Aaj Ka Mausam 5 September 2026: देश के कई राज्यों में सितंबर के पहले सप्ताह में दक्षिण-पश्चिम मानसून का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कहीं मूसलाधार बारिश और वज्रपात की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो कहीं मानसूनी हवाओं की गति धीमी पड़ने लगी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार, शनिवार 5 सितंबर 2026 को देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर सक्रिय रहेगा। विशेष रूप से पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और उससे सटे इलाकों में बने ‘वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया’ (सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र) के प्रभाव से मध्य भारत के कई जनपदों में भारी से बहुत भारी बारिश की गंभीर चेतावनी जारी की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस चक्रवाती परिसंचरण और मानसूनी ट्रफ लाइन के संयुक्त प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड के विस्तृत इलाकों में गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर बारिश होने के प्रबल आसार हैं। वहीं दूसरी ओर, संपूर्ण सितंबर महीने के लिए दीर्घकालिक पूर्वानुमान में एल नीनो (El Niño) के असर के चलते देशभर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया है, जिससे खरीफ फसलों की उत्पादकता और आगामी रबी सत्र के लिए मिट्टी की नमी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। आइए जानते हैं 5 सितंबर को विभिन्न राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा।
Aaj Ka Mausam 5 September 2026: छाए रहेंगे घने बादल, मध्यम बारिश और गरज-चमक से सुहावना होगा मौसम
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे एनसीआर के इलाकों—नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में शनिवार 5 सितंबर को दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। मौसम विभाग के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक, दिल्ली में सामान्यतः बादल छाए रहने के साथ कई हिस्सों में मध्यम दर्जे की बारिश और तेज गरज-चमक के एक से दो दौर देखने को मिल सकते हैं। इस बारिश से उमस भरी गर्मी से जूझ रहे दिल्लीवासियों को तापमान में गिरावट के साथ बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, बारिश के कारण सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान आईटीओ, धौला कुआं, आश्रम और रिंग रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर जलभराव और यातायात जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और नागरिक निकायों ने यात्रियों को सतर्क रहने और यात्रा शुरू करने से पहले डिजिटल ट्रैफिक व मौसम अपडेट जांचने का परामर्श दिया है। खुले मैदानों में आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लेने की सख्त हिदायत दी गई है।
उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक बादलों का डेरा, कई जिलों में वज्रपात की चेतावनी
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 5 सितंबर का मौसम पूरी तरह साफ रहने की कोई संभावना नहीं है। राज्य के ऊपर सक्रिय मानसूनी हवाओं और नम पुरवैया के कारण पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य यूपी के विभिन्न जनपदों में रुक-रुक कर बौछारें पड़ने के आसार हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में बादलों की तेज गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।
प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर, लखनऊ, कानपुर और झांसी के आसपास के इलाकों में स्थानीय मौसमी तंत्र के दबाव के चलते कुछ स्थानों पर तेज बारिश दर्ज की जा सकती है। लगातार बारिश के चलते ग्रामीण अंचलों में कच्चे रास्तों पर फिसलन और शहरी क्षेत्रों में जलनिकासी की समस्या खड़ी हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से किसानों और चरवाहों को सलाह दी है कि वे बादलों के घिरते ही खुले खेतों से हटकर पक्के मकानों में शरण लें।
मध्य प्रदेश: निम्न दबाव का केंद्र बना संकट, कई जिलों में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश 5 सितंबर को मानसूनी हलचलों का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। आईएमडी के अनुसार, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों पर टिका हुआ गहरा निम्न दबाव क्षेत्र 3 से 5 सितंबर के दौरान राज्य भर में मूसलाधार बारिश का मुख्य कारण बना हुआ है। रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, छतरपुर, जबलपुर और शहडोल संभाग के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है।
