Gold-Silver Price 8 September 2026: भारतीय घरेलू सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार, 8 सितंबर 2026 के कारोबारी सत्र की शुरुआत दबाव और मंदी के संकेतों के साथ देखने को मिल रही है। नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में ही कीमती धातुओं की कीमतों में मुनाफावसूली का दौर शुरू हुआ, जिसका सीधा असर आज के खुदरा और वायदा भाव पर पड़ रहा है। अमेरिकी श्रम बाजार से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के संकेतों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है, जिसने गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने और चांदी पर बिकवाली का भारी दबाव बना दिया है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आधिकारिक बेंचमार्क दरों के अनुसार, 7 सितंबर के बंद भाव में 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने का भाव टूटकर 1,52,880 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। इसी प्रकार 22 कैरेट जेवराती सोना 1,40,040 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,14,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया। वहीं चांदी के दाम भी फिसलकर 2,36,770 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गए। वैश्विक बाजारों से मिल रहे सुस्त रुझानों के कारण 8 सितंबर को भी बाजार में नरमी का रुख हावी रहने की संभावना है।
Gold-Silver Price 8 September 2026: वायदा बाजार और IBJA दरों का गणित, MCX पर जारी रहा बिकवाली का दबाव
घरेलू वायदा बाजार (MCX) पर 7 सितंबर की शाम तक सोने और चांदी दोनों के अनुबंध लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। शाम के सत्र में सोना लगभग 1,52,287 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था, जो कि पिछले बंद स्तर से स्पष्ट रूप से नीचे था। वहीं चांदी का वायदा भाव भी दिन के उच्च स्तर 2,38,510 रुपये से गिरकर 2,36,226 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक लुढ़क गया और अंततः 2,36,727 रुपये के आसपास स्थिर हुआ।
बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि निवेशकों को IBJA के आधिकारिक स्पॉट रेट और MCX के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट रेट के अंतर को समझना चाहिए। आईबीजेए दिन में दो बार (सुबह और दोपहर) पूरे देश के लिए बेंचमार्क दरें जारी करता है, जिन पर केंद्र व राज्य सरकारें, बैंक और बड़े सर्राफा कारोबारी भरोसा करते हैं। दूसरी ओर, एमसीएक्स की दरें अंतरराष्ट्रीय मांग और सटोरिया गतिविधियों के आधार पर दिनभर बदलती रहती हैं। 8 सितंबर को भी एमसीएक्स के शुरुआती रुझान यह तय करेंगे कि दिन के अंत तक खुदरा बाजार किस दिशा में बंद होगा।
चारों प्रमुख महानगरों में खुदरा रेट: स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज का अंतर
राष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्क दरें तय होने के बावजूद भारत के विभिन्न शहरों में सोने और चांदी के खुदरा भाव में अंतर पाया जाता है। इसका मुख्य कारण राज्यों के स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत, स्थानीय सर्राफा संघों के प्रीमियम और ज्वेलर्स द्वारा वसूले जाने वाले मेकिंग चार्ज हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने का खुदरा भाव लगभग 1,54,950 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का भाव करीब 1,42,050 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। आर्थिक राजधानी मुंबई और पूर्वी महानगर कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,54,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में स्थानीय मांग अधिक होने के चलते 24 कैरेट सोने का भाव 1,56,670 रुपये प्रति 10 ग्राम तक दर्ज किया गया। चांदी के मामले में दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में भाव 2,49,900 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में हैं, जबकि चेन्नई और हैदराबाद में चांदी 2,54,800 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज के भाव
उत्तर प्रदेश के प्रमुख आभूषण बाजारों, विशेष रूप से लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का रुख देखा गया है। लखनऊ के खुदरा बाजार में चांदी का भाव लगभग 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास दर्ज किया गया है।
सोने के मामले में लखनऊ के स्थानीय ज्वेलर्स 22 कैरेट जेवराती सोने पर अलग-अलग मेकिंग चार्ज ले रहे हैं। सर्राफा विशेषज्ञों की सलाह है कि आभूषण खरीदने से पहले उपभोक्ता केवल ऑनलाइन या डिस्प्ले बोर्ड पर दिख रहे रेट पर भरोसा न करें, बल्कि हॉलमार्क प्रमाणन, शुद्धता प्रतिशत, वजन और 3 प्रतिशत जीएसटी सहित पक्के बिल की कुल राशि की स्पष्ट गणना करवा लें।
क्यों आई सोने और चांदी में गिरावट? जानिए वैश्विक आर्थिक कारण
सोने और चांदी के भाव में आई इस ताजा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बदली धारणा है। रॉयटर्स (Reuters) की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल और रोजगार के मजबूत आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है। इसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर हुई है और सख्त रुख जारी रहने के आसार बढ़ गए हैं।
इस बदलाव के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट में सोने की कीमत करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर 4,392.88 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय चांदी भी लगभग 1 प्रतिशत फिसलकर 65.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। जब बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं, तो विदेशी संस्थागत निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली धातु से पूंजी निकालकर बॉन्ड्स और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर मोड़ते हैं, जिससे सोने पर बिकवाली का दबाव गहरा जाता है।
अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े तय करेंगे आगे की दिशा
बाजार विश्लेषक मान रहे हैं कि 8 सितंबर और आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा केवल पिछले दिन की गिरावट से तय नहीं होगी। इस सप्ताह अमेरिका के उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी महंगाई के नए आंकड़े जारी होने वाले हैं।
यदि महंगाई के आंकड़ों में नरमी देखने को मिलती है, तो फेडरल रिजर्व पर दरों में कटौती का दबाव बनेगा, जिससे सोने में फिर से निचली कीमतों पर खरीदारी लौट सकती है। किंतु यदि मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक गर्म रहती है, तो डॉलर की मजबूती सोने की कीमतों को और नीचे खींच सकती है। इसलिए संस्थागत निवेशक इस समय आक्रामक खरीदारी से बचते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहे हैं।
Gold-Silver Price 8 September 2026: सोना खरीदने वाले ग्राहकों और निवेशकों के लिए जरूरी परामर्श
त्योहारी सीजन और आगामी शादियों के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं के लिए यह गिरावट राहत भरा अवसर हो सकती है। हालांकि खरीदारी करते समय कुछ अनिवार्य सावधानियां बरतना आवश्यक है। आभूषण खरीदते समय हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के 6 अंकों वाले अल्फ़ान्यूमेरिक एचयूआईडी (HUID) हॉलमार्क की जांच अवश्य करें। 24 कैरेट सोना शुद्ध निवेश (सिक्के और बार) के लिए उपयुक्त होता है, जबकि जेवर हमेशा 22 कैरेट (916) या 18 कैरेट (750) शुद्धता में ही टिकाऊ बनते हैं।
निवेशकों के लिए यह गिरावट एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाने का अवसर दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी के चलते लंबी अवधि में सोने और चांदी के मौलिक रुझान मजबूत बने रहेंगे, किंतु अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से बचने के लिए एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित तरीके से खरीदारी करना अधिक समझदारी भरा कदम होगा।
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