किसी मशहूर व्यक्ति का ऐसा वीडियो, जिसमें वह कुछ ऐसा कहता दिखे जो उसने कभी कहा ही नहीं, या किसी रिश्तेदार की आवाज में आया फोन जिसमें तुरंत पैसे मांगे जाएं, ये डीपफेक के उदाहरण हो सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अब नकली वीडियो, फोटो और आवाज बनाना आसान हो गया है। ऐसे में हर चीज पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक है। जानिए डीपफेक कैसे पहचानें।
डीपफेक क्या है
डीपफेक ऐसी फोटो, वीडियो या ऑडियो है, जिसे AI तकनीक से बदला या बनाया गया हो, ताकि वह असली लगे। इसमें किसी का चेहरा दूसरे के शरीर पर लगाया जा सकता है, होंठों की हरकत बदली जा सकती है या किसी की आवाज की हूबहू नकल की जा सकती है। इसका गलत इस्तेमाल अफवाह फैलाने, किसी की छवि खराब करने, ब्लैकमेल और आर्थिक ठगी के लिए किया जाता है।

डीपफेक वीडियो के संकेत
- होंठों की हरकत और आवाज का ठीक से मेल न होना
- पलक झपकने, चेहरे के भाव या सिर की हरकत का अस्वाभाविक लगना
- चेहरे के किनारे, बाल, कान या गहनों के आसपास धुंधलापन
- चेहरे और बाकी शरीर या पृष्ठभूमि की रोशनी में फर्क
- दांत, आंखें या हाथ की उंगलियां अजीब दिखना
- आवाज में भावनाओं की कमी या रोबोट जैसा उतार-चढ़ाव
ध्यान रखें कि तकनीक तेजी से बेहतर हो रही है, इसलिए कई डीपफेक में ये संकेत साफ नहीं दिखते। सिर्फ देखकर फैसला करने के बजाय पुष्टि करना जरूरी है।
वीडियो या खबर की पुष्टि कैसे करें
सबसे पहले देखें कि वीडियो किसने और कहां पोस्ट किया है। किसी नेता, अभिनेता या संस्था का बड़ा बयान हो, तो उसके आधिकारिक सोशल मीडिया खाते या भरोसेमंद समाचार माध्यमों में पुष्टि खोजें। फोटो की असलियत जांचने के लिए रिवर्स इमेज सर्च की मदद ली जा सकती है। अगर कोई वीडियो बहुत ज्यादा चौंकाने वाला या गुस्सा दिलाने वाला है, तो शेयर करने से पहले रुकें। अफवाह फैलाना भी नुकसान पहुंचा सकता है।
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आवाज की नकल वाली ठगी से बचाव
ठग किसी परिचित की नकली आवाज में फोन करके दुर्घटना, गिरफ्तारी या इलाज के नाम पर तुरंत पैसे मांग सकते हैं। ऐसे में घबराकर पैसे न भेजें। फोन काटकर उस व्यक्ति या परिवार के दूसरे सदस्य को उनके पुराने नंबर पर खुद फोन करें। परिवार में एक “कोड शब्द” तय करना भी मददगार है, जो सिर्फ आप लोगों को पता हो। सोशल मीडिया पर अपनी और बच्चों की ज्यादा फोटो-वीडियो सार्वजनिक रखने से बचें।
शिकायत कहां करें
अगर आपका या किसी परिचित का डीपफेक बनाकर फैलाया जा रहा है, तो उस प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। सोशल मीडिया कंपनियों के शिकायत अधिकारी को भी शिकायत दी जा सकती है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। सबूत के लिए लिंक और स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर एडिट किया गया वीडियो डीपफेक है?
नहीं, सामान्य एडिटिंग डीपफेक नहीं है। डीपफेक में AI से किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज नकली तरीके से बनाई जाती है।
स्रोत: CERT-In, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





