Thursday Puja Vidhi: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार यानी बृहस्पतिवार का दिन अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। यह दिन जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु और नवग्रहों में सबसे शुभ व ज्ञान प्रदाता देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। ज्योतिष के अनुसार, गुरु ग्रह ज्ञान, सद्बुद्धि, भाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन, संतान और आर्थिक समृद्धि का मुख्य कारक है।
यदि कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर हो, तो व्यक्ति को शिक्षा, विवाह, करियर और धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गुरुवार के दिन विधिवत पूजा-अर्चना और विशेष उपाय करने से कुंडली में गुरु मजबूत होता है तथा जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
Thursday Puja Vidhi: गुरुवार की पूजा का महत्व और ज्योतिषीय लाभ
गुरुवार की पूजा मुख्य रूप से भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति की प्रसन्नता के लिए की जाती है। इस दिन केले के वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है, क्योंकि मान्यता है कि इसमें साक्षात भगवान विष्णु और गुरु ग्रह का वास होता है।
इस दिन पूजा करने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के योग बनते हैं। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के ज्ञान व एकाग्रता में वृद्धि होती है। व्यापार, नौकरी और आजीविका में स्थिरता आकर आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है तथा परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
गुरुवार की सरल एवं प्रामाणिक पूजा विधि
गुरुवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पूर्व उठें। नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्नान के जल में एक चुटकी पिसी हल्दी मिलाकर स्नान करें। स्नान के पश्चात स्वच्छ पीले रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु और बृहस्पति दोनों को अत्यंत प्रिय है।
घर के पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा अथवा व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु को हल्दी या पीले चंदन का तिलक लगाएं और स्वयं भी मस्तक पर पीला तिलक लगाएं। श्रीहरि को पीले पुष्प, पीले वस्त्र, तुलसी दल, भीगी हुई चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। भोग के रूप में बेसन के लड्डू, पीले फल अथवा केसरयुक्त खीर चढ़ाएं।
पूजा के दौरान शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूपबत्ती जलाएं। इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का 108 बार श्रद्धापूर्वक जप करें। अंत में विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पतिवार की व्रत कथा पढ़कर आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
व्रत और दान के विशेष नियम
जो श्रद्धालु गुरुवार का व्रत रखना चाहते हैं, वे सुबह संकल्प लेकर दिनभर फलाहार रहें। यदि भोजन करना आवश्यक हो, तो शाम की पूजा के बाद एक समय बिना नमक वाला सात्विक पीला भोजन (जैसे चने की दाल, बेसन का हलवा या पीले फल) ग्रहण करें। सामान्यतः किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए लगातार 16 गुरुवार तक व्रत रखने और 17वें गुरुवार को विधिवत उद्यापन करने की परंपरा है।
गुरुवार के दिन दान का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। सामर्थ्य अनुसार किसी मंदिर के पुरोहित, वृद्धजन अथवा जरूरतमंदों को चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, पपीता, केला या धार्मिक पुस्तकें दान करें। इस दिन केले के पेड़ की जड़ में तांबे के लोटे से जल, हल्दी और कच्चा दूध मिलाकर अर्पित करने और 7 बार परिक्रमा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
Thursday Puja Vidhi: गुरुवार के दिन क्या न करें
गुरुवार के दिन शास्त्रों में कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है ताकि घर की लक्ष्मी और सुख-समृद्धि बनी रहे। इस दिन बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए। घर में गीला पोछा लगाने, कपड़े धोने और कबाड़ बेचने से बचना चाहिए। किसी के साथ कटु वचन, वाद-विवाद या असत्य बोलने से परहेज करें। साथ ही पूजा के लिए केले के वृक्ष की पूजा की जाती है, इसलिए व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन केले का सेवन नहीं करना चाहिए।
Read More Here
Hyundai Creta Car : हुंडई क्रेटा खरीदने से पहले जान लें ये 3 फायदे और 2 कमियां
2 टिप्पणियाँ