UN Equal Earth Map: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को करेक्ट द मैप प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव में दुनिया के नक्शों में महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के करीब दिखाने वाले प्रक्षेपण को बढ़ावा देने की बात कही गई है। खास तौर पर इक्वल अर्थ नक्शे का जिक्र किया गया है।
164 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया जबकि अमेरिका ने विरोध किया और छह देश मतदान से दूर रहे। यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। मर्केटर नक्शा करीब 450 साल पुराना है और इसमें धरती के ऊपरी हिस्से बड़े दिखते हैं। इक्वल अर्थ में अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे इलाके ज्यादा सही आकार में नजर आएंगे। भारत और पाकिस्तान की जगह या सीमाएं नहीं बदलेंगी।
UN Equal Earth Map: यूएन महासभा में प्रस्ताव पास
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे को ज्यादा सटीक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 4 सितंबर को करेक्ट द मैप प्रस्ताव मंजूर हुआ। इसमें वास्तविक क्षेत्रफल के करीब दिखाने वाले नक्शों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात है।
कितने देशों ने दिया समर्थन
प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट डाला। अमेरिका ने इसका विरोध किया। छह देश मतदान में शामिल नहीं हुए। यह फैसला बहुमत से लिया गया लेकिन बाध्यकारी नहीं है।
UN Equal Earth Map: मर्केटर नक्शा क्यों विवादित
मर्केटर प्रक्षेपण करीब 450 साल पुराना है। इसमें गोल धरती को सपाट कागज पर उतारने से ऊंचे अक्षांश वाले इलाके बहुत बड़े दिखते हैं। ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्र असल से काफी बड़े नजर आते हैं।
इक्वल अर्थ नक्शा क्या है
इक्वल अर्थ प्रक्षेपण 2018 में बोजन शाव्रिच, टॉम पैटरसन और बर्नहार्ड जेनी ने तैयार किया था। इसमें जगहों का क्षेत्रफल वास्तविक आकार के ज्यादा करीब रखा गया है। अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण एशिया बड़े दिखते हैं।
यूरोप और अमेरिका का आकार छोटा
नए नक्शे में यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। यह बदलाव सिर्फ नक्शे पर दिखने वाला है। जमीन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उद्देश्य सही अनुपात दिखाना है।
UN Equal Earth Map: भारत और पाकिस्तान कहां दिखेंगे
नए नक्शे में भारत और पाकिस्तान अपनी मौजूदा जगह पर ही रहेंगे। उनकी सीमाओं में कोई बदलाव नहीं होगा। दोनों देशों का आकार दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा सही नजर आएगा। जमीन बढ़ेगी या घटेगी नहीं।
भूमध्य रेखा के पास कम विकृति
भारत और पाकिस्तान भूमध्य रेखा के पास हैं इसलिए मर्केटर में भी इनका आकार बहुत ज्यादा नहीं बिगड़ता। फिर भी इक्वल अर्थ में तुलनात्मक रूप से ज्यादा सटीक तस्वीर मिलेगी। दोनों देश नक्शे पर वहीं दिखेंगे।
मर्केटर पूरी तरह खत्म नहीं होगा
मर्केटर नक्शा समुद्री और हवाई यात्रा में दिशा तय करने के लिए अभी भी उपयोगी है। इसमें कोण सही रहते हैं। सामान्य दुनिया के नक्शे में बदलाव की कोशिश की जा रही है।
UN Equal Earth Map: स्कूलों और मीडिया में बदलाव संभव
आने वाले समय में स्कूल की किताबों, समाचार माध्यमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इक्वल अर्थ जैसे नक्शों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। लोग दुनिया को नए तरीके से देख सकेंगे। भारत-पाकिस्तान की स्थिति वही रहेगी।
संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव दुनिया को ज्यादा सही नक्शे के जरिए समझने की दिशा में एक प्रयास है। इक्वल अर्थ प्रक्षेपण महाद्वीपों का वास्तविक आकार दिखाने की कोशिश करता है। भारत और पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति या सीमाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सिर्फ नक्शे पर उनका तुलनात्मक आकार ज्यादा सटीक होगा। मर्केटर नक्शा नेविगेशन के काम आएगा जबकि सामान्य उपयोग में नया प्रक्षेपण जगह बना सकता है। 164 देशों के समर्थन से यह पहल मजबूत हुई है। स्कूलों और मीडिया में धीरे-धीरे यह बदलाव दिख सकता है। दुनिया का नक्शा देखने का नजरिया थोड़ा बदलेगा लेकिन जमीन पर सब?,mn m .,
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