Sugar price Hike: देश में त्योहारों से ठीक पहले आम आदमी की जेब पर महंगाई की नई मार पड़ी है। पिछले एक महीने के भीतर खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई को जो चीनी 48.18 रुपये प्रति किलो बिक रही थी वह 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।

कीमतों में आई इस तेजी ने केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज कर दी है। सरकार उत्पादन में गिरावट के पीछे रेड रॉट बीमारी और एलनिनो जैसे मौसमी कारकों को जिम्मेदार बता रही है जबकि विपक्ष एथेनॉल डायवर्जन और किसानों के बकाए का मुद्दा उठा रहा है।

Sugar price Hike: चीनी कीमतों में एक महीने का उछाल

मंत्रालय के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि बीस जुलाई से बीस अगस्त के बीच चीनी के दाम में सात रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। खुदरा बाजार में यह तेजी आम उपभोक्ताओं को直接影响 कर रही है। त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने की आशंका से बाजार और संवेदनशील हो गया है। कीमतों की निगरानी अब प्रशासनिक स्तर पर तेज कर दी गई है।

सरकार का दावा उत्पादन प्रभावित होने की वजह

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि गन्ना उत्पादन में गिरावट के पीछे मुख्य रूप से रेड रॉट यानी लाला सड़न बीमारी और एलनिनो जैसे मौसमी कारक जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक स्तर पर कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है। मौसम और बीमारी दोनों ने पैदावार पर असर डाला है।

Sugar price Hike: देश में पर्याप्त स्टॉक होने का दावा

केंद्रीय मंत्री के अनुसार भारत की वार्षिक चीनी आवश्यकता लगभग दो सौ अस्सी लाख टन है। देश के पास फिलहाल बीस से पच्चीस लाख टन का सरप्लस स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद आगामी त्योहारों के दौरान मांग में होने वाले इजाफे को देखते हुए सरकार ने एहतियातन कच्ची चीनी के अस्थायी आयात समेत कई जरूरी कदम उठाए हैं। बाजार में उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रशासन की अपील और निगरानी

वाराणसी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाजारों में चीनी की कोई कमी नहीं है। अपर जिलाधिकारी नागरिक आपूर्ति अमित कुमार भारतीय ने बताया कि खाद्य विभाग की टीमें लगातार कीमतों और उपलब्धता पर नजर बनाए हुए हैं। थोक व खुदरा व्यापारियों को पोर्टल पर दैनिक स्टॉक दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जमाखोरी रोकी जा सके। प्रशासन ने आम जनता से पैनिक बाइंग न करने की अपील की है।

Sugar price Hike: विपक्ष का गन्ना किसानों के बकाए पर हमला

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गन्ना किसानों को एक-एक साल तक भुगतान नहीं मिलता जिससे वे गन्ने की खेती से दूर हो रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो भारत कभी चीनी का निर्यात करता था वह आज आयात करने को मजबूर है। किसानों के बकाए को लेकर विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है।

एथेनॉल डायवर्जन को लेकर सवाल

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने गन्ने के रस को एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं तब चीनी के कच्चे माल को गाड़ियों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना आम जनता पर बोझ बढ़ा रहा है। विपक्ष इसे कीमत वृद्धि का एक कारण बता रहा है।

मंत्रालय का एथेनॉल पर स्पष्टीकरण

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने साफ किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण एथेनॉल निर्माण नहीं है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक एथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन 2022-23 के बारह प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग नौ प्रतिशत रह गया है। वर्तमान में देश के कुल एथेनॉल उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मक्के जैसे अनाजों से तैयार किया जा रहा है।

Sugar price Hike: बाजार स्थिरता के लिए उठाए जा रहे कदम

सरकार ने त्योहारों से पहले आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कच्ची चीनी के अस्थायी आयात का विकल्प खुला रखा है। प्रशासन स्तर पर जमाखोरी रोकने और दैनिक स्टॉक अपडेट कराने के निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ताओं से जरूरत से ज्यादा खरीदने से बचने की अपील की जा रही है। कीमतों पर नजर रखने के साथ उपलब्धता बनाए रखने पर फोकस है।

देश में चीनी के दाम एक महीने के अंदर 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं। सरकार गन्ना उत्पादन में गिरावट के पीछे रेड रॉट बीमारी और एलनिनो को जिम्मेदार बता रही है। वार्षिक जरूरत दो सौ अस्सी लाख टन के मुकाबले बीस से पच्चीस लाख टन सरप्लस स्टॉक होने का दावा किया जा रहा है।

विपक्ष किसानों के बकाए और एथेनॉल डायवर्जन का मुद्दा उठा रहा है जबकि मंत्रालय का कहना है कि एथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन घटकर नौ प्रतिशत रह गया है। प्रशासन पैनिक बाइंग से बचने और जमाखोरी रोकने की अपील कर रहा है। त्योहारों से पहले बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।

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