Mayawati Saharanpur mosque demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कथित अवैध मस्जिद पर बुलडोजर चलने के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य सरकार से इस कार्रवाई को तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर गिराना उचित नहीं है और ऐसे विवादों के लिए दूसरे उपाय अपनाने चाहिए।

मायावती ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के साथ आरोपियों के घर गिराकर पूरे परिवार को बेघर करने पर भी सवाल उठाए। उनका बयान शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आया। वहीं प्रशासन का कहना है कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर वाले ढांचे पर कार्रवाई अदालत के आदेश और तय प्रक्रिया के बाद शुरू हुई है। सिटी मजिस्ट्रेट के 17 जुलाई के आदेश को जिला जज की अदालत ने 4 सितंबर को बरकरार रखा था।

Mayawati Saharanpur mosque demolition: मायावती ने सरकार से क्या मांग की

मायावती ने कहा कि सहारनपुर जिले की मस्जिद समेत पूरे उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को आपाधापी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का अभियान ठीक नहीं है। उन्होंने सरकार से इस पर तुरंत रोक लगाने को कहा। उनके मुताबिक नकारात्मक हालात से बचने के लिए समाधान के अन्य उपाय जरूरी हैं। कानून का राज कायम रखने की बात भी उन्होंने कही।

एक्स पर लिखी गई बात का सार

बसपा प्रमुख ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट कर अपना रुख साफ किया। उन्होंने पूरे राज्य में चल रही कार्रवाई को जल्दबाजी बताया। सहारनपुर की मस्जिद का अलग से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे विवाद दूसरे तरीके से सुलझाने चाहिए। पोस्ट में रोक और वैकल्पिक रास्ते दोनों बातें एक साथ हैं।

Mayawati Saharanpur mosque demolition: धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर क्या कहा गया

मायावती ने कहा कि संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों के लोगों का समान सम्मान करे। उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार का दायित्व बताया गया। उन्होंने भारतीय परंपरा के अनुसार सम्मान देने को देश और व्यापक जनहित में जरूरी बताया।

मस्जिद को इस्लाम से कैसे जोड़ा

उन्होंने लिखा कि इस्लाम में मस्जिदें रोज इबादत का मुख्य और अभिन्न अंग हैं। दिन में कई बार जमात के साथ नमाज पढ़ने का स्थान होने का उल्लेख भी किया गया। इसी को ध्यान में रखकर सम्मान देने की बात कही गई। यह टिप्पणी धार्मिक स्थल पर कार्रवाई के संदर्भ में आई है।

Mayawati Saharanpur mosque demolition: आरोपियों के घर गिराने पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोपी के मकान ध्वस्त करने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिना नियम-कानून का समुचित पालन किए घर गिराना ठीक नहीं। पूरे परिवार को सामूहिक सजा देकर बेघर करने से लोग विचलित हैं। बसपा सरकार की तरह कानून द्वारा कानून का राज जरूरी बताया गया।

अदालत और सौहार्द की अपील

मायावती ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो उचित होगा। साथ ही सभी से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की गई। पार्टी की ओर से यह बात अलग से कही गई। विवाद के बीच शांति बनाए रखने पर जोर रहा।

सहारनपुर में कार्रवाई क्यों शुरू हुई

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी कथित अवैध मस्जिद को गिराने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई को ढांचे को अवैध घोषित कर गिराने का आदेश दिया था। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और गलत इस्तेमाल के मामले में करीब 6.41 करोड़ रुपये मुआवजे का भी आदेश हुआ था।

Mayawati Saharanpur mosque demolition: अपील खारिज होने के बाद आगे क्या हुआ

इस आदेश के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। उसी के बाद मस्जिद गिराने की कार्रवाई शुरू हुई। प्रशासन का कहना है कि कदम अदालती आदेश के बाद उठाए गए हैं।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष क्या है

सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि जांच के बाद ढांचा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बना पाया गया था। आदेश के खिलाफ अपील भी खारिज हो चुकी है। कानून-व्यवस्था के लिए संवेदनशील और हॉटस्पॉट इलाकों में अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ कंपनियां तैनात की गई हैं।

Mayawati Saharanpur mosque demolition: अफवाहों पर नजर और प्रक्रिया का दावा

डीआईजी के अनुसार अफवाह फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई अदालत के आदेश और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है। दोनों पक्षों के बयान अब सार्वजनिक चर्चा में हैं।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की कथित अवैध मस्जिद पर अदालती आदेश के बाद ध्वस्तीकरण शुरू होने के बीच मायावती ने यूपी सरकार से अभियान तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने जल्दबाजी में मस्जिदों को अवैध बताने, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और आरोपी के घर गिराकर परिवार को सामूहिक सजा देने पर सवाल उठाए हैं।

सिटी मजिस्ट्रेट के 17 जुलाई के आदेश में ढांचा अवैध करार दिया गया था और करीब 6.41 करोड़ रुपये मुआवजे का भी निर्देश था। अपील खारिज होने तथा 4 सितंबर को जिला जज द्वारा आदेश बरकरार रखने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी। पुलिस का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण का निष्कर्ष जांच में आया और अतिरिक्त बल तैनात है। आगे का रुख अदालत, प्रशासन और राजनीतिक बयानों के बीच तय होगा।

Read More Here

About The Author