Sarson Mandi Bhav 14 October: देशभर की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में तिलहन फसलों, विशेष रूप से सरसों के भावों में तेजी और मजबूती का रुख लगातार बना हुआ है। 13 अक्टूबर 2026 तक दर्ज किए गए ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार घरेलू तेल मिलों की आक्रामक लिवाली और सीमित आवक के चलते सरसों के भाव केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर कारोबार कर रहे हैं। त्योहारी मांग और रबी विपणन सीजन 2026-27 की नई बुवाई शुरू होने से ठीक पहले राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात की मंडियों में सक्रिय सौदे देखने को मिल रहे हैं। खुले बाजार में मिल रहे इन आकर्षक दामों से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं और वे अपनी उपज को अच्छे मुनाफे पर बेचने में सफल हो रहे हैं।
Sarson Mandi Bhav 14 October: उत्तर प्रदेश की मंडियों में सरसों का ताजा रुख
उत्तर प्रदेश की प्रमुख कृषि मंडियों में सरसों के भावों में उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की जा रही है। राज्य भर में सरसों का औसत मंडी भाव लगभग 7,973 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बना हुआ है। तराई बेल्ट की प्रमुख लखीमपुर मंडी में उच्च गुणवत्ता वाली सरसों का भाव 8,920 रुपये प्रति क्विंटल के ऊपरी स्तर तक पहुंच गया, जबकि सामान्य लॉट के लिए न्यूनतम भाव 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहा।
इसके अलावा बुंदेलखंड और मध्य यूपी के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे कानपुर, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा और फतेहपुर की मंडियों में भी भाव 7,000 रुपये से लेकर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के मजबूत दायरे में बने हुए हैं। स्थानीय तेल पेराई इकाइयों और बड़ी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन मिलों द्वारा सीधी खरीद किए जाने के कारण अच्छी कंडीशन और उच्च तेल प्रतिशत (ऑयल कंटेंट) वाली सरसों को तुरंत प्रीमियम भाव मिल रहा है।
राजस्थान में मजबूत कीमतों का दौर: औसत भाव 8,000 रुपये के पार
देश के सबसे बड़े सरसों उत्पादक राज्य राजस्थान में कीमतों में लगातार मजबूती देखी जा रही है। राज्य की अधिकांश मंडियों में सरसों का औसत व्यापारिक भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर बना हुआ है। टोंक जिले की प्रसिद्ध मालपुरा मंडी में 8,700 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर सौदे दर्ज किए गए।
वहीं राज्य की बेंचमार्क मंडियों जैसे जयपुर, टोंक, कोटा, भरतपुर और अलवर में कीमतें 8,000 रुपये से 8,300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच मजबूती से टिकी हुई हैं। राजस्थान की बड़ी तेल रिफाइनरियों और कोल्हू संचालकों के पास पेराई के लिए पुराने स्टॉक की कमी होने के कारण वे दैनिक आवक को हाथों-हाथ उठा रहे हैं। सरकारी समर्थन मूल्य की तुलना में खुले बाजार में मिल रहे इस भारी प्रीमियम से किसान काफी उत्साहित हैं।
गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तरी राज्यों का बाजार परिदृश्य
पश्चिमी और मध्य भारत के अन्य राज्यों में भी तेजी का रुख कायम है। गुजरात की प्रमुख मंडियों में प्रीमियम क्वालिटी वाली सरसों के सौदे 9,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छूते नजर आए। मध्य प्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र जैसे मुरैना, भिंड, श्योपुर और ग्वालियर की मंडियों में सरसों 7,000 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में बिक रही है।
दूसरी ओर पंजाब और हरियाणा की अनाज मंडियों में आवक की गति थोड़ी धीमी रहने के बावजूद औसत भाव स्थिर बने हुए हैं। कुल मिलाकर पूरे देश का तिलहन बाजार इस समय पूरी तरह मांग-संचालित बना हुआ है, जहां आपूर्ति की तुलना में मिलों की खपत अधिक बनी हुई है।
सरसों की कीमतों में उछाल के पीछे के प्रमुख कारण
मौजूदा समय में सरसों के भावों को मजबूती प्रदान करने में कई बुनियादी कारक काम कर रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण त्योहारी सीजन के दौरान शुद्ध सरसों तेल की घरेलू खपत में आया उछाल है, जिसके चलते मिलें लगातार पूरी क्षमता से चल रही हैं। स्थिर दैनिक आवक के बावजूद मंडियों में सूखे और 40 से 42 प्रतिशत तेल की मात्रा वाले प्रीमियम दानों की उपलब्धता सीमित है, जिससे खरीदारों के बीच होड़ मची हुई है।
इसके अतिरिक्त रबी सीजन 2026-27 की बुवाई का समय नजदीक आ चुका है, जिससे किसान भी अपनी फसल को रोक-रोक कर बाजार में ला रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार में पाम तेल और सोयाबीन तेल की मजबूत कीमतों का समर्थन भी घरेलू स्तर पर सरसों के भावों को ऊंचा बनाए रखने में मदद कर रहा है।
Sarson Mandi Bhav 14 October: किसानों और व्यापारियों के लिए आगे की राह और बाजार संभावना
जिंस बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मंडियों में नई फसल की आवक शुरू नहीं हो जाती, तब तक सरसों के भावों में किसी बड़े करेक्शन या भारी मंदी के आसार बेहद कम हैं। आने वाले हफ्तों में नई रबी बुवाई का कुल रकबा और मौसम की परिस्थितियां आगे की दीर्घकालिक दिशा तय करेंगी।
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान अपनी उपज में नमी का स्तर नियंत्रित रखें ताकि मंडियों में उन्हें सर्वोत्तम भाव मिल सके। वहीं व्यापारियों और स्टाकिस्टों को मौजूदा उच्च स्तरों पर मांग के अनुसार संतुलित सौदे करने चाहिए। खुले बाजार में मिल रहा यह मजबूत मूल्य ढांचा न केवल किसानों की आय को मजबूती दे रहा है, बल्कि आने वाले रबी सत्र में सरसों के बुवाई रकबे में भी भारी विस्तार का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
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