JPSC Paper Leak Protest
JPSC Paper Leak Protest: झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSSC) की परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। पेपर लीक और व्यापक अनियमितताओं के विरोध में राजधानी के मैदानों में डटे अभ्यर्थियों के आंदोलन का आज 12वां दिन है। राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। इस बीच पूरे राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल भी बेहद तेज हो गई है।
रांची में जारी इस बड़े आंदोलन के बीच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) भी समानांतर रूप से अपनी जांच का दायरा लगातार बढ़ा रहा है। जांच एजेंसी ने राज्य के विभिन्न जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए अब तक इस धांधली में शामिल 14 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। एक तरफ जहां बेमियादी अनशन पर बैठे छात्र परीक्षा को तुरंत रद्द करने और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार की ओर से भी बीच-बचाव के संकेत मिल रहे हैं।
JPSC Paper Leak Protest: रांची में आंदोलन का 12वां दिन और कैंडल मार्च की तैयारी
रांची में परीक्षा में धांधली के खिलाफ जारी आंदोलन का रुख अब और उग्र होता जा रहा है। प्रदर्शन स्थल पर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद आंदोलनकारी छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। छात्रों ने अब राज्य विधानसभा के घेराव का बड़ा ऐलान किया है।
विधानसभा घेराव की रणनीति बनाने के साथ ही आज शाम पूरे शहर में एक विशाल कैंडल मार्च निकालने की भी पुरजोर तैयारी की गई है। इस बीच खबर आ रही है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए झारखंड सरकार के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल आज आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात कर वार्ता की पहल कर सकता है।
JPSC Paper Leak Protest: सीएम हेमंत सोरेन से सीधी वार्ता और सीबीआई जांच पर अड़े छात्र
सरकार की संभावित वार्ता की खबरों के बीच आंदोलनकारी छात्रों का रुख पूरी तरह साफ और कड़ा बना हुआ है। अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो के साथियों का कहना है कि वे किसी मध्यस्थ मंत्री या प्रशासनिक कमेटी से बातचीत नहीं करेंगे। वे केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधी वार्ता करेंगे।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल वादों से बात नहीं बनेगी और सरकार को तुरंत प्रभाव से विवादित परीक्षा को रद्द करना होगा। इसके साथ ही, इस पूरे परीक्षा घोटाले की तह तक जाने के लिए इसकी जांच सीधे सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए, ताकि बड़े सफेदपोशों के चेहरों से भी नकाब उतर सके।
सीआईडी की कार्रवाई में 14 गिरफ्तार और 18 ठिकानों पर छापेमारी
छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बीच जांच में जुटी सीआईडी ने भी माफियाओं पर अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। जांच एजेंसी ने राज्यभर में कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 14 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। हालिया कार्रवाई में तीन और प्रमुख आरोपी उमेश कुमार, बुधेश्वर भगत और रमेश कुमार पकड़े गए हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआईडी की अलग-अलग टीमों ने रांची, हजारीबाग, पलामू, बोकारो और धनबाद में कुल 18 संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी को कोचिंग संचालकों और बिचौलियों के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, खाली चेक और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े बैंक दस्तावेज बरामद हुए हैं।
JPSC Paper Leak Protest: डबल रोल में खेल कर रहा था मास्टरमाइंड अभय तिवारी
सीआईडी की इस गहन जांच प्रक्रिया के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी को लेकर हुआ है। अभय तिवारी अब झारखंड में परीक्षा धांधली माफिया का सबसे प्रमुख चेहरा बन चुका है। वह प्रशासनिक और निजी तंत्र के बीच बेहद शातिराना तरीके से डबल रोल निभा रहा था।
अभय तिवारी एक तरफ असली नाम से गोड्डा में ब्लॉक सप्लायर ऑफिसर के रूप में सरकारी सेवा दे रहा था। वहीं दूसरी तरफ, उसने अपना फर्जी नाम ‘मनोज तिवारी’ रखा हुआ था। इसी छद्म नाम के सहारे वह परीक्षा आयोजित कराने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) में बकायदा मार्केटिंग मैनेजर का पद संभालकर पूरा नेटवर्क चला रहा था।
