NCPI Rift from NDANCPI Rift from NDA

NCPI Rift from NDA: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से बगावत कर नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) का गठन करने वाले सांसदों के गुट में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। टीएमसी से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले 20 सांसदों में से तीन मुस्लिम सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। मुर्शिदाबाद क्षेत्र से आने वाले इन सांसदों ने दिल्ली में आयोजित एनडीए संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह दूरी बनाकर अपने बागी तेवर दिखा दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद से एनसीपीआई के भीतर एनडीए के समर्थन को लेकर छिड़ी अंदरूनी कलह सार्वजनिक तौर पर सामने आ गई है।

संसद भवन परिसर में मौजूद रहने के बावजूद इन तीनों सांसदों ने एनडीए की बैठक में कदम नहीं रखा, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। एनसीपीआई के लोकसभा नेता सुदीप बनर्जी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और एनडीए की बैठकों में हिस्सा लेने के फैसले का अब पार्टी के भीतर ही कड़ा विरोध शुरू हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के दावों के बीच बागी सांसदों के इस रुख ने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।

टीएमसी से अलग हुए एनसीपीआई सांसदों में शुरू हुई अंदरूनी रार

तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नया राजनीतिक दल एनसीपीआई बनाने वाले 20 सांसदों के समूह में अब दरार पूरी तरह स्पष्ट दिखने लगी है। केंद्र सरकार और सत्ताधारी गठबंधन एनडीए को समर्थन देने के मुद्दे पर पार्टी दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है।

एक तरफ जहां सुदीप बनर्जी के नेतृत्व में कुछ सांसद एनडीए के करीब जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सांसदों का एक समूह इसका खुलकर विरोध कर रहा है। एनडीए के समर्थन को लेकर पैदा हुआ यह मतभेद अब सार्वजनिक बयानों और बहिष्कार के रूप में सामने आ रहा है।

NCPI Rift from NDA: तीन मुस्लिम सांसदों ने एनडीए संसदीय दल की बैठक से बनाई दूरी

संसद में मंगलवार को आयोजित एनडीए संसदीय दल की अहम बैठक में एनसीपीआई के तीन प्रमुख सांसदों की अनुपस्थिति चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बनी रही। ये तीनों सांसद मुर्शिदाबाद जिले की अलग-अलग लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम समुदाय के नेता हैं।

इनमें सांसद अबू ताहेर, खलीलुर रहमान और क्रिकेटर से नेता बने यूसुफ पठान शामिल हैं। इन तीनों नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे एनडीए की किसी भी औपचारिक या अनौपचारिक बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे।

संसद भवन में मौजूदगी के बाद भी बैठक में शामिल नहीं हुए सांसद

मंगलवार को जब एनडीए संसदीय दल की बैठक शुरू हुई, तब ये तीनों सांसद संसद भवन के अंदर ही मौजूद थे। इसके बावजूद उन्होंने बैठक में जाने के बजाय उससे दूरी बनाए रखना ही मुनासिब समझा।

सांसदों के इस कदम से यह साफ हो गया है कि वे पार्टी नेतृत्व के एनडीए समर्थक रुख से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। संसद परिसर में उनकी मौजूदगी और बैठक से दूरी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

NCPI Rift from NDA: सुदीप बनर्जी की पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार रात को हुई जब एनसीपीआई के लोकसभा नेता सुदीप बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक मुलाकात की थी। इस मुलाकात को एनडीए के साथ एनसीपीआई की बढ़ती नजदीकियों के रूप में देखा गया।

इसके अगले ही दिन सुदीप बनर्जी पार्टी के अन्य सांसदों को लेकर एनडीए संसदीय दल की बैठक में पहुंचे। हालांकि, इन तीनों सांसदों ने सुदीप बनर्जी के इस कदम से खुद को पूरी तरह अलग रखते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।

सांसद अबू ताहेर ने मीडिया के सामने साफ किया अपना राजनीतिक रुख

बैठक के बहिष्कार के बाद सांसद अबू ताहेर ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि उनका गुट भारतीय जनता पार्टी या एनडीए गठबंधन के साथ बिल्कुल भी नहीं जुड़ा हुआ है।

