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Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा की पैतृक संपत्ति पर विवाद, पोतियों ने डीएम को लिखा पत्र, जांच के आदेश

Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा की पैतृक संपत्ति पर विवाद, पोतियों ने डीएम को लिखा पत्र, जांच के आदेश
Neem Karoli Baba

सारांश

  • Neem Karoli Baba: फिरोजाबाद जिले में विश्व प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा की पैतृक संपत्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
  • स्थानीय लोग भी इस खबर पर चर्चा कर रहे हैं। बाबा के नाम से जुड़े किसी भी मामले में संवेदनशीलता ज्यादा रहती है।
  • उनकी लोकप्रियता बाद के वर्षों में बहुत बढ़ी। खासकर विदेशों में भी उनके भक्त बढ़े।
  • फिरोजाबाद में बाबा का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। उनकी पैतृक जगह पर कोई भी विवाद स्थानीय लोगों को छू जाता है।

Neem Karoli Baba: फिरोजाबाद जिले में विश्व प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा की पैतृक संपत्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बाबा की छह पोतियों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि बाबा का पुराना घर, मंदिर और डाक बंगला वाली जगह पर ट्रस्ट कब्जा कर रहा है। वहीं ट्रस्ट का साफ दावा है कि ये सभी स्थान उन्हें पहले ही सौंप दिए गए थे। डीएम ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मामला इतना संवेदनशील है कि अब सवाल उठ रहा है कि आखिर सालों बाद यह विवाद क्यों सामने आया।

बाबा नीम करोली का असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। साल 1900 के आसपास फिरोजाबाद में उनका जन्म हुआ। 1958 में उन्होंने घर छोड़ दिया। 1961 में नैनीताल के पास कैंची धाम पहुंचे और 1963 में वृंदावन में देह त्याग दी। आज उनकी पैतृक जमीन पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।

Neem Karoli Baba: बाबा का पुराना घर और मंदिर विवाद के केंद्र में

फिरोजाबाद में बाबा का पैतृक मकान और उससे जुड़ा मंदिर लंबे समय से चर्चा में रहा है। पोतियों का कहना है कि यह जगह परिवार की है। उन्होंने डीएम को भेजे पत्र में लिखा कि ट्रस्ट इन जगहों पर कब्जा जमा रहा है। डाक बंगला वाली जमीन भी इसी विवाद का हिस्सा है।

मामला कुछ इस तरह से सामने आया कि पोतियों ने प्रशासन से सीधा संपर्क किया। पत्र में उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराई। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर ध्यान दिया। डीएम ने जांच के आदेश दिए। अब तहसील स्तर पर पूछताछ शुरू होने वाली है।

स्थानीय लोग भी इस खबर पर चर्चा कर रहे हैं। बाबा के नाम से जुड़े किसी भी मामले में संवेदनशीलता ज्यादा रहती है। इसलिए प्रशासन सावधानी बरत रहा है।

ट्रस्ट का पक्ष और पुराने दावे

ट्रस्ट की तरफ से दावा किया जा रहा है कि बाबा का पुराना घर, मंदिर और डाक बंगला वाली जगह पहले ही उन्हें मिल चुकी थी। उनका कहना है कि दस्तावेज मौजूद हैं। पोतियों के आरोप को वे गलत बता रहे हैं।

जानकार बताते हैं कि कैंची धाम से जुड़े ट्रस्ट लंबे समय से बाबा की विरासत संभाल रहे हैं। लेकिन फिरोजाबाद वाली पैतृक संपत्ति का मामला अलग है। यहां दस्तावेजों की जांच ही असली कसौटी बनेगी। दोनों पक्ष अपने-अपने कागजात प्रशासन के सामने रखेंगे।

नीम करोली बाबा की संक्षिप्त जीवन यात्रा

लक्ष्मीनारायण शर्मा का जन्म फिरोजाबाद में हुआ। कम उम्र में ही वे आध्यात्मिक राह पर चल पड़े। 1958 में घर छोड़ने के बाद वे कई जगह घूमे। 1961 में कैंची धाम पहुंचे। वहां उन्होंने साधना की। 1963 में वृंदावन में उन्होंने शरीर त्याग दिया।

उनकी लोकप्रियता बाद के वर्षों में बहुत बढ़ी। खासकर विदेशों में भी उनके भक्त बढ़े। लेकिन उनकी पैतृक जमीन पर विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। पोतियों का पत्र आने के बाद मामला प्रशासनिक फाइल में पहुंच गया है।

डीएम की जांच और आगे की प्रक्रिया

जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं। अब राजस्व विभाग और तहसील अधिकारी दस्तावेजों की जांच करेंगे। दोनों पक्षों से बयान लिए जाएंगे। पुराने रिकॉर्ड देखे जाएंगे।

देखने पर लगता है कि यह विवाद सिर्फ जमीन का नहीं। बाबा के नाम से जुड़ी भावनाएं भी इसमें शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर लोग उत्सुक हैं कि जांच में क्या निकलता है। अगर दस्तावेज साफ निकले तो विवाद जल्दी सुलझ सकता है। नहीं तो अदालत का दरवाजा भी खुल सकता है।

एक अप्रत्याशित पहलू यह है कि बाबा ने 1958 में घर छोड़ दिया था। तब से लेकर आज तक कई दशक बीत चुके। इतने लंबे अंतराल के बाद पोतियों का पत्र आना कई लोगों को हैरान कर रहा है।

Neem Karoli Baba: स्थानीय असर और आम लोगों की प्रतिक्रिया

फिरोजाबाद में बाबा का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। उनकी पैतृक जगह पर कोई भी विवाद स्थानीय लोगों को छू जाता है। कुछ लोग परिवार के हक की बात कर रहे हैं। कुछ ट्रस्ट के पक्ष में बोल रहे हैं।

मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ सकता है क्योंकि नीम करोली बाबा की लोकप्रियता सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं। कैंची धाम में हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसलिए यह विवाद सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि भावनाओं से भी जुड़ा है।

प्रशासन अभी जांच पर फोकस कर रहा है। कोई भी पक्ष जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम नहीं उठा रहा। दोनों तरफ से इंतजार है कि जांच रिपोर्ट क्या कहती है।

बाबा की छह पोतियों ने जो पत्र लिखा, उसमें साफ आरोप हैं। ट्रस्ट ने उनका खंडन किया है। डीएम की जांच ही अब दोनों दावों की सच्चाई सामने लाएगी। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है। अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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