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School Admission Age: बच्चे को स्कूल भेजने की सही उम्र क्या? जानें NEP 2020 के नियम

School Admission Age: बच्चे को स्कूल भेजने की सही उम्र क्या? जानें NEP 2020 के नियम
School Admission Age: हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा बेहतरीन शिक्षा प्राप्त करे और जीवन में आगे बढ़े। इस होड़ में कई अभिभावक बच्चे के दो साल पूरे होते ही उसका दाखिला प्ले-स्कूल या प्री-स्कूल में कराने की जल्दबाजी करने लगते हैं। हालांकि, बाल रोग विशेषज्ञ और शिक्षाविद इसे बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए नुकसानदेह मानते हैं।
प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सैयद मुजाहिद हुसैन और बाल विकास विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता को प्ले-बेस्ड प्री-स्कूल और औपचारिक स्कूली शिक्षा (कक्षा 1) के बीच के बुनियादी अंतर को समझना बेहद आवश्यक है। बिना तैयारी और कम उम्र में औपचारिक पढ़ाई का दबाव डालने से बच्चे के स्वाभाविक सीखने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: फाउंडेशनल स्टेज और सही उम्र का फॉर्मूला

भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत 5+3+3+4 संरचना में शुरुआती 5 वर्षों को ‘फाउंडेशनल स्टेज’ (Foundational Stage) घोषित किया गया है। यह चरण 3 से 8 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए निर्धारित है, जिसमें 3 वर्ष की प्री-स्कूलिंग (आंगनवाड़ी/बालवाटिका) और उसके बाद कक्षा 1 व 2 शामिल हैं।
राष्ट्रीय नीति और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, बच्चे को लगभग 3 वर्ष की आयु में ही खेल-आधारित (Play-based) प्री-स्कूल भेजा जाना चाहिए। प्री-स्कूल का मुख्य उद्देश्य अक्षर रटाना या परीक्षा लेना नहीं, बल्कि बच्चे को घर से बाहर के सामाजिक माहौल में घुलना-मिलना सिखाना, सहपाठियों के साथ शेयरिंग की आदत डालना और बुनियादी संचार कौशल विकसित करना होता है।

2 साल की उम्र में स्कूल भेजने से क्यों बचें?

विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि 2 वर्ष की आयु में बच्चे को किसी भी औपचारिक या संरचित स्कूलिंग की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती है। इस उम्र में बच्चे का मस्तिष्क सबसे अधिक अपने माता-पिता, दादा-दादी और पारिवारिक माहौल से सीखता है।
शुरुआती दो-तीन वर्षों में बच्चे की स्वाभाविक जिज्ञासा खिलौनों से खेलने, घर के दैनिक कार्यों को देखने, कहानियां सुनने और पारिवारिक संवाद से शांत होती है। इस नाजुक दौर में बच्चे को अजनबियों के बीच या कठोर समय-सारिणी में धकेलने से उसमें अलगाव का तनाव (Separation Anxiety) पैदा हो सकता है।

कक्षा 1 में औपचारिक दाखिले के लिए 6 वर्ष की उम्र जरूरी

केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के स्पष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार, औपचारिक प्राथमिक शिक्षा यानी कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय की गई है। तीन वर्ष के प्री-स्कूल या फाउंडेशनल अनुभव के बाद छह वर्ष की उम्र में बच्चा बौद्धिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से औपचारिक पढ़ाई का भार संभालने के योग्य बनता है।
छह वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते बच्चे की एकाग्रता (Attention Span) बेहतर हो जाती है, वह शिक्षकों के निर्देशों को ठीक से समझकर उनका पालन कर पाता है और एक स्थान पर बैठकर रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार होता है।

School Admission Age: सिर्फ उम्र नहीं, स्कूल भेजने से पहले बच्चे की इन तैयारियों को परखें

माता-पिता को केवल जन्मतिथि के आधार पर निर्णय लेने के बजाय यह देखना चाहिए कि क्या बच्चा स्कूल जाने के लिए भावनात्मक रूप से तैयार है। यदि बच्चा माता-पिता से कुछ घंटों के लिए बिना अत्यधिक रोए अलग रह लेता है, अपनी भूख, प्यास या शौच जैसी बुनियादी शारीरिक आवश्यकताओं को शब्दों या इशारों में स्पष्ट बता सकता है और अपने हाथ से हल्का भोजन करने का प्रयास करता है, तो वह प्री-स्कूल के लिए तैयार माना जा सकता है।
यदि बच्चा नए माहौल से अत्यधिक डरता है या बात-बात पर घबराता है, तो उसे जबरन स्कूल भेजने के बजाय कुछ और महीने घर पर आत्मविश्वास विकसित करने का अवसर देना चाहिए।

School Admission Age: दूसरे बच्चों से तुलना की होड़ से बचें अभिभावक

विशेषज्ञों का कहना है कि पड़ोस या रिश्तेदारी के किसी बच्चे के कम उम्र में स्कूल जाने की होड़ में अपने बच्चे का दाखिला जल्दबाजी में न कराएं। जल्दी स्कूल जाने से कोई बच्चा अधिक बुद्धिमान या प्रतिभाशाली नहीं बनता।
प्रत्येक बच्चे के बोलने, चलने और सामाजिक तालमेल बिठाने की अपनी गति होती है। पहले 3 वर्षों तक घर ही बच्चे की सबसे उत्तम पाठशाला है, जहां प्रेम, सुरक्षा और संवाद का स्वस्थ वातावरण देकर आप उसके भविष्य की सबसे मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।

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लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

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