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Sajjan Kumar Death: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद ने सफदरजंग अस्पताल में अंतिम सांस ली

Sajjan Kumar Death: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद ने सफदरजंग अस्पताल में अंतिम सांस ली
Sajjan Kumar Death
Sajjan Kumar Death: दिल्ली की सियासत और कानूनी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। जहां डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद उन्हें मृत लाया घोषित (ब्रॉट डेड) कर दिया। उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया और उनके बेटे जग प्रवेश कुमार तुरंत अस्पताल पहुंचे। यह खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं कि आखिर जेल की चारदीवारी के बीच ऐसा क्या हुआ और अचानक यह सब कैसे हो गया।
सज्जन कुमार लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे थे। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने के बाद से तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। देश के राजनीतिक इतिहास में उनका नाम एक ऐसे दौर से जुड़ा था, जिसने कई चेहरों को हमेशा के लिए बेनकाब कर दिया। अदालत के फैसले के बाद से वह सलाखों के पीछे थे और कानूनी लड़ाइयों के बीच उनकी जिंदगी का यह अंत हुआ है।

Sajjan Kumar Death: ऐसा रहा राजनीतिक सफर और सियासी कद

सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। सत्तर के दशक में उन्होंने राजनीति की दुनिया में कदम रखा था। शुरुआत में वह दिल्ली नगर निगम के काउंसलर बने और फिर धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करते चले गए। वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव पद तक पहुंचे। अपने राजनीतिक रसूख के दम पर उन्होंने साल 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की और सांसद बने। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी के बेहद करीबियों में गिना जाता था। बाहरी दिल्ली के इलाके में उन्हें कांग्रेस का सबसे मजबूत और कद्दावर चेहरा माना जाता था। हालांकि, साल 2018 में जब अदालत से उन्हें दोषी ठहराए जाने का फैसला आया, तो उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

Sajjan Kumar Death: कानूनी शिकंजा और जेल का सफर

सज्जन कुमार पर साल 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान भीड़ को उकसाने, हत्या और बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काने के गंभीर आरोप थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को पालम कॉलोनी मामले में फैसला सुनाते हुए उन्हें दोषी माना था। इस मामले में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को आग के हवाले करने का संगीन आरोप साबित हुआ था, जिसके बाद उन्हें उम्रकैद की सजा मिली। इसके अलावा, इसी साल फरवरी महीने में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सरस्वती विहार से जुड़े एक अन्य मामले में भी उन्हें दोषी करार दिया। इस मामले में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुनदीप सिंह की हत्या का आरोप था और अदालत ने यहां भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, कुछ अन्य मामलों जैसे सुल्तानपुरी और जनकपुरी-विकासपुरी से वह बरी भी हो चुके थे, लेकिन इन बड़ी सजाओं के चलते वह तिहाड़ जेल में बंद थे।
यह पूरा घटनाक्रम भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के इतिहास का एक अहम हिस्सा रहा है। दशकों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए फैसलों ने यह साबित किया कि न्याय मिलने में भले ही वक्त लगे, लेकिन कानून अपना काम करता है। जानकार बताते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल निधन के बाद अब इस पूरे प्रकरण के कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर एक बार फिर बहस छिड़ सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि उनके पार्थिव शरीर को लेकर परिवार और प्रशासन की आगे की क्या प्रक्रिया रहती है। मामले से जुड़ी तमाम औपचारिकताओं और आगे की जानकारियों का इंतजार किया जा रहा है।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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