Shiprocket IPO Listing: शिपरॉकेट के शेयरों ने बुधवार 19 अगस्त को शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। कंपनी के शेयर एनएसई पर 131 रुपये और बीएसई पर 129.50 रुपये के भाव पर लिस्ट हुए। आईपीओ प्राइस 97 रुपये के मुकाबले निवेशकों को लिस्टिंग पर करीब 34 से 35 फीसदी का फायदा मिला। लिस्टिंग के बाद भी शेयर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
सुबह 10 बजकर 34 मिनट पर बीएसई पर यह शेयर 8.57 फीसदी की बढ़त के साथ 140.60 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। इस तरह आईपीओ में पैसा लगाने वालों को करीब 45 फीसदी का फायदा होता दिखा।
Shiprocket IPO Listing: लिस्टिंग प्रीमियम और बाजार की उम्मीद
बाजार में शिपरॉकेट की लिस्टिंग को लेकर पहले से अच्छी उम्मीदें बनी हुई थीं। ग्रे मार्केट में शेयर करीब 35 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे। इस आधार पर अनुमान था कि शेयर करीब 132 रुपये के आसपास बाजार में एंट्री लेगा। वास्तविक लिस्टिंग भाव भी इसी अनुमान के काफी करीब रहा। मजबूत डिमांड और ई-कॉमर्स सेक्टर में रुचि के कारण निवेशकों ने शेयर को अच्छे प्रीमियम पर अपनाया। लिस्टिंग के तुरंत बाद खरीदारी जारी रहने से भाव और चढ़ गए।
आईपीओ से जुटाई गई रकम का ब्यौरा
शिपरॉकेट के आईपीओ में फ्रेश इश्यू के जरिए 9.13 करोड़ नए शेयर जारी किए गए थे जिनकी कुल कीमत करीब 885.60 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा 7.55 करोड़ शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के जरिए हुई जिसकी वैल्यू करीब 731.98 करोड़ रुपये रही। कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कारोबार को आगे बढ़ाने और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने में करेगी। करीब 294 करोड़ रुपये मार्केटिंग और ब्रांड को मजबूत करने पर खर्च किए जाने हैं।
Shiprocket IPO Listing: फंड का इस्तेमाल और विस्तार योजना
कंपनी करीब 211 करोड़ रुपये अपने टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए लगाएगी। इसका फायदा मौजूदा कारोबार के साथ नए बिजनेस वर्टिकल को बढ़ाने में मिलने की उम्मीद है। प्लेटफॉर्म को और उन्नत बनाकर शिपरॉकेट छोटे और बड़े व्यापारियों को बेहतर सेवाएं देना चाहती है। मार्केटिंग पर खर्च से ब्रांड की पहुंच बढ़ाने और नए ग्राहकों को आकर्षित करने का लक्ष्य है। इन निवेशों से कंपनी की दीर्घकालिक ग्रोथ को समर्थन मिलने की संभावना है।
शिपरॉकेट क्या काम करती है?
शिपरॉकेट एक टेक्नोलॉजी आधारित ई-कॉमर्स कंपनी है। यह कारोबारियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री से जुड़े कई काम एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए संभालने में मदद करती है। कंपनी की सेवाओं में शिपिंग, चेकआउट, पेमेंट, ऑर्डर की पूर्ति, इंटरनेशनल यानी क्रॉस-बॉर्डर कारोबार और कस्टमर एक्सपीरियंस जैसी सुविधाएं शामिल हैं। आसान भाषा में कहें तो शिपरॉकेट व्यापारियों को सामान बेचने से लेकर उसकी डिलीवरी और ग्राहक से जुड़े कई काम संभालने के लिए एक साथ कई सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
Shiprocket IPO Listing: विशेषज्ञों की राय और वैल्यूएशन
आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स में हेड फंडामेंटल रिसर्च नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि वैल्यूएशन के लिहाज से देखें तो वित्त वर्ष 2026 की सालाना अनुमानित कमाई के आधार पर कंपनी को ऑपरेटिंग और नेट दोनों स्तरों पर घाटा हो रहा है। इसलिए पीई की गणना नहीं की जा सकती। उनका मानना है कि भारत के ई-कॉमर्स बाजार में लगातार हो रही ग्रोथ का शिपरॉकेट को फायदा मिल सकता है। कंपनी का मुनाफे वाला कोर बिजनेस ग्रोथ के लिए मजबूत आधार देता है जबकि उभरते हुए बिजनेस आगे बढ़ने के अतिरिक्त मौके उपलब्ध कराते हैं।
बाजार में प्रतिक्रिया और निवेशकों का लाभ
लिस्टिंग के बाद शेयर में आई तेजी से आईपीओ निवेशकों का उत्साह बढ़ा है। 97 रुपये पर एलॉटमेंट पाने वालों को मौजूदा भाव पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है। ग्रे मार्केट प्रीमियम के अनुरूप लिस्टिंग ने बाजार की धारणा को मजबूत किया। ई-कॉमर्स सेक्टर में बढ़ती मांग और कंपनी की सेवाओं की व्यापकता को निवेशक सकारात्मक मान रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने घाटे वाली स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।
Shiprocket IPO Listing: ई-कॉमर्स सेक्टर में संभावनाएं
भारत में ई-कॉमर्स बाजार के लगातार विस्तार से शिपरॉकेट जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। लॉजिस्टिक्स, पेमेंट और कस्टमर सर्विस को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की रणनीति कंपनी को प्रतिस्पर्धा में मजबूती दे सकती है। क्रॉस-बॉर्डर कारोबार जैसे नए वर्टिकल ग्रोथ के अतिरिक्त अवसर पैदा कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी अपग्रेड और ब्रांड बिल्डिंग पर फोकस से कंपनी अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।
शिपरॉकेट के शेयरों ने 19 अगस्त को 35 फीसदी के प्रीमियम पर लिस्टिंग के बाद करीब 9 फीसदी की अतिरिक्त तेजी दिखाई। आईपीओ निवेशकों को लगभग 45 फीसदी का फायदा होता नजर आया। कंपनी फ्रेश इश्यू से जुटाई रकम का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग में करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कॉमर्स ग्रोथ से कंपनी को लाभ मिल सकता है हालांकि वर्तमान में घाटे की स्थिति बनी हुई है। यह लिस्टिंग ई-कॉमर्स सेक्टर में निवेशकों की रुचि को दर्शाती है।
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