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Jharkhand Student Protest: झारखंड में छात्रों की बड़ी जीत, हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL समेत TDPL की 2014 से अब तक की सभी परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान किया

Jharkhand Student Protest

सारांश

  • Jharkhand Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में कई हफ्तों से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
  • झारखंड सरकार की कैबिनेट ने आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 2014 से अब तक आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है।
  • देवेंद्र नाथ महतो ने आगे कहा कि छात्र इस जांच और भ्रष्ट सिस्टम को जड़ से खत्म करने की कोशिश का समर्थन करते रहेंगे।
  • छात्र संगठनों का कहना है कि सिर्फ परीक्षाएं रद्द करना पर्याप्त नहीं है।

Jharkhand Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में कई हफ्तों से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार रात स्पष्ट ऐलान किया कि टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी जाएंगी। इसके साथ ही जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है। कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र जश्न मनाते दिखे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि टीडीपीएल द्वारा जितनी भी परीक्षाएं कराई गई थीं, उन सभी को रद्द किया जाता है। उन्होंने बताया कि सुधारों के लिए आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का फैसला किया गया है। सीएम ने आगे कहा कि 14वीं जेपीएससी के मामले को मंत्रियों के साथ हुई बैठक में सुलझा लिया गया था। आज कैबिनेट की बैठक में इस मामले को अंतिम रूप दिया गया।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाएं, टीडीपीएल द्वारा की गई भर्तियां और टीडीपीएल के अन्य सभी काम रद्द कर दिए गए हैं। सीएम के अनुसार, परीक्षाओं के संचालन को लेकर पहले से एसओपी बनी हुई है और अगर उसका पालन होता तो गड़बड़ियां नहीं होतीं। टीडीपीएल द्वारा प्रकाशित रिजल्ट और उसकी सभी गतिविधियां अब रद्द मानी जाएंगी।

Jharkhand Student Protest: कैबिनेट का फैसला और मंत्री का बयान

झारखंड सरकार की कैबिनेट ने आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 2014 से अब तक आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य के मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार ने छात्रों की मुख्य मांग मान ली है। सीजीएल परीक्षा को रद्द करने पर सहमति बन गई है। इसके अलावा टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी जाएंगी। जानकारी के अनुसार, हेमंत सरकार ने परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी की जांच रिटायर्ड जज की निगरानी में कराने का फैसला भी किया है। इससे जांच प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।

यह ऐलान उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए लंबे समय से सड़कों पर थे। रांची में प्रदर्शन का सिलसिला कई हफ्तों से चल रहा था। छात्रों ने पहले 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेरने का ऐलान भी किया था। सरकार के इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई।

Jharkhand Student Protest: जीत तो मिली, लेकिन सीबीआई जांच की मांग बाकी

सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द करने की मांग मान लेने के बावजूद छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने स्पष्ट किया कि अभी सीबीआई जांच की मांग नहीं मानी गई है। जब तक सीबीआई जांच की मांग नहीं मानी जाती, वे आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी लड़ाई की जीत है, लेकिन अभी और भी कुछ बाकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया कि 24 दिन बाद उनकी मांग सुनी गई, लेकिन सीबीआई जांच के बिना अनशन जारी रहेगा।

दूसरी ओर, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में साथ और सहयोग देने के लिए सभी छात्रों, अभिभावकों, मीडिया के सदस्यों, पुलिस प्रशासन और खासकर झारखंड सरकार तथा मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया कि छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से लिया गया और मांगें पूरी की गईं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच बहुत बारीकी से हो रही है और इसमें शामिल हर भ्रष्ट व्यक्ति को पकड़ा जा रहा है। वे इन गिरोहों के पीछे के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

देवेंद्र नाथ महतो ने आगे कहा कि छात्र इस जांच और भ्रष्ट सिस्टम को जड़ से खत्म करने की कोशिश का समर्थन करते रहेंगे। सुधार की चल रही प्रक्रिया को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। अगर मुद्दों का समाधान हो जाता है और मांगें पूरी हो जाती हैं तो विरोध प्रदर्शन की जरूरत नहीं रहेगी। वे आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सीबीआई या सीआईडी जांच के आदेश दिए गए और फिर रद्द कर दिए गए। छात्रों को ऐसे सिस्टम की जरूरत है जहां सरकार गारंटी दे कि भविष्य में कभी भी पेपर लीक और गड़बड़ियां नहीं होंगी। वे इस कोशिश में सरकार का सहयोग करेंगे और उम्मीद करते हैं कि सरकार भी अपना समर्थन जारी रखेगी।

पृष्ठभूमि और आगे की राह

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। टीडीपीएल जैसी आउटसोर्स एजेंसी पर कई परीक्षाओं के संचालन का जिम्मा था। छात्रों का आरोप था कि इनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। सरकार के नवीनतम फैसले से एक बड़ा कदम तो उठाया गया है, लेकिन सीबीआई जांच की मांग अभी भी लंबित है।

इस बीच एक संबंधित घटना में जेपीएससी की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक को गिरफ्तार किया गया है। उन पर इंटरव्यू के लिए 40 लाख रुपये वसूलने का आरोप है। यह घटना भी भर्ती प्रक्रिया में व्याप्त अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।

सरकार द्वारा गठित कमेटी सुधारों पर काम करेगी। आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली इस कमेटी से उम्मीद है कि वह परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के सुझाव देगी। रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच से दोषियों तक पहुंचने में मदद मिलने की संभावना है।

छात्र संगठनों का कहना है कि सिर्फ परीक्षाएं रद्द करना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनानी होगी। वे पारदर्शी प्रक्रिया, समयबद्ध भर्ती और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सरकार ने छात्रों की मुख्य मांग मान ली है, जिससे रांची में तनाव कुछ कम हुआ है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

Jharkhand Student Protest: लगातार दबाव से सरकार झुकी

इस फैसले से हजारों अभ्यर्थी प्रभावित होंगे जो टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल हुए थे। अब नई परीक्षाएं कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार को जल्द से जल्द नई व्यवस्था तय करनी होगी ताकि युवाओं का समय और मेहनत व्यर्थ न जाए। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों की एकजुटता और लगातार दबाव ने सरकार को बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया। यह घटना भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की जरूरत को फिर से रेखांकित करती है।

झारखंड सरकार अब जांच और सुधार दोनों मोर्चों पर काम करेगी। छात्र नेता आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं। अगर सीबीआई जांच की मांग भी मान ली गई तो आंदोलन पूरी तरह खत्म हो सकता है। फिलहाल रांची में छात्रों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं—एक तरफ खुशी है कि उनकी बड़ी मांग मान ली गई, दूसरी तरफ सीबीआई जांच के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी दिख रहा है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऐलान ने साफ कर दिया है कि सरकार छात्रों की आवाज सुन रही है। अब देखना यह होगा कि जांच कितनी प्रभावी होती है और नई परीक्षा प्रणाली कितनी पारदर्शी बनती है। युवाओं का भविष्य इन फैसलों पर निर्भर करेगा।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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