खुद बना सेकेंड टॉपर और रिश्तेदारों को भी बांटीं नौकरियां
मास्टरमाइंड अभय तिवारी की कारगुजारियां यहीं खत्म नहीं हुईं। परीक्षा कराने वाली एजेंसी में सीधी पहुंच का फायदा उठाकर उसने न सिर्फ अभ्यर्थियों का रेट तय किया, बल्कि खुद भी जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा में राज्य स्तर पर सेकेंड टॉपर बन बैठा। यह खुलासा सामने आते ही पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
जांच में यह भी साफ हुआ है कि अभय तिवारी ने इसी फर्जीवाड़े के दम पर वर्ष 2013 से लेकर अब तक लगभग 12 बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं पास की हैं। इतना ही नहीं, उसने टीडीपीएल कंपनी में अपनी मजबूत पैठ का इस्तेमाल करके अपने सगे भाई, भाभी और साली को भी नियम-कायदों को दरकिनार करते हुए सरकारी नौकरियां दिलवा दी थीं।
JPSC Paper Leak Protest: प्री का रेट 5 लाख और मेन्स के लिए 25 लाख की तय थी रेट लिस्ट
सीआईडी को मास्टरमाइंड के ठिकानों से छापेमारी के दौरान कई डिजिटल सबूत, मोबाइल फोन, अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, कार्बन ओएमआर शीट और पासबुक मिली हैं। सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि अभय तिवारी ने जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में पास कराने के लिए बाकायदा एक रेट लिस्ट तय कर रखी थी।
परीक्षा की प्रीलिम्स स्टेज क्लियर कराने का रेट 5 लाख रुपये और मेन्स परीक्षा पास कराने के लिए 25 लाख रुपये वसूले जाते थे। इसमें 10 लाख रुपये एडवांस के रूप में लिए जाते थे। जो अभ्यर्थी तुरंत नकद राशि देने में असमर्थ होते थे, उनसे गारंटी के तौर पर ब्लैंक चेक और जमीन के असली कागजात जमा करवा लिए जाते थे।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL पर झारखंड सरकार की मेहरबानी
इस पूरे परीक्षा घोटाले के तार परीक्षा कंडक्ट कराने वाली एजेंसी ‘टीआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (TDPL) से सीधे जुड़े हैं। लखनऊ स्थित इस कंपनी का पुराना रिकॉर्ड बेहद विवादित रहा है। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश की ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा और विधानसभा स्टाफ भर्ती परीक्षा में धांधली के गंभीर आरोपों के बाद इसे यूपी सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था।
इसके बावजूद झारखंड में इस दागी कंपनी को परीक्षाओं का टेंडर सौंपा गया। मई 2025 में शिकायतों के बाद जेपीएससी ने इसे ब्लैकलिस्ट किया था, लेकिन महज एक महीने बाद ही जून में इस पर से बैन हटा दिया गया। फरवरी 2026 में भी लिखित शिकायतों को दरकिनार कर इसे दोबारा परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी गई।
JPSC Paper Leak Protest: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान और राजनीतिक गतिरोध
दूसरी तरफ, पूरे विवाद और छात्रों के लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आधिकारिक बयान भी सामने आया है। मुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि उनकी सरकार पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामलों को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
छात्रों के लगातार जारी विरोध के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम पूरी निष्पक्षता से कर रही हैं और सरकार इस मामले में संवेदनशील है। हालांकि, छात्र संगठन मुख्यमंत्री के इन आश्वासनों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं और जब तक ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रखने का दावा कर रहे हैं।
राज्य में लगातार 12 दिनों से जारी यह छात्र आंदोलन अब केवल एक परीक्षा का विरोध नहीं रहा, बल्कि यह पारदर्शी शासन व्यवस्था की मांग का बड़ा प्रतीक बन चुका है। सीआईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों और मास्टरमाइंड अभय तिवारी के पकड़े जाने के बावजूद अभ्यर्थियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को बार-बार ठेका देने की व्यवस्थागत कमियों ने युवाओं के भरोसे को गहरा आघात पहुंचाया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार अनशन पर बैठे छात्रों से सीधी बातचीत कर इस परीक्षा को रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग पर कोई ठोस फैसला लेती है या यह गतिरोध और गहराता है।
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