India Alliance Nationwide Protests: इंडिया गठबंधन ने बुधवार को चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा जारी की। गठबंधन बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यक्रमों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर सेव डेमोक्रेसी मार्च होंगे। हर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किए जाएंगे। अभियान का मकसद लोगों को यह बताना है कि यह कार्यक्रम क्यों चलाया जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची विवाद को लेकर एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है।
India Alliance Nationwide Protests: सेव डेमोक्रेसी मार्च कब और कहां होंगे
खरगे के अनुसार 2 से 8 अक्टूबर के बीच जिलों में मार्च और जिलाधिकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन होंगे। उन्होंने कहा कि लोग जागरूक किए जाएंगे कि यह अभियान क्यों है।
6 अक्टूबर को सभी विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे। खरगे ने बताया कि विपक्ष पहले बुधवार को ही मार्च निकालना चाहता था। बाद में अधिक भागीदारी के लिए तिथि 6 अक्टूबर तय की गई। उन्होंने कहा कि सांसदों को दोबारा बुलाकर विरोध को व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा।
खरगे ने जोड़ा कि राज्यसभा सदस्य और सभी दलों के सांसद आमंत्रित किए जाएंगे। देश में लोकतंत्र बचाने की इच्छा रखने वालों को भी शामिल होने के लिए कहा जाएगा। ये बातें प्रेस वार्ता में कही गईं। आधिकारिक सरकारी प्रतिक्रिया इस सामग्री में नहीं है।
राष्ट्रपति से मुलाकात और अगली रैलियों की योजना क्या है
गठबंधन अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगने की योजना बना रहा है। विपक्षी नेता एक अभ्यावेदन देंगे। खरगे के शब्दों में इसमें वे कठिनाइयां और संवैधानिक मुद्दे रखे जाएंगे जिनका वे उल्लेख कर रहे हैं।
अभियान का चौथा चरण पांच बड़ी रैलियों का होगा। इन रैलियों की तारीख और स्थान बाद में बताए जाएंगे। इस तरह कार्यक्रम चार स्तरों पर दिखता है। जिला मार्च, आयोग तक सांसदों का मार्च, राष्ट्रपति को अभ्यावेदन और बड़ी रैलियां।
ये घोषणाएं बैठक के बाद की गईं। स्थान और भीड़ की संख्या जैसी अतिरिक्त जानकारी स्रोत में नहीं है। इसलिए केवल घोषित कार्यक्रम ही दर्ज हैं।
India Alliance Nationwide Protests: खरगे और ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए
बैठक में खरगे ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव पैनल सरकार से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि दलों ने इस मुद्दे पर साथ लड़ने पर सहमति बनाई है। यह आरोप विपक्ष का है। आयोग की सफाई यहां उपलब्ध नहीं है।
पूर्व बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा और इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने मतदान अधिकार को संवैधानिक अधिकार बताया और लोगों के प्रति दायित्व की बात की। उन्होंने कहा कि अगर लोग वोट नहीं दे पा रहे हैं और उनके वोट लूटे तथा धोखा दिए जा रहे हैं तो देश कहां जाएगा। उन्होंने इसे अपनी मांग बताया।
ये बयान आरोप और मांग हैं। इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता। विपक्ष एसआईआर वापसी, मतदाता सूची में अधिक पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं को बाहर रखे जाने से सुरक्षा चाहता है।
एसआईआर पर विपक्ष की मांगें क्या हैं
विपक्ष ने एसआईआर अभियान वापस लेने की मांग की है। मतदाता सूचियों में अधिक पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के बाहर होने से बचाव के उपाय भी मांगे गए हैं।
खरगे ने भविष्य के चुनावों के लिए एसआईआर से पहले की मतदाता सूची इस्तेमाल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वैध मतदाताओं को हटाने से पहले अग्रिम सूचना, कारण और प्रभावी अपील व्यवस्था होनी चाहिए। ये मांगें गठबंधन की तरफ से रखी गई हैं।
एसआईआर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा विवाद है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और मतदान अधिकार से जोड़कर पेश कर रहा है। सरकार या आयोग का पक्ष इस स्रोत में विस्तार से नहीं है। इसलिए रिपोर्ट मांगों और घोषणाओं तक सीमित रहेगी।
India Alliance Nationwide Protests: बैठक में कौन कौन शामिल रहा
बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी एसपी, शिवसेना यूबीटी, राजद, सीपीएम, सीपीआई, जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस, जम्मू कश्मीर पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, सीपीआई एमएल, आईयूएमएल, केसी एम, एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, केसी जे और एआईएफबी के प्रतिनिधि शामिल रहे।
इतनी पार्टियों की उपस्थिति को गठबंधन एकजुटता के संकेत के रूप में पेश कर रहा है। खरगे ने कहा कि दलों ने मुद्दे पर साथ लड़ने सहमति दी है। यह सहमति बैठक के बाद के बयान पर आधारित है।
2 से 8 अक्टूबर के जिला कार्यक्रम और 6 अक्टूबर का आयोग मार्च निकट भविष्य की सबसे साफ तिथियां हैं। राष्ट्रपति से मुलाकात अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित है। पांच बड़ी रैलियों का कैलेंडर बाद में आएगा। मतदाता और स्थानीय कार्यकर्ता इन्हीं तिथियों पर विरोध की रूपरेखा देख सकते हैं। आरोप, मांग और कार्यक्रम घोषणाएं विपक्षी बैठक तथा प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकली हैं। अंतिम संस्थागत फैसला चुनाव आयोग या सरकार का होगा, वह इस सामग्री में दर्ज नहीं है।
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