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UP CM Yogi: अयोध्या मछली भोज विवाद पहुंचा कोर्ट, अजय राय ने सीएम योगी के खिलाफ ठोका मानहानि का केस

UP CM Yogi: अयोध्या मछली भोज विवाद पहुंचा कोर्ट, अजय राय ने सीएम योगी के खिलाफ ठोका मानहानि का केस
UP CM Yogi

सारांश

  • UP CM Yogi: उत्तर प्रदेश की सियासत में अयोध्या मछली भोज विवाद अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे अदालत के दरवाजे तक जा पहुंचा है।
  • राजनीतिक गलियारों में इस कदम को हल्के में नहीं लिया जा रहा। विपक्ष के प्रदेश अध्यक्ष का सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाना, उत्तर प्रदेश की राजनीति में आम बात नहीं है।
  • विवाद बढ़ने पर अजय राय ने साफ किया था कि वे निषाद समाज के आयोजन में शामिल होने गए थे।
  • इस दौरान उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए दोहरे रवैये का आरोप लगाया था।

UP CM Yogi: उत्तर प्रदेश की सियासत में अयोध्या मछली भोज विवाद अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे अदालत के दरवाजे तक जा पहुंचा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दाखिल कर दिया है। मंगलवार को वे खुद लखनऊ सिविल कोर्ट पहुंचे और अपना दावा पेश किया। उनका कहना है कि मछली खाने का झूठा आरोप लगाकर जानबूझकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया। अब सवाल यह है कि इस कानूनी दांव के बाद प्रदेश की राजनीति किस करवट बैठेगी।

दरअसल कुछ दिन पहले अयोध्या में अजय राय के एक स्वागत कार्यक्रम को लेकर बवाल खड़ा हुआ था। भाजपा ने सावन के पवित्र महीने में कथित मछली भोज को सनातन परंपरा के खिलाफ बताते हुए तीखा हमला बोला था। अजय राय ने शुरू से ही इन आरोपों को सिरे से नकारा और पलटवार किया। लेकिन अब मामला अदालत में पहुंचने के बाद यह सिर्फ राजनीतिक जुमलेबाजी नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है।

UP CM Yogi: लखनऊ सिविल कोर्ट में दर्ज हुआ मानहानि का दावा

अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सिविल कोर्ट में विधिवत मानहानि का मुकदमा दायर किया है। कांग्रेस का साफ कहना है कि अयोध्या में मछली खाने के आरोप पूरी तरह निराधार और गलत थे। इन्हीं आरोपों की वजह से उनकी सार्वजनिक छवि को गहरा धक्का लगा, और इसी वजह से पार्टी ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया। मामला अब अदालत के सामने है, और आगे दोनों पक्षों को अपने-अपने तर्क और सबूत पेश करने होंगे।

राजनीतिक गलियारों में इस कदम को हल्के में नहीं लिया जा रहा। विपक्ष के प्रदेश अध्यक्ष का सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाना, उत्तर प्रदेश की राजनीति में आम बात नहीं है। आने वाली सुनवाइयों में कौन से तर्क सामने रखे जाते हैं, इस पर सबकी नजर टिकी रहेगी।

अयोध्या के कार्यक्रम से भड़का था पूरा विवाद

असल विवाद की जड़ अयोध्या में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में हुए एक कार्यक्रम से जुड़ी है, जहां मछली भोज की चर्चा जोर पकड़ गई थी। भाजपा ने इसे सावन के महीने से जोड़ते हुए सनातन आस्था के अपमान जैसा मुद्दा बना दिया। इसके बाद दोनों तरफ से बयानबाजी का दौर तेजी से बढ़ता चला गया, और अजय राय ने हर आरोप को खारिज करते हुए जवाब दिया।

देखने पर लगता है कि एक स्थानीय आयोजन कैसे राष्ट्रीय स्तर की बहस में बदल गया। निषाद समाज से जुड़े इस कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग दलों ने अपनी-अपनी व्याख्या पेश की, और हर पार्टी ने इसे अपने राजनीतिक फायदे के हिसाब से भुनाने की कोशिश की।

निषाद समाज की परंपरा बताकर दी थी सफाई

विवाद बढ़ने पर अजय राय ने साफ किया था कि वे निषाद समाज के आयोजन में शामिल होने गए थे। उन्होंने कहा कि मछली पकड़ना और खाना उस समुदाय की सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, और चूंकि उन्हें आमंत्रित किया गया था इसलिए वे वहां पहुंचे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि निषादराज ने भगवान राम की उस समय मदद की थी जब उन्हें नदी पार करानी थी, इसलिए समाज बुलाए तो जाना उनकी जिम्मेदारी बनती है।

खुद को काशी विश्वनाथ का भक्त बताते हुए उन्होंने मछली खाने के आरोप को पूरी तरह गलत करार दिया था। मामला कुछ इस तरह से बना कि आस्था और सामाजिक परंपरा दोनों एक साथ चर्चा के केंद्र में आ गए, और आम लोगों के बीच भी इस सफाई को लेकर खासी बातचीत हुई।

इस्तीफे की चुनौती से शुरू हुआ था असली मोड़

यहीं पर एक दिलचस्प और अप्रत्याशित मोड़ भी आया। अजय राय ने खुद ही एक बड़ी चुनौती दे डाली थी, अगर मछली खाते हुए उनकी कोई तस्वीर सामने आती है तो वे प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ देंगे। लेकिन अगर तस्वीर पेश नहीं की जा सकी, तो उनका कहना था कि मुख्यमंत्री को खुद इस्तीफा दे देना चाहिए। यही चुनौती अब घूमफिर कर अदालत के दरवाजे तक जा पहुंची है।

इस दौरान उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए दोहरे रवैये का आरोप लगाया था। उन्होंने आंध्र प्रदेश से जुड़ी एक तस्वीर का हवाला दिया, जिसमें एक भाजपा नेता के मांसाहारी भोजन को कथित तौर पर कटहल बताकर पेश किया गया था। जानकार बताते हैं कि यही तुलना विवाद को और हवा देने वाली साबित हुई।

UP CM Yogi: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने, अदालत तय करेगी सच्चाई

कांग्रेस इस पूरे प्रकरण को अब प्रतिष्ठा और सम्मान की लड़ाई बता रही है। वहीं भाजपा की तरफ से शुरू से ही इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया गया था। दोनों पक्ष अभी भी अपने-अपने रुख पर मजबूती से टिके नजर आ रहे हैं, और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी होने की पूरी संभावना है।

अयोध्या जैसे धार्मिक और संवेदनशील शहर से जुड़ा यह विवाद स्थानीय स्तर पर भी खूब चर्चा में रहा। निषाद समुदाय के लोग इसे अपनी परंपरा का हिस्सा मानते हैं, तो वहीं कुछ वर्गों ने सावन के महीने में मांसाहार को लेकर आपत्ति जताई। आम जनता इस पूरे सियासी घमासान को दूर से देख रही है, लेकिन अब मामला अदालत में पहुंचने से सबूत और गवाही ज्यादा अहमियत रखेंगे।

अजय राय के इस कानूनी कदम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है। मानहानि का मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों तरफ से और तीखे बयान आने की उम्मीद है। तस्वीरों और कार्यक्रम की असल हकीकत क्या थी, इसका फैसला अब अदालत के हाथ में है। लोग इस कानूनी लड़ाई के अगले पड़ाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, और राजनीतिक दलों के अगले रुख पर हर किसी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई से जुड़े हर अपडेट पर लोगों की दिलचस्पी बनी रहेगी।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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