Moradabad Leopard Attack: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले अंतर्गत ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र में आदमखोर तेंदुए का आतंक चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार रात बहापुर बलिया गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां तेंदुआ घर में सो रहे एक निहत्थे और दिव्यांग किसान को दबोचकर घसीट ले गया। शनिवार सुबह गांव से कुछ दूरी पर स्थित गन्ने के खेत में किसान का खून से लथपथ और क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हमले के साथ ही पिछले 25 दिनों के भीतर इलाके में तेंदुए के हमलों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अकेले बलिया गांव में ही तीन लोगों की जान जा चुकी है। घटना के बाद से क्षेत्र के दर्जनों गांवों में दहशत और मातम का माहौल है, वहीं वन विभाग की कथित सुस्त कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।
Moradabad Leopard Attack: रात के अंधेरे में झोपड़ी में घुसा तेंदुआ, गर्दन दबोचकर ले गया
मृतक किसान की पहचान 35 वर्षीय जगराज सिंह के रूप में हुई है, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग थे। जगराज गांव की मुख्य आबादी से थोड़ा हटकर खेतों के किनारे बनी एक कच्ची झोपड़ी में अकेले रहते थे। गरीबी के कारण उनके घर में कोई पक्का दरवाजा या सुरक्षा का साधन नहीं था। शुक्रवार देर रात जब वह गहरी नींद में थे, तभी गन्ने के खेतों से निकलकर आया तेंदुआ झोपड़ी में घुस गया।
तेंदुए ने सीधे उनकी गर्दन पर हमला कर श्वास नली को दबा दिया और उन्हें घसीटते हुए गन्ने के घने खेतों की ओर ले गया। शनिवार तड़के जब ग्रामीण खेतों की तरफ निकले, तो उन्होंने खून के निशान देखे। खोजबीन करने पर गन्ने के खेत में जगराज का क्षत-विक्षत शव मिला, जिसे तेंदुए ने बुरी तरह नोच रखा था। शव की स्थिति इतनी भयावह थी कि ग्रामीणों के रोंगटे खड़े हो गए। सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और प्रशासनिक विफलता के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में 25 दिनों में 4 जिंदगियां लील चुका है तेंदुआ
ठाकुरद्वारा इलाके में तेंदुए के जानलेवा हमलों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 3 अगस्त को लालापुर पीपलसाना गांव में खेत में पशुओं के लिए चारा काट रहीं संतोष देवी पर तेंदुए ने हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद 18 अगस्त को बहापुर बलिया गांव में ही घास काटने गई ब्रह्मो देवी उर्फ बिरमा देवी को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया।
तीसरी घटना 25 अगस्त को घटी, जब धान के खेत में निराई कर रहीं एक पुलिसकर्मी की मां मिथिलेश देवी पर तेंदुए ने उनके पति और अन्य मजदूरों के सामने झपट्टा मारकर जान ले ली थी। अब जगराज की मौत के बाद ग्रामीणों में यह डर घर कर गया है कि तेंदुआ पूरी तरह आदमखोर हो चुका है और खेतों के बाद अब घरों में घुसकर शिकार करने लगा है।
गन्ने के घने खेत बने सुरक्षित पनाहगाह, दर्जनों गांवों में कर्फ्यू जैसा सन्नाटा
ठाकुरद्वारा क्षेत्र की सीमा उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के बफर जोन, अमानगढ़ और कालागढ़ के जंगलों से सटी हुई है। साथ ही पास से गुजरने वाली रामगंगा नदी का खादर इलाका वन्यजीवों की आवाजाही का प्रमुख कॉरिडोर बन चुका है। वर्तमान में क्षेत्र में गन्ने की फसल 10 से 12 फीट ऊंची हो चुकी है, जो तेंदुओं को छिपने के लिए प्राकृतिक और घना आश्रय प्रदान करती है।
दिनभर गन्ने के खेतों में छिपे रहने के बाद शाम ढलते ही ये शिकारी जानवर आबादी की ओर रुख करते हैं। बलिया, पिपली मलकपुर, श्यामली, लालापुर, पीपलसाना समेत करीब 40 गांवों में शाम होते ही कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता है। किसान खेतों में पानी लगाने या निराई करने जाने से कतरा रहे हैं। लोग हाथों में लाठी-डंडे और मशालें लेकर पहरा दे रहे हैं और बच्चों को घरों में कैद रखने को मजबूर हैं।
Moradabad Leopard Attack: थर्मल ड्रोन, ट्रैप कैमरे और पिंजरे तैनात, ग्रामीणों ने उठाई गोली मारने की मांग
घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें मौके पर डेरा डाले हुए हैं। वन क्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में रेस्क्यू टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। तेंदुए की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए इलाके में नाइट विजन और थर्मल सेंसिंग ड्रोन कैमरों से सघन निगरानी की जा रही है। पेड़ों पर मोशन-सेंसर वाले ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं और जगह-जगह बकरे का चारा लगाकर पिंजरे बिछाए गए हैं।
हालांकि, वन विभाग द्वारा हाल के दिनों में कई तेंदुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगलों में छोड़े जाने के दावों के बावजूद ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में कई खूंखार तेंदुए खुले घूम रहे हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को उठाने से रोकते हुए प्रशासन से मांग की है कि इंसानों का खून चख चुके इस आदमखोर तेंदुए को तत्काल प्रभाव से पकड़कर दूर ले जाया जाए या फिर उसे गोली मारने के आदेश जारी किए जाएं ताकि ग्रामीण भयमुक्त होकर अपनी आजीविका चला सकें।






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