ताज़ा खबर
हाई ब्लड प्रेशर: किसे ज्यादा खतरा, जांच कब कराएं और WHO के अनुसार नमक व व्यायाम से जुड़ी सलाह FIR दर्ज कैसे कराएं: थाने में शिकायत, जीरो FIR और e-FIR के नियम, पुलिस मना करे तो क्या करें पीएम आवास योजना गाइड: ग्रामीण में Awaas+ सर्वे से नाम, शहरी 2.0 में ऑनलाइन आवेदन, पात्रता और स्टेटस लोकसभा चुनाव कैसे होता है: 543 सीटें, 272 का बहुमत, नामांकन से मतगणना और सरकार गठन तक पूरी प्रक्रिया छठ पूजा 2026: 13 से 16 नवंबर तक महापर्व, जानें नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य का समय त्योहारों में खानपान कैसे संतुलित रखें: ICMR-NIN के अनुसार चीनी, नमक और तेल की सीमा, मिठाई खरीदने के FSSAI नियम दिवाली 2026 कैलेंडर: धनतेरस 6 नवंबर, लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर, जानें शहरवार मुहूर्त और पांचों दिन की तिथियां वायु प्रदूषण और सेहत: AQI की श्रेणियां कैसे समझें, GRAP के चरण और बचाव के व्यावहारिक तरीके
ट्रेंडिंग
भारत

India Monsoon Deficit 2026: देश में मानसून की कमी 14 प्रतिशत पहुंची, खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा असर

India Monsoon Deficit 2026
India Monsoon Deficit 2026

सारांश

  • India Monsoon Deficit 2026: दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में अगस्त की शुरुआत में कुछ राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी लेकिन उसके बाद मानसून की तीव्रता में कमी आ गई है।
  • मानसून सीजन की शुरुआत से ही बारिश का पैटर्न असमान रहा है। जून में कई इलाकों में देरी और कमजोर बारिश ने बुआई की रफ्तार को धीमा किया था।
  • बारिश की कमी का असर सिर्फ बुआई तक सीमित नहीं रहता। फसल के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में नमी की कमी उपज को प्रभावित कर सकती है।
  • मानसून की अनियमितता किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है।

India Monsoon Deficit 2026: दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में अगस्त की शुरुआत में कुछ राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी लेकिन उसके बाद मानसून की तीव्रता में कमी आ गई है। इस वजह से पूरे देश में एक जून से 23 अगस्त तक की अवधि में बारिश की कमी बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह कमी सबसे अधिक 27 प्रतिशत दर्ज की गई है। दक्षिण-प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 23 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत रही है। इस असमान वितरण का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ रहा है।

India Monsoon Deficit 2026: खरीफ बुआई में हुई कमी का आंकड़ा

कृषि मंत्रालय की ऑल इंडिया क्रॉपवाइज प्रोग्रेसिव एरिया सोन रिपोर्ट के मुताबिक 21 अगस्त 2026 तक देशभर में खरीफ फसलों की कुल बुआई पिछले साल की तुलना में 16.07 लाख हेक्टेयर कम रही है। यह कमी करीब 1.50 प्रतिशत बैठती है। सबसे ज्यादा असर चावल की बुआई पर दिखा है जहां पिछले साल के मुकाबले 13.19 लाख हेक्टेयर यानी 3.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मानसून पर निर्भर खेती वाले इलाकों में यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

क्षेत्रीय स्तर पर बारिश का असमान पैटर्न

मानसून सीजन की शुरुआत से ही बारिश का पैटर्न असमान रहा है। जून में कई इलाकों में देरी और कमजोर बारिश ने बुआई की रफ्तार को धीमा किया था। जुलाई में कुछ सुधार आया लेकिन अगस्त के मध्य से फिर मानसून की सक्रियता घटी। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा कमी देखी गई जहां कई जिले लंबे समय से पर्याप्त बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दक्षिण प्रायद्वीप में भी स्थिति सामान्य से काफी पीछे है।

India Monsoon Deficit 2026: उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत की स्थिति

उत्तर-पश्चिम भारत में कमी अपेक्षाकृत कम है लेकिन यहां भी कुछ हिस्सों में नमी की कमी बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून ट्रफ की स्थिति और निम्न दबाव क्षेत्रों की गतिविधि ने बारिश के वितरण को प्रभावित किया है। जब मानसून ट्रफ हिमालय की तलहटी के पास अटका रहता है तो मध्य और दक्षिणी इलाकों में बारिश कम हो जाती है। इस साल भी कुछ हद तक यही पैटर्न देखने को मिला।

चावल की बुआई पर सबसे ज्यादा असर

खरीफ सीजन भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चावल मक्का सोयाबीन कपास दालें और तिलहन जैसी फसलें इसी मौसम में बोई जाती हैं। इस साल कुल बुआई में हुई कमी मुख्य रूप से चावल पर केंद्रित है। चावल की खेती पानी की अधिक जरूरत वाली फसल है। पूर्वी राज्यों और कुछ दक्षिणी इलाकों में पर्याप्त बारिश न होने से किसानों ने बुआई को टाल दिया या कम क्षेत्र में किया।

India Monsoon Deficit 2026: फसल विकास पर संभावित प्रभाव

बारिश की कमी का असर सिर्फ बुआई तक सीमित नहीं रहता। फसल के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में नमी की कमी उपज को प्रभावित कर सकती है। विशेषकर उन जिलों में जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहते हैं। जलाशयों के स्तर और उपलब्ध सिंचाई सुविधाओं ने कुछ हद तक राहत दी है लेकिन बारिश आधारित क्षेत्रों में चुनौती बरकरार है।

आने वाले दिनों में बारिश की संभावना

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का जिक्र करते हुए कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। 24 से 26 अगस्त के दौरान ओडिशा में और 24 से 25 अगस्त के दौरान छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में 24 अगस्त को झारखंड में 24 से 27 अगस्त तक और बिहार में 24 से 26 अगस्त के दौरान भी कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है।

प्रायद्वीपीय भारत में कम सक्रियता

प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक हफ्ते तक बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना व्यक्त की गई है। दक्षिणी राज्यों में पहले से ही कमी ज्यादा है इसलिए यहां स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। मौसम विभाग के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो हफ्तों में भी कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर कमी और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

India Monsoon Deficit 2026: किसानों के लिए चुनौती और निगरानी

मानसून की अनियमितता किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। बुआई में देरी या कमी से फसल चक्र प्रभावित होता है। कई किसान वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करते हैं या कम पानी वाली फसलें चुनते हैं। सरकार और कृषि विभाग जिला स्तर पर निगरानी बढ़ा रहे हैं। जिन जिलों में सिंचाई कवरेज कम है और बारिश की कमी ज्यादा है वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

देशभर में एक जून से 23 अगस्त तक मानसून में 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में 27 प्रतिशत तथा दक्षिण प्रायद्वीप में 23 प्रतिशत कमी सबसे ज्यादा है। खरीफ फसलों की बुआई 16.07 लाख हेक्टेयर कम हुई है जिसमें चावल की बुआई में 13.19 लाख हेक्टेयर की गिरावट प्रमुख है।

ओडिशा छत्तीसगढ़ झारखंड और बिहार में अगले कुछ दिनों भारी बारिश की संभावना है लेकिन प्रायद्वीपीय इलाकों में सक्रियता कम रह सकती है। किसानों को मौसम अपडेट पर ध्यान देते हुए खेती का प्रबंधन करना होगा।

यह भी पढ़ें

लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

टिप्पणियां (1)

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X