लगातार हो रही वर्षा से नर्मदा, बेतवा, चंबल और केन जैसी प्रमुख नदियों के साथ-साथ स्थानीय नालों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। कई जिलों में निचले इलाकों में पानी भरने, रपटों पर तेज बहाव के कारण संपर्क मार्ग टूटने और पुलिया बहने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट पर रखा गया है, तथा आम नागरिकों को उफनती नदियों और जलभराव वाले पुलों को पार न करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
पहाड़ी राज्यों में सतर्कता: उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन का जोखिम
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय अंचलों में 5 सितंबर को बारिश का मिजाज मैदानी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दोनों ही पहाड़ी राज्यों के कई जनपदों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना है। चारधाम यात्रा मार्गों और देहरादून के लिए जारी तीर्थस्थल पूर्वानुमान में भी रुक-रुक कर बारिश और घने बादलों का असर रहने की बात कही गई है।
पहाड़ों पर निरंतर या मूसलाधार बारिश की स्थिति में अचानक भूस्खलन (Landslide), बोल्डर गिरने और सड़कों के धंसने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात अवरुद्ध होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मौसम साफ होने पर ही यात्रा आगे बढ़ाने की सलाह दी है। पहाड़ी नालों के समीप रहने वाली बस्तियों को भी सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत: सामान्य बारिश से उमस से मिलेगी निजात
बिहार और झारखंड में भी 5 सितंबर को मानसूनी बादल सक्रिय रहेंगे। पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, रांची, जमशेदपुर और धनबाद सहित दोनों राज्यों के विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की जा सकती है। आसमान में घने बादल छाए रहने से पिछले दिनों से पड़ रही भीषण उमस और चिपचिपी गर्मी से आम नागरिकों को सुकून मिलेगा।
पूर्वी भारत के अन्य राज्यों—विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय अंचलों में भी बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के चलते मध्यम बारिश का क्रम बना रहेगा। पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी सितंबर के दौरान मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत बेहतर रहने का अनुमान है, जिससे वहां के कृषि क्षेत्रों को पर्याप्त जल मिलने की संभावना है।
उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत: पंजाब, हरियाणा में बूंदाबांदी, दक्षिण में सुस्त मानसून
उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान के कुछ पूर्वी हिस्सों में 5 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने और छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश रेगिस्तानी इलाकों में मौसम शुष्क और गर्म बना रहेगा, जिससे वहां अधिकतम तापमान में हल्की वृद्धि हो सकती है।
दूसरी ओर, प्रायद्वीपीय और दक्षिण भारत—कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मानसूनी गतिविधियां काफी हद तक शांत (Subdued) रहने का अनुमान है। स्थानीय संवहनीय बादलों के चलते कुछ तटीय क्षेत्रों में छिटपुट बारिश संभव है, किंतु व्यापक और मूसलाधार बारिश का कोई संकेत नहीं है।
Aaj Ka Mausam 5 September 2026: सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान और किसानों की चिंता
मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की समीक्षात्मक रिपोर्टों के अनुसार, प्रशांत महासागर में तेजी से प्रभावी हो रही एल नीनो प्रणाली के कारण भारत में वर्ष 2026 के मानसून का अंतिम चरण कमजोर पड़ता दिख रहा है। अगस्त में बारिश की कमी दर्ज किए जाने के बाद अब सितंबर के समूचे महीने में भी देशभर में कुल बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) से कम रहने का आधिकारिक अनुमान जताया गया है।
यह स्थिति देश के कृषि क्षेत्र के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर रही है। वर्तमान समय में खरीफ की मुख्य फसलें—जैसे धान, सोयाबीन, मक्का, मूंगफली और कपास—विकास के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण में हैं, जहां उन्हें संतुलित सिंचाई की दरकार होती है। जहां मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अत्यधिक बारिश से जलभराव का खतरा है, वहीं देश के अन्य हिस्सों में वर्षा की कमी से खरीफ की उत्पादकता घटने और आगामी रबी सत्र में गेहूं व चने की बुवाई के लिए आवश्यक मिट्टी की नमी कम होने की गहरी आशंका गहरा रही है।
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