अबू ताहेर ने तर्क दिया कि जब वे एनडीए का हिस्सा ही नहीं हैं, तो एनडीए की संसदीय दल की बैठक में शामिल होने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। उनके इस बयान ने एनसीपीआई के एनडीए समर्थक दावों की हवा निकाल दी है।

NCPI Rift from NDA: लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान किए गए दावों पर उठे सवाल

उल्लेखनीय है कि जब टीएमसी के बागी सांसदों ने एनसीपीआई का गठन किया था, तब उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। उस समय सांसदों ने खुद को अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग करते हुए एनडीए को समर्थन देने की बात कही थी।

पिछले मंगलवार को भी जब एनसीपीआई के कई सांसद पहली बार एनडीए की बैठक में गए थे, तब भी ये तीनों सांसद अनुपस्थित रहे थे। अब लगातार दूसरी बार बैठक से दूर रहकर उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे शुरुआत से ही एनडीए के खिलाफ थे।

सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक में शामिल हुए सभी बागी सांसद

मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी दिल्ली पहुंचे और उन्होंने राज्य के सांसदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में एनसीपीआई के बाकी सदस्यों के साथ ही अबू ताहेर, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान भी मौजूद रहे।

एनडीए की बैठक का बहिष्कार करने वाले इन तीनों सांसदों का सुवेंदु अधिकारी की बैठक में जाना कई सवाल खड़े कर रहा था। हालांकि, सांसदों ने बैठक के बाद इस पर अपना पक्ष रखते हुए स्थिति को साफ करने का प्रयास किया।

NCPI Rift from NDA: विकास कार्यों और प्रशासनिक मुद्दों को सांसदों ने बताया बैठक की वजह

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ हुई बैठक को लेकर तीनों सांसदों ने कहा कि इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए इस बैठक में शामिल हुए थे।

सांसदों का कहना था कि मुख्यमंत्री जब भी राज्य और क्षेत्रों के विकास के लिए प्रशासनिक बैठकें बुलाएंगे, वे उसमें जरूर जाएंगे। अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराना और जनता की बात सरकार तक पहुंचाना उनका संवैधानिक कर्तव्य है।

टीएमसी नेता सौगत रॉय के दावे से तेज हुईं अटकलें

एनसीपीआई के भीतर मचे इस घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय के एक बयान ने राजनीतिक पारे को और बढ़ा दिया है। दो दिन पहले सौगत रॉय ने दावा किया था कि बागी गुट के कई सांसद उनके संपर्क में हैं।

सौगत रॉय का कहना था कि टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई में गए कुछ सांसद अपनी गलती का अहसास कर रहे हैं और वे जल्द ही वापस टीएमसी में लौट सकते हैं। इस दावे के बाद तीनों मुस्लिम सांसदों के रुख को टीएमसी में वापसी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

NCPI Rift from NDA: मुर्शिदाबाद के राजनीतिक समीकरण और सांसदों की मजबूरी

मुर्शिदाबाद क्षेत्र पश्चिम बंगाल का एक प्रमुख मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है, जहां की राजनीतिक तासीर काफी अलग है। इस क्षेत्र से चुनाव जीतकर आए सांसदों के लिए बीजेपी या एनडीए के साथ दिखना राजनीतिक रूप से काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

स्थानीय मतदाताओं के मिजाज और अपने राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए ही इन तीनों सांसदों ने एनडीए से दूरी बनाने का फैसला लिया है। अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि बनाए रखना उनके लिए क्षेत्र की राजनीति में बने रहने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बनी एनसीपीआई का भविष्य अब गहरे संकट में नजर आ रहा है। तीन प्रमुख मुस्लिम सांसदों द्वारा एनडीए की बैठक से दूरी बनाने और बीजेपी विरोधी रुख अपनाने से यह स्पष्ट हो गया है कि बागी गुट के भीतर की दरार अब भरने वाली नहीं है। सुदीप बनर्जी जहां एनडीए के साथ समन्वय बैठाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं क्षेत्रीय राजनीति और जनाधार के दबाव में बाकी सांसद इसका तीखा विरोध कर रहे हैं। सौगत रॉय के दावों और बदल रहे राजनीतिक हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में एनसीपीआई में बड़ी टूट या सांसदों की टीएमसी में वापसी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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