ और उपवास की तैयारी जोरों पर है। लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर 2026 में कृष्ण जन्माष्टमी 3 सितंबर को पड़ेगी या 4 सितंबर को? पंचांग के हिसाब-किताब में इस बार तिथियों का जो उलझा हुआ खेल बना है, उसने कई श्रद्धालुओं के मन में असमंजस पैदा कर दिया है। आइए, इस उलझन को साफ करते हुए बताते हैं कि पूजा का सही समय क्या रहेगा और मध्यरात्रि की आराधना किस तरह करनी चाहिए।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में माता देवकी और वासुदेव के घर आधी रात के समय हुआ था। यही वजह है कि जन्माष्टमी की पूजा में मध्यरात्रि के मुहूर्त को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। इस बार तिथि और नक्षत्र का जो संयोग बन रहा है, वह भी खासा दिलचस्प है।

Krishna Janmashtami 2026 की सही तिथि क्या है?

पंचांग के अनुसार साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक चलेगी। यानी अष्टमी तिथि लगभग पूरे दिन-रात मौजूद रहेगी, इसीलिए ज्यादातर पंचांगों में 4 सितंबर की तारीख को ही मुख्य रूप से जन्माष्टमी के तौर पर दर्ज किया गया है।

इसके साथ ही एक और खास बात यह है कि इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, जो जन्माष्टमी पर्व को और शुभ बनाता है। मान्यता है कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, उस समय रोहिणी नक्षत्र ही आकाश में विद्यमान था। इस बार रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का यह मेल जानकार बताते हैं कि हर साल नहीं बनता, इसलिए इस बार की जन्माष्टमी को कुछ खास माना जा रहा है।

गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के लिए अलग-अलग दिन?

देखने पर लगता है कि तिथियों की गणना अलग-अलग पंचांगों में थोड़ी भिन्न हो सकती है, इसीलिए कहीं-कहीं 3 सितंबर की तारीख भी सामने आ रही है। मामला कुछ इस तरह से है कि गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग आमतौर पर उदयातिथि के आधार पर व्रत रखते हैं, जबकि वैष्णव संप्रदाय और मंदिरों में अष्टमी तिथि तथा रोहिणी नक्षत्र के मध्यरात्रि संयोग को प्राथमिकता दी जाती है। यही वजह है कि इस बार अधिकतर पंचांग 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी की पूजा और व्रत के लिए उपयुक्त मान रहे हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त और चौघड़िया समय

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पर पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे शुभ माना जा रहा है। 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 43 मिनट तक पूजा का मुख्य मुहूर्त रहेगा। यही वह समय है जब घरों और मंदिरों में बाल गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। जो श्रद्धालु दिनभर उपवास रखेंगे, वे 5 सितंबर की सुबह 6 बजकर 1 मिनट के बाद पारण कर सकते हैं।

दिनभर के शुभ-अशुभ समय को लेकर चौघड़िया मुहूर्त की जानकारी भी नीचे तालिका में दी जा रही है, ताकि पूजा से जुड़े छोटे-मोटे काम सही समय पर किए जा सकें।

चौघड़ियासमय
चरसुबह 6:00 से 7:35 बजे तक
लाभसुबह 7:35 से 9:10 बजे तक
अमृतसुबह 9:10 से 10:45 बजे तक
शुभदोपहर 12:20 से 1:55 बजे तक
चरशाम 5:05 से 6:39 बजे तक
लाभरात 9:30 से 10:55 बजे तक
शुभ5 सितंबर रात 12:20 से 1:45 बजे तक

इन मुहूर्तों में सुबह और दोपहर के समय भी लोग घर की साफ-सफाई, सजावट और भोग तैयार करने जैसे काम निपटा लेते हैं, ताकि रात की मुख्य पूजा में कोई कमी न रह जाए।

घर पर जन्माष्टमी की पूजा कैसे करें?

जन्माष्टमी के दिन ज्यादातर श्रद्धालु सुबह से ही व्रत का संकल्प लेकर तैयारियों में जुट जाते हैं। पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखा जाता है और शाम होते-होते घर के मंदिर या पूजा स्थल को अच्छी तरह सजाया जाता है। बाल गोपाल के लिए झूला, नए वस्त्र और श्रृंगार की सामग्री पहले से ही तैयार रखी जाती है।

रात को ठीक मध्यरात्रि के मुहूर्त में भगवान कृष्ण की प्रतिमा या बाल स्वरूप को पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से स्नान कराया जाता है। इसके बाद उन्हें साफ और नए वस्त्र पहनाकर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। पूजा में मोरपंख, बांसुरी और तुलसी दल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि यह तीनों चीजें भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं। इसके बाद बाल गोपाल को झूले में झुलाया जाता है और शंख व घंटी बजाकर उनका स्वागत किया जाता है।

पूजा के अंत में माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर और अन्य पकवानों का भोग लगाया जाता है, फिर दीप जलाकर विधिवत आरती की जाती है। कुछ परिवार मध्यरात्रि की पूजा के तुरंत बाद ही व्रत खोल लेते हैं, जबकि कई लोग परंपरा के अनुसार अगले दिन सूर्योदय के बाद ही पारण करना उचित मानते हैं।

Krishna Janmashtami 2026: आम लोगों के लिए इस साल की जन्माष्टमी क्यों है खास

बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक उत्सव का रूप ले चुका है। मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं, दही-हांडी के आयोजन होते हैं और बच्चे-बड़े सभी कान्हा के रूप में सजते हैं। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग होने की वजह से मंदिरों में विशेष तैयारियां देखी जा रही हैं। कई बड़े मंदिर परिसरों में पहले से ही सजावट और सुरक्षा के इंतजाम शुरू हो गए हैं।

आम आदमी के लिए यह पर्व परिवार के साथ बैठकर व्रत खोलने, बच्चों को कृष्ण-लीला की कहानियां सुनाने और मोहल्ले में मिल-जुलकर उत्सव मनाने का मौका भी लेकर आता है। दफ्तरों और स्कूलों में भी इस दिन छुट्टी का ऐलान अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीख को होता है, इसलिए स्थानीय पंचांग और प्रशासनिक सूचना दोनों पर ध्यान देना जरूरी रहता है।

कुल मिलाकर, कृष्ण जन्माष्टमी 2026 का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा और मध्यरात्रि 11:57 से 12:43 बजे तक का समय पूजा के लिहाज से सबसे शुभ रहेगा। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार पर्व को और भी खास बना रहा है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग और मंदिर की सूचनाओं के अनुसार व्रत व पूजा की तैयारी करें, क्योंकि छोटे-मोटे क्षेत्रीय अंतर तिथि की गणना में देखे जा सकते हैं। मामले से जुड़ी स्थानीय जानकारी और मंदिरों के आयोजन को लेकर अपडेट आना अभी बाकी है।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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